दहशत पर भारी पड़ा भरोसा पहलगाम हमले की पहली बरसी से पहले कश्मीर में पर्यटकों का सैलाब, 0% से 90% पहुंची बुकिंग

News India Live, Digital Desk : कश्मीर घाटी से एक ऐसी तस्वीर सामने आ रही है जो न केवल सुकून देने वाली है, बल्कि आतंकवाद के गाल पर एक करारा तमाचा भी है। 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम के बैसरन में हुए उस काले दिन को एक साल पूरा होने वाला है, जिसमें 26 मासूमों की जान चली गई थी। हमले के बाद जहां घाटी का पर्यटन पूरी तरह चरमरा गया था, वहीं आज पहली बरसी से ठीक पहले पहलगाम और श्रीनगर के पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की भारी चहल-पहल एक नई कहानी बयां कर रही है।’शहीद मार्ग’ बना श्रद्धा और शांति का केंद्रपहलगाम में लिद्दर नदी के किनारे, मशहूर ‘सेल्फी पॉइंट’ के पास सरकार द्वारा निर्मित एक स्मारक आज हर पर्यटक के आकर्षण का केंद्र है। इसे ‘शहीद मार्ग’ के नाम से जाना जाता है। यह स्मारक उन 25 पर्यटकों और एक स्थानीय पोनी वाले की याद में बनाया गया है, जिन्होंने पिछले साल बैसरन के मैदान में हुए कायराना आतंकी हमले में अपनी जान गंवाई थी। यहां आने वाले पर्यटक न केवल कुदरती खूबसूरती का आनंद ले रहे हैं, बल्कि इस शहीदी स्मारक पर रुककर मृतकों को श्रद्धांजलि देना और मोमबत्तियां जलाना नहीं भूलते। यह जगह अब मौज-मस्ती के बीच गहरी शांति और आत्मचिंतन का प्रतीक बन गई है।ट्यूलिप गार्डन में उमड़ा जनसैलाब, सीमा पार बैठे आकाओं को करारा जवाबपर्यटन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि कश्मीर की खूबसूरती का जादू फिर से सिर चढ़कर बोल रहा है। पिछले एक महीने में श्रीनगर के ‘इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्यूलिप गार्डन’ में 2.5 लाख से ज्यादा पर्यटक पहुंचे हैं। प्रशासन और स्थानीय लोगों का मानना है कि पर्यटकों की यह रिकॉर्ड उपस्थिति उन आतंकवादियों और उनके सीमा पार बैठे आकाओं को सबसे बड़ा जवाब है, जो कश्मीर की अर्थव्यवस्था और शांति को पटरी से उतारना चाहते थे।जीरो से हीरो बनी पहलगाम की बुकिंग, सुरक्षा पर बढ़ा विश्वासपिछले साल अप्रैल के हमले के बाद जहां पहलगाम में होटलों की बुकिंग 0% तक गिर गई थी, वहीं इस साल यह आंकड़ा 90% को पार कर गया है। पर्यटकों का कहना है कि उनका यहां आने का फैसला डर पर नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत और सुरक्षा बलों पर भरोसे पर आधारित है। कई पर्यटकों ने कश्मीरियों की मेहमाननवाजी और सुरक्षा व्यवस्था की जमकर तारीफ की है। माहौल अब खौफ से निकलकर पूरी तरह भरोसे की ओर मुड़ चुका है।हाई-टेक सुरक्षा: QR कोड और डिजिटल ट्रैकिंग से लैस हुआ पहलगामप्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए ‘डिजिटल पहचान सिस्टम’ की शुरुआत की है। अब पहलगाम में पोनी ऑपरेटरों, दुकानदारों और गाइडों को विशेष QR कोड दिए गए हैं। पर्यटक इन कोड्स को स्कैन करके सेवा प्रदाता की सही पहचान, रजिस्ट्रेशन और पुलिस क्लियरेंस का स्टेटस तुरंत देख सकते हैं। इसके अलावा, टैक्सी ड्राइवरों और होटल स्टाफ के लिए GPS-आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम शुरू किया गया है, जिससे सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत तैयार हो गई है।बैसरन घाटी अब भी ‘नो-एंट्री जोन’, संवेदनशील इलाकों में सख्तीभले ही बेताब घाटी और अरु घाटी पर्यटकों के लिए पूरी तरह खुली हैं, लेकिन सुरक्षा कारणों से बैसरन घाटी (मिनी स्विट्जरलैंड) को अभी भी आम लोगों के लिए बंद रखा गया है। यह वही स्थान है जहां पिछले साल हमला हुआ था। सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने वहां बैरिकेड्स लगाए हैं और किसी भी तरह की फोटोग्राफी या वीडियोग्राफी पर सख्त पाबंदी है। सरकार का लक्ष्य है कि 2026 के अंत तक सुरक्षा की समीक्षा के बाद सभी 48 पर्यटन स्थलों को पूरी तरह खोल दिया जाए।खुफिया इनपुट के बाद सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट परहमले की पहली बरसी को देखते हुए पूरी घाटी में ‘मल्टी टायर’ सुरक्षा व्यवस्था तैनात की गई है। खुफिया रिपोर्टों में पर्यटन सेक्टर को फिर से निशाना बनाने की धमकियों के बाद सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। मुख्य स्थानों पर CCTV और FRS (चेहरा पहचानने वाले सिस्टम) कैमरों के जरिए निगरानी रखी जा रही है। विदेशी पर्यटकों और इमिग्रेशन नियमों को लेकर भी सख्ती बरती जा रही है ताकि कोई भी अप्रिय घटना न हो सके।आज पहलगाम सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ जीत और रिकवरी का एक वैश्विक प्रतीक बनकर उभरा है।