उत्तर प्रदेश

दाउद इब्राहिम को कराची में मारने का था प्‍लान, शूटर्स भी पहुंच गए थे! पूर्व IPS राजेश पांडेय का बड़ा दावा

दाउद इब्राहिम को उसके गढ़ कराची में ही ढेर करने का एक बेहद सनसनीखेज और गोपनीय प्लान तैयार किया गया था, जिसका खुलासा अब उत्तर प्रदेश के पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय ने एक निजी पॉडकास्ट के दौरान किया है। इस खुलासे के बाद से एक बार फिर से भारत के सबसे वांछित डॉन दाउद इब्राहिम की सुरक्षा और उसे नेस्तनाबूद करने के खुफिया रणनीतियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पूर्व आईपीएस के मुताबिक, इस मिशन को अंजाम तक पहुंचाने के लिए बकायदा ट्रेंड शूटर्स को भी कराची तक पहुंचा दिया गया था, लेकिन आखिरी वक्त पर ऐन मौके पर कुछ ऐसा हुआ जिससे यह पूरा हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन बीच में ही रोकना पड़ गया और डी-कंपनी का सरगना एक बार फिर मौत के मुंह से सुरक्षित बच निकला।

दाउद इब्राहिम को खत्म करने के लिए कराची तक पहुंच गए थे शूटर

भारतीय खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा तंत्र ने पाकिस्तान के कराची शहर में छिपे बैठे वैश्विक आतंकवादी और अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम को खत्म करने का जो खाका खींचा था, वह किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय के अनुसार, इस ऑपरेशन को बेहद गोपनीय तरीके से प्लान किया गया था ताकि भारत के इस सबसे बड़े दुश्मन को उसके ही घर में घुसकर ढेर किया जा सके। इसके लिए पूरी होमवर्किंग के साथ सटीक योजना बनाई गई थी और पेशेवर शूटर्स को भी दुश्मन के इलाके यानी कराची में सुरक्षित रूप से उतार दिया गया था। ये शूटर बिल्कुल सही पोजीशन में थे और उन्हें केवल अंतिम और सटीक निर्देश का इंतजार था, लेकिन भू-राजनीतिक दबावों और रणनीतिक कारणों की वजह से इस मिशन को ऐन मौके पर होल्ड करना पड़ा।

आखिर क्यों ऐन वक्त पर रोकना पड़ा दाउद इब्राहिम को मारने का सीक्रेट मिशन

दाउद इब्राहिम को कराची में मारने का यह सीक्रेट मिशन क्यों और कैसे रुका, इसको लेकर पूर्व आईपीएस राजेश पांडेय ने कई चौंकाने वाले पहलू सामने रखे हैं। जब भी इतने बड़े स्तर के अंतर्राष्ट्रीय और सीमा पार ऑपरेशंस प्लान किए जाते हैं, तो उनमें केवल शूटर्स की मौजूदगी ही काफी नहीं होती, बल्कि वैश्विक कूटनीति, राष्ट्रीय सुरक्षा के दूरगामी परिणाम और कड़े खुफिया प्रोटोकॉल भी बहुत बड़ा रोल अदा करते हैं। इस ऑपरेशन के दौरान भी कुछ ऐसे कड़े मोड़ आए जब भारतीय रणनीतिकारों को अपने कदम पीछे खींचने पड़े। हालांकि, इस तरह के खुलासे इस बात का स्पष्ट संकेत देते हैं कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियां और पूर्व के अधिकारी देश के सबसे बड़े दुश्मनों तक पहुंचने के लिए किस हद तक गुप्त और आक्रामक रणनीति पर काम कर चुके हैं, जिससे डी-कंपनी के खेमे में आज भी खौफ का माहौल बना रहता है।

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