प्रधानमंत्री मोदी और कजाकिस्तान के राष्ट्रपति टोकायेव की हुई ऐतिहासिक बैठक

भारत और कजाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को एक बिल्कुल नए और ऐतिहासिक शिखर पर ले जाने के लिए राजधानी दिल्ली में कूटनीतिक हलकों की सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक ने दुनिया भर के भू-राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। मध्य एशिया के इस सबसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश के साथ भारत की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chains) में उथल-पुथल मची हुई है। इस अहम चर्चा के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेताओं ने मुख्य रूप से क्रिटिकल मिनरल्स यानी दुर्लभ और सामरिक खनिजों के अबाध व्यापार, यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) और ऊर्जा सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर विस्तार से मंत्रणा की है, जिसके आने वाले समय में दूरगामी और सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।
आज के आधुनिक तकनीकी युग में सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), रिन्यूएबल एनर्जी बैटरियों और रक्षा उपकरणों के निर्माण के लिए क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals) किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए ऑक्सीजन की तरह काम करते हैं। कजाकिस्तान दुनिया के उन गिने-चुने देशों में शामिल है जिसके पास यूरेनियम, लिथियम, टाइटेनियम और अन्य दुर्लभ भू-सामरिक खनिजों के अकूत और विशाल भंडार मौजूद हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव के बीच हुई इस बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि कैसे भारतीय उद्योगों को इन महत्वपूर्ण खनिजों की एक स्थिर और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। भारत अपनी बढ़ती हुई औद्योगिक और तकनीकी जरूरतों के लिए अब पारंपरिक स्रोतों से आगे बढ़कर मध्य एशिया के साथ अपने संबंधों को मजबूत कर रहा है, ताकि चीन या अन्य देशों पर निर्भरता को पूरी तरह से खत्म किया जा सके। कजाकिस्तान के पास मौजूद इन दुर्लभ खनिजों का खजाना भारत के 'मेक इन इंडिया' और ग्रीन एनर्जी मिशन को एक नई और अजेय गति प्रदान करेगा।
कजाकिस्तान केवल मध्य एशिया का एक देश नहीं है, बल्कि वह यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) का एक बेहद प्रमुख और सक्रिय सदस्य भी है, जिसमें रूस और अन्य पूर्व सोवियत गणराज्य शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति टोकायेव की इस द्विपक्षीय वार्ता का एक सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण पहलू भारत और EAEU के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की संभावनाओं को तेजी से आगे बढ़ाना रहा है। अभी तक भारत और इस यूरेशियन क्षेत्र के बीच व्यापारिक आदान-प्रदान भौगोलिक दूरियों और ट्रांजिट रूट की जटिलताओं के कारण अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंच पाया था। इस एफटीए के धरातल पर उतरने से दोनों देशों के बीच कारोबार में आने वाले सीमा शुल्क (Customs Duties) और टैरिफ की दीवारें गिर जाएंगी, जिससे फार्मास्यूटिकल्स, कृषि उत्पाद, कपड़ा, ऑटोमोबाइल और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीय कंपनियों के लिए कजाकिस्तान और उसके पड़ोसी बाजारों के रास्ते अपने आप खुल जाएंगे।
भारत की ऊर्जा जरूरतें दिन-प्रतिदिन तेजी से बढ़ रही हैं, और कजाकिस्तान दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उत्पादकों में से एक है। दोनों नेताओं के बीच हुई इस बैठक में कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और परमाणु ऊर्जा (Nuclear Energy) के क्षेत्र में सहयोग को और अधिक प्रगाढ़ बनाने पर सहमति बनी है। कजाकिस्तान पहले से ही भारत को यूरेनियम की आपूर्ति करने वाले प्रमुख देशों में शामिल है, और इस साझेदारी को अगले कई दशकों के लिए और अधिक सुरक्षित करने पर मुहर लगाई गई है। इसके अलावा, मध्य एशिया और रूस के रास्ते भारत को यूरोप और पश्चिमी एशिया से जोड़ने वाले इंटरनेशनल नॉर्थ-दक्षिण ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) और अश्गाबात समझौते के क्रियान्वयन पर भी गहराई से समीक्षा की गई। चाबहार बंदरगाह और मध्य एशियाई रेल नेटवर्क के जरिए जब व्यापारिक मार्ग पूरी तरह से सुगम हो जाएंगे, तो माल ढुलाई का समय और लागत दोनों में भारी कमी आएगी, जिससे भारत और कजाकिस्तान के बीच आर्थिक और रणनीतिक जुड़ाव और अधिक मजबूत हो जाएगा।
द्विपक्षीय और आर्थिक मुद्दों के अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव ने आतंकवाद, कट्टरपंथ और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे संवेदनशील विषयों पर भी खुलकर विचार-विमर्श किया। दोनों नेताओं का मानना था कि आतंकवाद मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा है और इससे निपटने के लिए वैश्विक समुदाय को बिना किसी दोहरे मापदंड के एकजुट होना होगा। अफगानिस्तान के मौजूदा हालात और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी दोनों पक्षों ने अपने रणनीतिक हित साझा किए। राष्ट्रपति टोकायेव की यह भारत यात्रा यह साबित करती है कि नई दिल्ली की 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति अब जमीन पर ठोस परिणाम दे रही है। प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई इस उच्च स्तरीय चर्चा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत और कजाकिस्तान आने वाले समय में न केवल व्यापारिक साझीदार बनकर उभरेंगे, बल्कि एशिया महाद्वीप में शांति, स्थिरता और विकास के दो सबसे बड़े मजबूत स्तंभ बनकर पूरी दुनिया के सामने एक नई मिसाल पेश करेंगे।