व्यापार

दिल्ली से बाहर बसेगा हाईटेक नया शहर: 200 वर्ग मीटर लैंड पूलिंग और नमो भारत RRTS से बदलेगी NCR की तस्वीर

देश की राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में लगातार बढ़ते जनसंख्या घनत्व और ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने के लिए एक बड़े आधुनिक उपनगर की नींव रखी जा रही है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के मास्टर प्लान के तहत दिल्ली की सीमाओं के ठीक बाहर एक विश्वस्तरीय ग्रीनफील्ड टाउनशिप विकसित करने की रूपरेखा तैयार की गई है। इस नई टाउनशिप का सबसे बड़ा आकर्षण इसकी बहुआयामी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी और पारदर्शी भूमि अधिग्रहण नीति है, जिसे लैंड पूलिंग मॉडल के जरिए अमलीजामा पहनाया जाएगा।

आधुनिक शहरी नियोजन और 200 वर्ग मीटर लैंड पूलिंग मॉडल

इस नए शहर के विकास के लिए सरकार और संबंधित विकास प्राधिकरणों ने लैंड पूलिंग पॉलिसी को मुख्य आधार बनाया है। पारंपरिक भूमि अधिग्रहण में आने वाली कानूनी और वित्तीय अड़चनों को दूर करने के लिए किसानों और भूमि स्वामियों को इस विकास मॉडल में सीधा साझीदार बनाया जा रहा है। योजना के अनुसार, किसान या जमीन मालिक अपनी जमीन विकास प्राधिकरण को सौंपेंगे, जिसके बदले में उन्हें विकसित शहर में सभी आधुनिक सुविधाओं से युक्त 200 वर्ग मीटर और उससे बड़े आनुपातिक रिहायशी या व्यावसायिक भूखंड आवंटित किए जाएंगे।

200 वर्ग मीटर के प्लॉट का यह प्रावधान मध्यम और उच्च-मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए किफायती और व्यवस्थित आवासीय समाधान प्रदान करेगा। इस मॉडल से न केवल जमीन देने वाले मूल निवासियों को विकसित शहर में प्रीमियम रियल एस्टेट का स्वामित्व मिलेगा, बल्कि वे इलाके में होने वाली आर्थिक वृद्धि के सीधे भागीदार भी बनेंगे।

नमो भारत RRTS और 8-लेन चौड़ी सड़कों का हाई-स्पीड नेटवर्क

किसी भी आधुनिक शहर की रीढ़ उसका पब्लिक ट्रांसपोर्ट और रोड नेटवर्क होता है। इस नए उपनगर को दिल्ली के केंद्र और एनसीआर के अन्य प्रमुख शहरों से 40 से 50 मिनट के भीतर जोड़ने के लिए रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) यानी नमो भारत ट्रेन के कॉरिडोर से सीधे कनेक्ट किया जाएगा। आरआरटीएस स्टेशनों के आसपास 'ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट' (TOD) को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे लोग बिना निजी वाहनों के भी आसानी से दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद जैसे केंद्रों तक दैनिक आवागमन कर सकें।

सड़क परिवहन की बात करें तो शहर का आंतरिक और बाहरी रोड नेटवर्क 6 से 8 लेन की चौड़ी सड़कों से आच्छादित होगा। मुख्य आर्टिरियल रोड्स की चौड़ाई 45 मीटर से 60 मीटर तक रखी गई है, जिसमें अलग से डेडिकेटेड साइकिल ट्रैक, वॉकवे और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग लेन शामिल होंगी। यह शहर सीधे तौर पर ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (EPE), वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (WPE) और प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ेगा, जिससे दिल्ली के आंतरिक रास्तों पर भारी वाहनों का दबाव पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।

स्मार्ट अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर और सस्टेनेबल ग्रीन लिविंग

पारंपरिक अनधिकृत कॉलोनियों की समस्याओं से परे, यह नया शहर पूरी तरह से एक सस्टेनेबल और ग्रीन स्मार्ट सिटी के रूप में डिजाइन किया जा रहा है। इसमें भूमिगत विद्युत केबल नेटवर्क, स्वचालित कचरा प्रबंधन प्रणाली, 24×7 जलापूर्ति और उन्नत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की व्यवस्था होगी। शहर के कुल क्षेत्रफल का लगभग 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा हरित पट्टी, पार्कों और जल निकायों के लिए आरक्षित रहेगा।

ऊर्जा दक्षता को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक भवनों और स्ट्रीट लाइट्स के लिए सौर ऊर्जा का अनिवार्य उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा, रियल एस्टेट डेवलपर्स के लिए ग्रीन बिल्डिंग मानकों (IGBC/GRIHA) का पालन करना अनिवार्य बनाया जा रहा है, जिससे कार्बन फुटप्रिंट को न्यूनतम रखा जा सके।

रियल एस्टेट बूम, रोजगार सृजन और निवेश के नए अवसर

इस नए शहर की घोषणा के साथ ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के रियल एस्टेट बाजार में जबरदस्त हलचल देखी जा रही है। आवासीय संपत्तियों के साथ-साथ यहां लॉजिस्टिक्स हब, आईटी पार्क, डेटा सेंटर और कॉमर्शियल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट (CBD) स्थापित करने का खाका खींचा गया है। जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और आईजीआई एयरपोर्ट से सीधी पहुंच होने के कारण यह क्षेत्र राष्ट्रीय और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए एक प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में उभर रहा है।

रियल एस्टेट विश्लेषकों का मानना है कि लैंड पूलिंग के तहत 200 वर्ग मीटर के भूखंडों की उपलब्धता से उन व्यक्तिगत घर खरीदारों और निवेशकों को बड़ा अवसर मिलेगा, जो दिल्ली के महंगे और संकरे आवासीय क्षेत्रों से बाहर एक खुले, स्वच्छ और आधुनिक माहौल में बसना चाहते हैं। अगले 5 से 7 वर्षों में यह क्षेत्र आर्थिक गतिविधियों, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं और विश्वस्तरीय शिक्षण संस्थानों का एक नया केंद्र बन जाएगा।

Back to top button