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दुनिया में बढ़ रहा खतरनाक बिखराव! विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कुछ ताकतवर देशों को लेकर चेताया

वैश्विक कूटनीति के मंच से भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक बार फिर दुनिया के सामने बेहद खरी-खरी बात रखी है। दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में आयोजित एक महत्वपूर्ण वैश्विक मंच पर बोलते हुए जयशंकर ने वैश्विक व्यवस्था में आ रहे बदलावों पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि वैश्विक स्तर पर बिखराव और विभाजन लगातार बढ़ रहा है। ऐसे दौर में अंतरराष्ट्रीय नियमों और स्थिरता को बनाए रखने के लिए केवल कुछ गिने-चुने देशों पर निर्भर रहना पूरी तरह गलत और जोखिम भरा है।

वैश्विक संकटों के बीच नियमों पर निर्भरता का उठा सवाल

विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में साफ किया कि मौजूदा समय में दुनिया कई तरह के भू-राजनीतिक (Geopolitical) तनावों और आर्थिक अनिश्चितताओं से जूझ रही है। उन्होंने इशारा किया कि जब पूरी दुनिया किसी एक या दो महाशक्तियों के फैसलों पर टिकी रहती है, तो संतुलन बिगड़ना तय है। जयशंकर ने जोर देकर कहा कि आज की चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक नियमों का पालन होना जरूरी है, लेकिन इन नियमों को लागू करने या तय करने का एकाधिकार किसी एक गुट या चुनिंदा देशों के पास नहीं होना चाहिए।

कुछ देशों पर अत्यधिक निर्भरता क्यों है खतरनाक?

सियोल में मौजूद राजनयिकों और विचारकों को संबोधित करते हुए भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chains) से लेकर सुरक्षा व्यवस्था तक, जब कुछ ही देशों पर निर्भरता बढ़ जाती है तो पूरी दुनिया संकट में आ जाती है। कोरोना महामारी और उसके बाद उपजे युद्धों ने यह साबित कर दिया है कि विकेंद्रीकरण (Decentralization) कितना जरूरी है। उन्होंने कहा कि एक स्थिर दुनिया के लिए विनिर्माण, तकनीक और निर्णय लेने की शक्ति का पूरी दुनिया में समान रूप से प्रसार होना चाहिए।

भारत और दक्षिण कोरिया मिलकर बना सकते हैं नया संतुलन

जयशंकर ने इस बात पर विशेष बल दिया कि भारत और दक्षिण कोरिया जैसे लोकतांत्रिक और मजबूत आर्थिक क्षमता वाले देशों को इस बदलते वैश्विक परिदृश्य में आगे आना होगा। भारत हमेशा से ही एक बहुध्रुवीय दुनिया (Multipolar World) का समर्थक रहा है, जहां हर छोटे-बड़े देश की संप्रभुता और आवाज का सम्मान हो। उन्होंने दक्षिण कोरिया के साथ रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने का आह्वान किया, ताकि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और दुनिया भर में एक अधिक पारदर्शी, समावेशी और न्यायसंगत वैश्विक व्यवस्था का निर्माण किया जा सके।

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