नगर आयुक्त के चहेते हजरतगंज में टोइंग ठेकेदारों का दोहरा मापदंड: VIP रोड पर आंखें बंद, संकरी गलियों में सख्ती

राजधानी लखनऊ की ऐतिहासिक और सबसे प्रमुख व्यापारिक सड़क हजरतगंज में इन दिनों नगर निगम के पार्किंग व टोइंग ठेकेदारों की मनमानी चरम पर है। शहर के सबसे व्यस्त इलाके में ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के नाम पर तैनात टोइंग व क्रेन ठेकेदारों का दोहरा चरित्र आम नागरिकों और स्थानीय दुकानदारों के लिए भारी सिरदर्द बन चुका है।

हजरतगंज के सबसे संवेदनशील हिस्से यानी कैफे कॉफी डे (CCD) से लेकर आईसीआईसीआई (ICICI) बैंक तक की मुख्य सड़क पर दिनभर लग्जरी गाड़ियों और दोपहिया वाहनों की अवैध पार्किंग का अंबार लगा रहता है। इस स्ट्रेच पर सड़क के दोनों ओर बेतरतीब खड़े वाहनों के कारण रोजाना पीक आवर्स में भीषण जाम लगता है और पैदल चलने वालों तक को रास्ता नहीं मिलता। हैरत की बात यह है कि इस व्यस्त सड़क पर खुलेआम नियम तोड़ने वाली गाड़ियों को नगर निगम की क्रेनें छूती तक नहीं हैं, जबकि चंद कदमों की दूरी पर स्थित गांधी आश्रम के पीछे शांत और चौड़ी जगह पर व्यवस्थित ढंग से खड़े वाहनों को क्रेनें चंद मिनटों में उठाकर ले जाती हैं।

गांधी आश्रम के पीछे नो-पार्किंग का आतंक: जहां जाम नहीं, वहीं से उठती हैं गाड़ियां!
स्थानीय व्यापारियों और हजरतगंज आने वाले ग्राहकों का कहना है कि गांधी आश्रम के पीछे का हिस्सा ऐसा क्षेत्र है जहां सामान्यतः न तो कोई भारी ट्रैफिक होता है और न ही वहां गाड़ियां खड़ी होने से किसी प्रकार का जाम लगता है। इसके बावजूद टोइंग ठेकेदार जानबूझकर अपना पूरा फोकस इसी इलाके पर रखते हैं।
नागरिकों का आरोप है कि ठेकेदार के कर्मचारी घात लगाकर खड़े रहते हैं और जैसे ही कोई व्यक्ति गांधी आश्रम या आसपास की दुकानों पर 5 से 10 मिनट के लिए कोई सामान खरीदने रुकता है, क्रेन चालक तुरंत वाहन को उठाकर नगर निगम के यार्ड में पहुंचा देते हैं। वहां वाहन छुड़ाने के नाम पर भारी जुर्माना और अनाप-शनाप टोइंग चार्ज वसूला जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां वास्तव में गाड़ियां उठाने की जरूरत है (मुख्य रोड), वहां ठेकेदार खामोश रहते हैं, और जहां किसी को कोई परेशानी नहीं है, वहां चालान और टोइंग का टारगेट पूरा किया जा रहा है।

नगर आयुक्त की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल: मिलीभगत और अवैध वसूली का अंदेशा
इस खुले पक्षपात और मनमानी की शिकायत जब पीड़ितों और स्थानीय नागरिकों द्वारा लखनऊ नगर निगम के शीर्ष अधिकारियों और नगर आयुक्त से की गई, तो उनका रवैया भी बेहद निराशाजनक रहा। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि नगर आयुक्त ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने या ठेकेदार पर लगाम लगाने के बजाय उल्टा ठेकेदार के पक्ष में ही दलीलें देना शुरू कर दिया।
अधिकारियों के इस बचावकारी रुख ने नागरिकों और व्यापारियों के उस अंदेशे को और पुख्ता कर दिया है कि कहीं यह पूरा खेल नगर निगम प्रशासन और प्राइवेट ठेकेदारों की मिलीभगत से तो नहीं चल रहा है? लोगों का सीधा आरोप है कि हजरतगंज जैसे पॉश इलाके में टोइंग के नाम पर एक बड़ा संगठित अवैध वसूली सिंडिकेट काम कर रहा है। रसूखदार और प्रभावशाली लोगों की गाड़ियां मुख्य मार्ग (CCD से बैंक तक) पर खड़ी होने के बावजूद उन पर कार्रवाई नहीं की जाती, जबकि आम और मध्यमवर्गीय नागरिकों को सॉफ्ट टारगेट बनाकर उनसे जबरन जुर्माना वसूला जा रहा है।

व्यापारियों में भारी आक्रोश: व्यापार पर पड़ रहा है सीधा असर
हजरतगंज के व्यापारी संगठनों ने इस मनमानी पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। व्यापारियों का कहना है कि:
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हजरतगंज में वैध मल्टीलेवल पार्किंग की पर्याप्त और सुगम व्यवस्था न होने के कारण लोग अक्सर कुछ मिनटों के काम के लिए सड़कों के किनारे गाड़ियां खड़ी करने को मजबूर होते हैं।
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टोइंग क्रेन के कर्मचारियों का व्यवहार आम जनता के साथ बेहद अभद्र और हिंसक रहता है।
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इस पक्षपातपूर्ण कार्रवाई से हजरतगंज के बाजारों में ग्राहकों की संख्या घट रही है, जिससे दुकानों की बिक्री पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
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यदि नगर निगम को ट्रैफिक व्यवस्था ही सुधारनी है, तो सबसे पहले मुख्य मार्ग (CCD से ICICI बैंक तक) को पूरी तरह नो-पार्किंग जोन घोषित कर वहां से गाड़ियां हटानी चाहिए, जिससे मुख्य मार्ग का जाम खत्म हो सके।
निष्पक्ष जांच और पारदर्शी पार्किंग नीति की मांग
लखनऊ की जनता और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अब इस पूरे मामले को मुख्यमंत्री कार्यालय (जनसुनवाई पोर्टल) और मंडलायुक्त के समक्ष उठाने का फैसला किया है। नागरिकों की मांग है कि हजरतगंज में टोइंग ठेकेदारों के कार्यक्षेत्र की सीसीटीवी फुटेज के आधार पर निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, यह स्पष्ट किया जाए कि मुख्य मार्ग के बजाए केवल गांधी आश्रम के पीछे ही क्रेनें क्यों सक्रिय रहती हैं। जब तक नगर निगम इस दोहरे मापदंड को खत्म नहीं करता, तब तक राजधानी के सबसे प्रतिष्ठित बाजार में जाम और जनआक्रोश का यह सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है।

| समस्या का मुख्य क्षेत्र | जमीनी हकीकत | नगर निगम/ठेकेदार का रवैया |
| CCD से ICICI बैंक तक मुख्य मार्ग | सड़क पर अवैध पार्किंग से लगातार भीषण जाम | कोई कार्रवाई नहीं, गाड़ियां जस की तस खड़ी रहती हैं |
| गांधी आश्रम के पीछे का क्षेत्र | जाम की कोई समस्या नहीं, शांत कोना | क्रेन लगाकर तुरंत गाड़ियां उठा ली जाती हैं |
| शिकायत पर प्रशासनिक रुख | आम नागरिकों की अनदेखी | ठेकेदार का खुला बचाव, मिलीभगत के गंभीर आरोप |