व्यापार

Wealth Building Tips: अमीर बनने के लिए बड़ी सैलरी जरूरी नहीं! चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CA) के ये 5 ‘गोल्डन रूल्स’ अपना लिए तो कभी नहीं होगी पैसों की तंगी

आधुनिक जीवनशैली में अक्सर यह मान लिया जाता है कि वित्तीय स्वतंत्रता और अकूत संपत्ति का सीधा संबंध किसी व्यक्ति की महीने की पगार या बड़े पैकेज से होता है। हालांकि, वित्तीय योजनाकारों और अनुभवी चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CA) के पेशेवर अनुभव एक बिल्कुल अलग कहानी बयां करते हैं। हर साल ऐसे हजारों मामले सामने आते हैं जहां लाखों रुपये कमाने वाले उच्च वेतनभोगी पेशेवर भी महीने के अंत में क्रेडिट कार्ड बिल और लोन की ईएमआई चुकाने के लिए संघर्ष करते नजर आते हैं, जबकि औसत आमदनी वाले कई अनुशासित वेतनभोगी सेवानिवृत्ति की उम्र तक आते-आते कई करोड़ रुपयों का शुद्ध वेल्थ कॉर्पस खड़ा कर लेते हैं।

वित्तीय विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि संपत्ति निर्माण (Wealth Building) किसी एक दिन का चमत्कार या लॉटरी नहीं है, बल्कि यह दैनिक वित्तीय फैसलों और वित्तीय व्यवहार का संचयी परिणाम है। यदि कोई व्यक्ति बुनियादी वित्तीय नियमों का लगातार पालन करता है, तो वह किसी भी आर्थिक स्तर से शुरुआत करके खुद को सुरक्षित और समृद्ध बना सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं वे कौन से 5 वित्तीय गोल्डन रूल्स हैं जिन्हें अपनी दिनचर्या में शामिल कर आप स्थायी संपत्ति का निर्माण कर सकते हैं।

नियम 1: 'पे योरसेल्फ फर्स्ट' और 50:30:20 का स्वर्णिम बजटिंग नियम

अधिकांश लोग महीने की शुरुआत में वेतन आते ही सबसे पहले मकान का किराया, ईएमआई, उपयोगिता बिल और मौज-मस्ती के खर्चों का भुगतान करते हैं और जो कुछ बच जाता है, उसे बचत या निवेश के खाते में डालते हैं। यह दृष्टिकोण वित्तीय रूप से सबसे बड़ी चूक मानी जाती है। जाने-माने निवेशक वॉरेन बफेट का प्रसिद्ध सूत्र है कि खर्च करने के बाद जो बचे उसे न बचाएं, बल्कि बचत और निवेश करने के बाद जो बचे उसे खर्च करें।

इसी सिद्धांत को चार्टर्ड अकाउंटेंट्स 50:30:20 के बजटिंग नियम के जरिए व्यावहारिक बनाते हैं:

  • 50% बुनियादी आवश्यकताएं (Needs): आपकी कुल इन-हैंड सैलरी का अधिकतम 50 प्रतिशत हिस्सा अनिवार्य खर्चों जैसे भोजन, घर का किराया, बच्चों की स्कूल फीस, बिजली-पानी का बिल और आवश्यक चिकित्सा बीमा में जाना चाहिए।

  • 30% जीवनशैली और इच्छाएं (Wants): 30 प्रतिशत हिस्सा बाहर खाना खाने, छुट्टियां बिताने, मनोरंजन, सिनेमा और गैजेट्स जैसी व्यक्तिगत इच्छाओं के लिए निर्धारित किया जाना चाहिए।

  • 20% अनिवार्य निवेश (Savings & Investment): न्यूनतम 20 प्रतिशत हिस्सा वेतन खाते में आते ही सीधे स्वचालित रूप से इक्विटी म्यूचुअल फंड (SIP), पीपीएफ, एनपीएस या इंडेक्स फंड्स में निवेशित हो जाना चाहिए।

जैसे-जैसे आपकी आय बढ़े, इस अनुपात को बदलकर 50:20:30 (यानी 30% निवेश) करने का प्रयास करना चाहिए।

नियम 2: लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन के जाल से बचें, बढ़ती आय को बनाएं वेल्थ इंजन

करियर में पदोन्नति (Promotion) और वेतन वृद्धि होते ही अधिकांश लोगों का पहला कदम अपनी जीवनशैली को तुरंत अपग्रेड करना होता है—जैसे अचानक अधिक महंगी कार की ईएमआई ले लेना, महंगे क्लब की सदस्यता लेना या महंगे गैजेट्स पर खर्च बढ़ा देना। वित्तीय शब्दावली में इसे 'लाइफस्टाइल क्रीप' या 'लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन' कहा जाता है।

सीए और वित्तीय सलाहकारों का सुझाव है कि वेतन बढ़ने पर अपनी बुनियादी जीवनशैली को तुरंत न बदलें। यदि आपकी आय में 10% या 15% की वार्षिक वृद्धि होती है, तो उस अतिरिक्त आय का कम से कम 50 से 70 प्रतिशत हिस्सा अपनी मौजूदा निवेश किस्तों (SIP) में 'स्टेप-अप' के तौर पर जोड़ें। जब आप अपनी बढ़ती आय को उपभोग के बजाय कंपाउंडिंग एसेट्स में झोंकते हैं, तो संपत्ति निर्माण की गति कई गुना तेज हो जाती है और आप 'रैट रेस' से हमेशा के लिए मुक्त हो जाते हैं।

नियम 3: कंपाउंडिंग की ताकत को समझें और जल्दी शुरुआत करें

अल्बर्ट आइंस्टीन ने चक्रवृद्धिकरण (Compounding) को दुनिया का आठवां अजूबा कहा था। कंपाउंडिंग का पूरा गणित इस बात पर निर्भर करता है कि आपने अपने पैसे को बढ़ने के लिए कितना समय दिया, न कि इस बात पर कि आपने शुरुआत में कितनी बड़ी राशि लगाई थी।

यदि कोई 22 वर्षीय युवा नौकरी की शुरुआत में केवल 5,000 रुपये प्रति माह की एसआईपी 12% वार्षिक अनुमानित रिटर्न के साथ शुरू करता है, तो 60 वर्ष की आयु तक उसका कुल निवेश मात्र 22.8 लाख रुपये होगा, जबकि उसका अनुमानित कुल फंड 18 करोड़ रुपये से अधिक बन सकता है। वहीं, यदि कोई व्यक्ति 35 वर्ष की आयु में 15,000 रुपये प्रति माह निवेश करना शुरू करता है, तो अधिक राशि लगाने के बावजूद वह समय की कमी के कारण इस आंकड़े के आसपास भी नहीं पहुंच पाता। इसलिए बाजार में 'टाइमिंग' से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण 'टाइम इन द मार्केट' होता है।

नियम 4: बैड डेट (बुरा कर्ज) और क्रेडिट कार्ड ट्रैप से दूरी

संपत्ति बनाने की दिशा में सबसे बड़ा रोड़ा वह कर्ज होता है जो आपके बैंक खाते से लगातार ब्याज के रूप में पैसा बाहर खींचता रहता है। चार्टर्ड अकाउंटेंट्स कर्ज को दो श्रेणियों में बांटते हैं:

  • अच्छा कर्ज (Good Debt): ऐसा ऋण जो किसी संपत्ति के निर्माण में मदद करे या भविष्य में आय पैदा करे, जैसे कम ब्याज दर पर लिया गया शिक्षा ऋण (Education Loan) या उचित सीमा के भीतर होम लोन, जिस पर आयकर छूट का भी लाभ मिलता है।

  • बुरा कर्ज (Bad Debt): गैर-जरूरी उपभोक्ता वस्तुओं, विदेश यात्राओं, महंगे मोबाइल फोन या कपड़ों के लिए लिया गया पर्सनल लोन, 'बाय नाउ पे लेटर' (BNPL) और क्रेडिट कार्ड का रोल-ओवर ब्याज।

क्रेडिट कार्ड पर बकाया राशि पर 36 से 42 प्रतिशत तक का वार्षिक ब्याज वसूला जाता है। यदि आप कर्ज के इस चक्रव्यूह में फंसे हैं, तो किसी भी प्रकार का निवेश करने से पहले सबसे पहले महंगे कर्जों का निपटारा करना वित्तीय समझदारी है।

नियम 5: इमरजेंसी फंड और पर्याप्त बीमा कवर: वेल्थ प्रोटेक्शन की ढाल

धन संचय करना जितना आवश्यक है, अप्रत्याशित संकटों से उस संचित पूंजी की रक्षा करना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। कई परिवार किसी गंभीर चिकित्सीय आपातकाल या अचानक नौकरी चले जाने के कारण अपनी वर्षों की बचत और निवेश को औने-पौने दाम पर बेचने के लिए मजबूर हो जाते हैं।

एक संपूर्ण वित्तीय सुरक्षा चक्र में दो घटक अनिवार्य रूप से होने चाहिए:

पहला, इमरजेंसी फंड (आपातकालीन कोष), जो आपके और आपके परिवार के कम से कम 6 महीने के अनिवार्य खर्चों (किराया, राशन, ईएमआई) के बराबर होना चाहिए। इस पैसे को हमेशा उच्च तरलता वाले विकल्पों जैसे लिक्विड म्यूचुअल फंड या बैंक सावधि जमा (FD) में रखना चाहिए।

दूसरा, पर्याप्त हेल्थ और टर्म इंश्योरेंस। परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य के पास अपनी वार्षिक आय का कम से कम 15 से 20 गुना का प्योर टर्म इंश्योरेंस और पूरे परिवार के लिए एक व्यापक फ्लोटर हेल्थ इंश्योरेंस होना चाहिए। जब आपकी सुरक्षा ढाल मजबूत होती है, तो आपका दीर्घकालिक निवेश बाजार के किसी भी उतार-चढ़ाव में सुरक्षित बना रहता है।

वित्तीय स्तंभ सामान्य गलती सीए द्वारा सुझाया गया सही तरीका
बजटिंग खर्च करने के बाद बचा हुआ पैसा बचाना 'पे योरसेल्फ फर्स्ट': सैलरी आते ही 20% पहले निवेश करें
कर्ज प्रबंधन क्रेडिट कार्ड न्यूनतम देय राशि (Min Due) चुकाना क्रेडिट कार्ड का पूरा बिल समय पर भरें, पर्सनल लोन से बचें
वेतन वृद्धि सैलरी बढ़ते ही महंगी कार/गैजेट्स खरीदना अतिरिक्त वेतन का 60-70% निवेश (Step-up SIP) में लगाएं
सुरक्षा केवल बैंक बचत पर निर्भर रहना 6 महीने का इमरजेंसी फंड + प्योर टर्म इंश्योरेंस लें
Back to top button