पंकजा मुंडे की सफेद BMW हुई ‘कोयले’ जैसी काली: महाराष्ट्र की पर्यावरण मंत्री ने खुद देखा चंद्रपुर के प्रदूषण का भयावह सच

चंद्रपुर। महाराष्ट्र की कद्दावर नेता और पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे जब गुरुवार को राज्य के सबसे प्रदूषित जिलों में शुमार चंद्रपुर का जायजा लेने पहुंचीं, तो वहां के हालात देखकर वह खुद दंग रह गईं। प्रदूषण की विभीषिका का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंत्री की चमचमाती सफेद लग्जरी BMW कार कुछ ही घंटों के भीतर धूल और कोयले की कालिख से पूरी तरह काली पड़ गई।यह घटना केवल एक कार के गंदा होने की नहीं है, बल्कि यह चंद्रपुर के लाखों लोगों के उस ‘दमघोंटू’ संघर्ष की कहानी बयां करती है, जिसे वे हर रोज जीने को मजबूर हैं।निरीक्षण में खुली पोल: नियमों को ताक पर रख चल रहे उद्योगमंत्री पंकजा मुंडे ने दुर्गापुर स्थित चंद्रपुर थर्मल पावर स्टेशन (CSTPS), महामाया कोल वॉशरी और घुग्गुस की विदर्भ मिनरल्स एनर्जी कंपनी का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान विकास के दावों के बीच उड़ती हुई धूल और खुले में कोयले की ढुलाई का काला सच साफ नजर आया।औद्योगिक इलाकों में हवा की गुणवत्ता इतनी खराब थी कि मंत्री के काफिले की गाड़ियां चंद मिनटों में धूल की मोटी परतों से ढक गईं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सफेद रंग की गाड़ियों का रंग पहचानना मुश्किल हो गया था। यह दृश्य देखकर खुद मंत्री और उनके साथ आए आला अधिकारी भी हैरान रह गए।AQI 400 के पार: सांस लेना भी हुआ दूभरपर्यावरण विशेषज्ञों ने चंद्रपुर की स्थिति को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। पर्यावरणविद प्रो. सुरेश चोपने ने बताया कि जिन इलाकों का मंत्री ने दौरा किया, वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) अक्सर 400 के पार रहता है, जो ‘बेहद खतरनाक’ श्रेणी में आता है।प्रमुख कारण: कोयला बिजली संयंत्र, कोल वॉशरी और अनियंत्रित खनन गतिविधियां।स्वास्थ्य पर असर: स्थानीय लोग सांस की बीमारियों, फेफड़ों के संक्रमण और आंखों में जलन जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। बच्चों के स्वास्थ्य पर इसका सबसे बुरा असर पड़ रहा है।मंत्री का कड़ा रुख: “नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई”हालात की गंभीरता को देखते हुए पंकजा मुंडे ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जो भी उद्योग प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का उल्लंघन कर रहे हैं, उन्हें तुरंत नोटिस जारी किया जाए।”मुझे चंद्रपुर की समस्या का अंदाजा था, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे कहीं अधिक गंभीर है। दोषी कारखानों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे और प्रदूषण कम करने के लिए तत्काल उपाय लागू किए जाएंगे।” – पंकजा मुंडे, पर्यावरण मंत्रीचंद्रपुर की जनता को अब सुधार की उम्मीदचंद्रपुर महाराष्ट्र का सबसे प्रदूषित जिला माना जाता है। यहाँ खुले ट्रकों में कोयले का परिवहन और वॉटर स्प्रिंकलर (पानी के छिड़काव) की कमी सबसे बड़ी समस्या है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे सालों से इस जहरीली हवा के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अब पहली बार किसी मंत्री ने जमीनी स्तर पर आकर इस ‘काली हकीकत’ को महसूस किया है।विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ट्रकों को कवर करने, धूल रोकने वाले पर्दे लगाने और नियमित छिड़काव जैसे उपायों को अनिवार्य नहीं किया गया, तो चंद्रपुर का भविष्य और भी अंधकारमय हो सकता है।