पश्चिम एशिया संकट का भारत पर बड़ा प्रहार! तबाही के बीच RBI ने उठाया बेहद सख्त कदम

वैश्विक पटल पर इस समय पश्चिम एशिया (West Asia Crisis) में जारी भीषण युद्ध और तनाव ने पूरी दुनिया की चिंताओं को बढ़ा दिया है। इस महासंकट की तपिश से अब भारतीय बाजार और अर्थव्यवस्था भी अछूते नहीं रहे हैं। इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल (Crude Oil) की लगातार आसमान छूती कीमतों और ग्लोबल सप्लाई चेन में आई भारी रुकावटों को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आज एक बेहद बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद यह साफ हो गया है कि दुनिया भर में जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल का असर भारत की आर्थिक तरक्की की रफ्तार पर पड़ने लगा है, जिसके चलते नीति निर्माताओं को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर होना पड़ा है। आरबीआई ने घटाया देश की ग्रोथ का अनुमान, अब इस रफ्तार से बढ़ेगी भारत की जीडीपी आरबीआई गवर्नर ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए देश और दुनिया के सामने भारतीय अर्थव्यवस्था के नए कूटनीतिक आंकड़े पेश किए हैं। रिजर्व बैंक ने पश्चिम एशिया के संकट से पैदा हुए आर्थिक जोखिमों को भांपते हुए चालू वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए देश की सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी (GDP) ग्रोथ के पुराने अनुमान को घटा दिया है। पहले जहां भारतीय अर्थव्यवस्था के 6.9 प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही थी, वहीं अब केंद्रीय बैंक ने इसे संशोधित कर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। ग्रोथ रेट में की गई इस 0.30 फीसदी की कटौती यह साफ बयां करती है कि आने वाले दिनों में भारतीय बाजारों को वैश्विक मंदी और महंगाई की कड़क चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और महंगाई ने बढ़ाई केंद्रीय बैंक की सिरदर्दी एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो आरबीआई के इस कड़े फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की अनिश्चितता है। भारत अपनी जरूरत का एक बहुत बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, ऐसे में अगर युद्ध लंबा खिंचता है तो देश में माल ढुलाई महंगी हो जाएगी, जिसका सीधा असर खुदरा महंगाई दर (CPI Inflation) पर पड़ेगा। इसी को ध्यान में रखते हुए रिजर्व बैंक ने जहां एक तरफ तरक्की की रफ्तार का अनुमान घटाया है, वहीं दूसरी तरफ महंगाई पर काबू पाने के लिए मुख्य नीतिगत दर यानी रेपो रेट (Repo Rate) को भी 5.25 प्रतिशत पर जस का तस बरकरार रखा है ताकि बाजार में नकदी और कीमतों का संतुलन न बिगड़े। चुनौतियों के बावजूद भारत के पास मौजूद है 682 अरब डॉलर का मजबूत सुरक्षा कवच हालांकि, इस संकट काल और कड़े फैसलों के बीच राहत की बात यह है कि भारतीय रिजर्व बैंक इस समय किसी भी वैश्विक झटके से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। गवर्नर ने देश को आश्वस्त करते हुए कहा कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार यानी फॉरेक्स रिजर्व (Forex Reserve) इस समय 682.3 अरब डॉलर के ऐतिहासिक और रिकॉर्ड स्तर पर मौजूद है। यह विशाल भंडार भारतीय रुपये को डॉलर के मुकाबले गिरने से बचाने के लिए एक बेहद मजबूत ढाल का काम कर रहा है। इसके साथ ही सरकार और केंद्रीय बैंक मिलकर विदेशी निवेश (FDI) के नियमों को आसान बना रहे हैं ताकि वैश्विक मंदी के इस दौर में भी भारत दुनिया के लिए सबसे सुरक्षित और आकर्षक निवेश गंतव्य बना रहे।