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पीएफ निकासी से लेकर ऑनलाइन क्लेम तक, नौकरीपेशा लोग जानें ईपीएफओ के नए और जरूरी नियम

निजी और संगठित क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) का पीएफ (Provident Fund) खाता उनकी सबसे बड़ी जीवनभर की बचत और सामाजिक सुरक्षा का आधार होता है। हर महीने कर्मचारी के मूल वेतन (Basic Salary + DA) से 12 फीसदी और इतना ही हिस्सा कंपनी की ओर से ईपीएफ और ईपीएस (EPS) खाते में जमा किया जाता है।

हालांकि, किसी आपात स्थिति, बीमारी, बच्चों की पढ़ाई, शादी या घर खरीदने के समय जब पीएफ खाते से पैसे निकालने की बात आती है, तो बहुत से कर्मचारियों को नियमों और फॉर्म्स की सही जानकारी नहीं होती। तकनीकी खामियों या गलत फॉर्म के चुनाव के कारण अक्सर क्लेम रिजेक्ट हो जाता है। आइए जानते हैं ईपीएफओ के ऑनलाइन क्लेम, एडवांस विड्रॉल, ऑटो-सेटलमेंट और टैक्स से जुड़ी पूरी ABCD।

ईपीएफओ के तहत पीएफ निकासी के प्रमुख प्रकार

ईपीएफ खाते से पैसे निकालने को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा जाता है:

  • आंशिक या एडवांस निकासी (Partial/Advance Withdrawal): नौकरी में बने रहते हुए किसी विशिष्ट जरूरत (जैसे इलाज, शादी, पढ़ाई, घर निर्माण) के लिए पीएफ फंड का एक निश्चित हिस्सा निकालना।

  • पूर्ण निकासी (Full & Final Settlement): नौकरी छोड़ने, 2 महीने से अधिक समय तक बेरोजगार रहने या 58 वर्ष की आयु पूरी कर रिटायर होने के बाद पूरे ईपीएफ और पेंशन फंड का एकमुश्त निपटान।

किन परिस्थितियों में नौकरी के दौरान निकाल सकते हैं एडवांस पीएफ?

ईपीएफओ ने कर्मचारियों की वित्तीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न आपात स्थितियों के लिए एडवांस निकालने की अनुमति दी है:

  • गंभीर बीमारी या मेडिकल इमरजेंसी: कर्मचारी, जीवनसाथी, बच्चों या माता-पिता के गंभीर इलाज के लिए बिना किसी न्यूनतम सेवा शर्त के एडवांस निकाला जा सकता है। ऑटो-मोड क्लेम के तहत अब मेडिकल इमरजेंसी के लिए निकासी की सीमा को बढ़ाकर ₹1,00,000 तक कर दिया गया है, जो 3 से 4 दिनों में प्रोसेस हो जाता है।

  • विवाह (Marriage): स्वयं, भाई-बहन या बेटे-बेटी की शादी के लिए कम से कम 7 साल की कुल सर्विस पूरी होने पर कर्मचारी अपने हिस्से के योगदान (ब्याज सहित) का 50 फीसदी तक निकाल सकता है।

  • उच्च शिक्षा (Post-Matric Education): बच्चों की 10वीं के बाद उच्च शिक्षा के लिए (7 साल की सेवा के बाद) अपने हिस्से का 50% विड्रॉल संभव है।

  • घर की खरीद या निर्माण: 5 साल की निरंतर सेवा पूरी होने पर मकान या फ्लैट खरीदने, जमीन लेने या कंस्ट्रक्शन के लिए तय नियमों के अनुसार बड़ी राशि निकाली जा सकती है।

  • होम लोन का प्री-पेमेंट: 3 साल की सर्विस के बाद रजिस्टर्ड हाउसिंग लोन को चुकाने के लिए भी पीएफ बैलेंस का इस्तेमाल किया जा सकता है।

कौन सा फॉर्म किसके लिए है? फॉर्म 19, 10C और 31 का अंतर समझें

ईपीएफओ के मेंबर सेवा पोर्टल (UAN Portal) पर ऑनलाइन क्लेम दाखिल करते समय सही फॉर्म चुनना सबसे महत्वपूर्ण है:

  • फॉर्म 31 (Form 31): नौकरी के दौरान किसी भी तरह की आंशिक निकासी या एडवांस (Advance PF) के लिए सिर्फ फॉर्म 31 भरा जाता है।

  • फॉर्म 19 (Form 19): नौकरी छोड़ने के बाद (न्यूनतम 2 महीने का अंतराल होने पर) पूरे पीएफ फंड के फाइनल सेटलमेंट के लिए फॉर्म 19 का इस्तेमाल होता है।

  • फॉर्म 10C (Form 10C): यदि आपकी कुल सर्विस 10 साल से कम है और आपने नौकरी छोड़ दी है, तो पेंशन फंड (EPS) की राशि निकालने के लिए फॉर्म 10C भरा जाता है। (नोट: 10 साल से अधिक सर्विस होने पर पेंशन विड्रॉल नहीं होता, बल्कि 58 साल की उम्र के बाद मासिक पेंशन के लिए स्कीम सर्टिफिकेट जारी होता है)।

  • फॉर्म 10D (Form 10D): 58 साल की उम्र पूरी होने के बाद नियमित मासिक पेंशन शुरू कराने के लिए फॉर्म 10D सबमिट किया जाता है।

ऑटो-मोड क्लेम सेटलमेंट: 3 से 4 दिनों में खाते में आएंगे पैसे

ईपीएफओ ने अपने आईटी सिस्टम को अपग्रेड करते हुए कई एडवांस क्लेम श्रेणियों (विशेषकर मेडिकल, शिक्षा और विवाह) के लिए 'ऑटो-मोड सेटलमेंट' (Auto-Mode Settlement) प्रणाली लागू की है।

यदि आपका यूएएन (UAN) पूरी तरह एक्टिव है, आधार और पैन कार्ड वेरिफाइड हैं और बैंक खाता एनपीसीआई (NPCI) से लिंक है, तो कंप्यूटर सॉफ्टवेयर बिना किसी मानव हस्तक्षेप के क्लेम की जांच करके 72 से 96 घंटे के भीतर पैसा सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में क्रेडिट कर देता है।

5 साल से पहले पीएफ निकासी पर टीडीएस (TDS) का नियम

पीएफ निकासी करते समय टैक्स नियमों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है:

  • 5 साल की निरंतर सर्विस के बाद: यदि आपकी कुल नौकरी (चाहे एक कंपनी में हो या पुरानी कंपनी से पीएफ ट्रांसफर कराकर कई कंपनियों को मिलाकर) 5 साल पूरी हो चुकी है, तो निकासी की गई पूरी राशि 100% टैक्स-फ्री (Tax-Free) होती है।

  • 5 साल से कम सर्विस पर निकासी: यदि कुल सेवा 5 साल से कम है और निकासी राशि ₹50,000 से अधिक है, तो पैन कार्ड लिंक होने पर 10% टीडीएस काटा जाएगा। यदि पैन कार्ड लिंक नहीं है, तो अधिकतम सीमा दर (लगभग 34.6%) पर भारी टैक्स कट सकता है।

  • फॉर्म 15G / 15H: यदि आपकी कुल वार्षिक आय टैक्सेबल लिमिट से कम है, तो आप टीडीएस कटौती से बचने के लिए क्लेम के साथ फॉर्म 15G (वरिष्ठ नागरिकों के लिए 15H) अपलोड कर सकते हैं।

ऑनलाइन पीएफ क्लेम करने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया

  1. ईपीएफओ के एकीकृत सदस्य पोर्टल (unifiedportal-mem.epfindia.gov.in) पर जाएं और अपना 12 अंकों का UAN नंबर, पासवर्ड और कैप्चा दर्ज कर लॉग इन करें।

  2. सबसे पहले 'Manage' टैब में जाकर 'KYC' सेक्शन चेक करें कि आपका आधार, पैन और बैंक खाता (आईएफएससी सहित) 'Approved' स्थिति में है या नहीं।

  3. टॉप मेन्यू में 'Online Services' पर क्लिक करें और ड्रॉपडाउन से 'Claim (Form-31, 19, 10C & 10D)' का चयन करें।

  4. स्क्रीन पर अपना लिंक्ड बैंक खाता नंबर दर्ज करके 'Verify' करें और नियम व शर्तों पर टिक करें।

  5. 'Proceed for Online Claim' पर क्लिक करें और अपनी आवश्यकता के अनुसार क्लेम का विकल्प (जैसे PF Advance Form 31 या Full Withdrawal) चुनें।

  6. पैसे निकालने का कारण, आवश्यक राशि और अपना आवासीय पता दर्ज करें। साथ ही बैंक पासबुक या कैंसिल्ड चेक की साफ कॉपी अपलोड करें।

  7. 'Get Aadhaar OTP' पर क्लिक करें। आधार से जुड़े रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी को दर्ज करके क्लेम सबमिट करें।

नौकरी बदलते समय हमेशा पुराने पीएफ बैलेंस को नई कंपनी के पीएफ खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर (Transfer) करने की सलाह दी जाती है। इससे न केवल सर्विस की निरंतरता बनी रहती है जिससे 5 साल का टैक्स बेनिफिट मिलता है, बल्कि आपके रिटायरमेंट फंड पर मिलने वाला चक्रवृद्धि ब्याज भी बिना रुकावट बढ़ता रहता है।

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