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भारत-नेपाल के बीच UPI सेवा शुरू: तुरंत ट्रांसफर होगा पैसा

पड़ोसी देशों के साथ मजबूत होते कूटनीतिक और आर्थिक रिश्तों के बीच भारत ने डिजिटल क्रांति के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर छू लिया है। भारत और नेपाल ने मिलकर एक बेहद महत्वाकांक्षी यूपीआई (UPI) आधारित सीमा पार धन हस्तांतरण प्रणाली (Cross-Border Money Transfer System) की शुरुआत कर दी है। इस क्रांतिकारी कदम के बाद अब दोनों देशों के नागरिक बिना किसी लंबी कागजी कार्रवाई या पारंपरिक बैंकों के चक्कर काटे, महज अपने मोबाइल एप्लीकेशन और डिजिटल वॉलेट के जरिए तुरंत पैसा एक-दूसरे को भेज और प्राप्त कर सकेंगे। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने इस बड़ी सौगात का एलान करते हुए बताया कि दोनों देशों के बीच यह नई 'व्यक्ति-से-व्यक्ति' (P2P) सीमा पार धन प्रेषण सुविधा पूरी तरह से लाइव हो चुकी है। संपादक अनुराग रौशन की इस विशेष डिजिटल रिपोर्ट में जानिए कि इस सुविधा से सीमा पर रहने वाले लाखों लोगों, प्रवासी मजदूरों और व्यापारियों को किस तरह सीधे तौर पर बड़ा फायदा होने वाला है।

UPI और NPI के बीच जुड़ा सीधा कनेक्शन, अब बिना किसी झंझट के सेकंडों में होगा इंटरनेशनल पेमेंट

इस नई और बेहद सुरक्षित डिजिटल प्रणाली के तहत भारत के 'एकीकृत भुगतान इंटरफेस' (UPI) को नेपाल के 'राष्ट्रीय भुगतान इंटरफेस' (NPI) के साथ सीधे तौर पर लिंक कर दिया गया है। इस तकनीकी एकीकरण का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब दोनों देशों के आम उपभोक्ता पारंपरिक और समय लेने वाले मनी ट्रांसफर चैनलों पर निर्भर रहे बिना, अपने फोन में मौजूद सामान्य मोबाइल बैंकिंग ऐप से ही सीधे सामने वाले के खाते में पैसे ट्रांसफर कर पाएंगे। रक्षा और वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सीमा पार होने वाले लेन-देन को न केवल सुपर-फास्ट और सुरक्षित बनाएगा, बल्कि जेब पर भारी पड़ने वाले एक्स्ट्रा ट्रांसफर चार्ज से भी आम जनता को बड़ी राहत देगा।

एनपीसीआई और नेपाल क्लियरिंग हाउस ने मिलाया हाथ, डिजिटल सहयोग से मजबूत होंगे दोनों देशों के सांस्कृतिक रिश्ते

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान में इस यूपीआई-एनपीआई (UPI-NPI) लिंक को दोनों पड़ोसी देशों के बीच वित्तीय समावेशन और डिजिटल सहयोग की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा और युगांतरकारी कदम बताया गया है। इस पूरे प्रोजेक्ट के तकनीकी ढांचे को नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया की अंतरराष्ट्रीय शाखा 'एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड' (NIPL) और 'नेपाल क्लियरिंग हाउस लिमिटेड' (NCHL) ने मिलकर बेहद कम समय में तैयार किया है। सरकार का मानना है कि इस सुगम और किफायती डिजिटल भुगतान प्रणाली से भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को एक बिल्कुल नई और आधुनिक मजबूती मिलेगी।

सीमावर्ती व्यापारियों, छात्रों और प्रवासी कामगारों की चमकेगी किस्मत, महंगे और पुराने तरीकों से मिली आजादी

यह नई प्रेषण प्रणाली विशेष रूप से उन सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लाखों परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जहां भारत और नेपाल के बीच रोजाना हजारों लोग, सामान और सेवाएं सीमा पार करती हैं। अब तक नेपाल से भारत आकर काम करने वाले प्रवासी श्रमिकों, वहां पढ़ने वाले छात्रों, छोटे व्यवसायियों और पर्यटकों को अपने घर पैसे भेजने के लिए भारी कमीशन और कई दिनों का लंबा इंतजार करना पड़ता था। लेकिन अब इस लाइव कॉरिडोर्स की मदद से वे अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा सीधे अपने परिजनों के बैंक खातों या डिजिटल वॉलेट में तुरंत भेज सकेंगे, जिससे समय और पैसे दोनों की भारी बचत होगी।

दुनिया भर में गूंज रहा है भारत के UPI का डंका, वैश्विक स्तर पर लगातार बढ़ रहा है डिजिटल फुटप्रिंट

भारत का स्वदेशी यूपीआई (UPI) आज दुनिया की सबसे सफल और भरोसेमंद रीयल-टाइम भुगतान प्रणालियों में शीर्ष पर पहुंच चुका है। भारत में लोग न सिर्फ रोजमर्रा की खरीदारी बल्कि बिजली-पानी के बिल, मोबाइल-डीटीएच रिचार्ज, फास्टैग भुगतान और बड़े मर्चेंट लेनदेन के लिए आंख मूंदकर इस पर भरोसा करते हैं। अब नेपाल के साथ हुआ यह नवीनतम समझौता यह साबित करता है कि भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कितनी मजबूत हो चुकी है। आने वाले समय में भारत का यह सफल मॉडल दक्षिण एशिया के अन्य देशों के साथ भी जुड़कर एक विशाल और संयोजित क्षेत्रीय भुगतान नेटवर्क का मार्ग प्रशस्त करने जा रहा है।

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