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मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रंप ने दी वीटो की खुली धमकी: बोले- ‘डेमोक्रेट्स को घुटनों पर लाकर समझौते को मजबूर कर दूंगा’

अमेरिका में होने वाले बेहद अहम मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले राजनीतिक सरगर्मियां अपने चरम पर पहुंच गई हैं। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने आक्रामक और बेबाक अंदाज से वाशिंगटन के सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है। ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि आगामी चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी अमेरिकी कांग्रेस (संसद) में अपना बहुमत गंवा भी देती है, तो भी वह झुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने राष्ट्रपति की संवैधानिक शक्तियों का जिक्र करते हुए कहा कि वह अपने वीटो पावर का ऐसा इस्तेमाल करेंगे कि विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता बातचीत और समझौते की मेज पर आने के लिए पूरी तरह मजबूर हो जाएंगे। फ्लोरिडा में आयोजित एक विशाल चुनावी रैली के लिए रवाना होने से पहले व्हाइट हाउस के बाहर मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने पूरे विश्वास के साथ दावा किया कि रिपब्लिकन पार्टी शानदार जीत दर्ज करने जा रही है, लेकिन किसी भी विपरीत परिस्थिति से निपटने के लिए उनके पास अचूक विधायी हथियार तैयार है।

'हर चीज पर लगा दूंगा वीटो': विभाजित सरकार भी नहीं रोक पाएगी ट्रंप का एजेंडा

व्हाइट हाउस में पत्रकारों के तीखे सवालों का सामना करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने संभावित राजनीतिक गतिरोध को लेकर अपनी भविष्य की रणनीति का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि अगर प्रतिनिधि सभा या सीनेट में डेमोक्रेट्स बहुमत हासिल कर भी लेते हैं, तो उनके पारित किए गए हर कानून और नीतिगत प्रस्ताव पर वह सीधे वीटो लगा देंगे। ट्रंप के शब्दों में, जब मैं हर चीज पर वीटो लगाना शुरू करूंगा, तब डेमोक्रेट्स को समझ आएगा कि देश कैसे चलाना है और वे गिड़गिड़ाते हुए मेरे पास आएंगे और हमारे एजेंडे पर समझौता करेंगे। जब उनसे पूछा गया कि क्या कार्यपालिका और विधायिका के बीच इस तरह के कड़वे टकराव से अमेरिकी अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी, तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि विभाजित सरकार भी उनके दृढ़ संकल्प और अमेरिका फर्स्ट की प्राथमिकताओं को लागू करने में कोई बाधा नहीं बन सकती।

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट खारिज, कार्ल रोव को कहा 'लूजर'

इस दौरान ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया और विश्लेषकों की उन खबरों पर भी जमकर भड़ास निकाली, जिनमें मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के पिछड़ने का दावा किया जा रहा था। द वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) के उस हालिया विश्लेषण को उन्होंने पूरी तरह बकवास करार दिया, जिसमें लिखा गया था कि ट्रंप की आक्रामक भाषा और ध्रुवीकरण वाले प्रचार अभियान से मध्यममार्गी मतदाताओं में नाराजगी बढ़ रही है और इससे पार्टी को सीटों का भारी नुकसान हो सकता है। ट्रंप ने इस लेख के लेखक और रिपब्लिकन पार्टी के पूर्व दिग्गज रणनीतिकार कार्ल रोव पर सीधा व्यक्तिगत हमला बोलते हुए उन्हें सिरे से 'लूजर' करार दिया। ट्रंप ने तर्क दिया कि उनकी देशव्यापी रैलियों में उमड़ रहा जनसैलाब इस बात का सीधा प्रमाण है कि जमीनी स्तर पर पार्टी उम्मीदवारों को उनकी मौजूदगी से जबरदस्त बढ़त मिल रही है और मुख्यधारा का मीडिया केवल मनगढ़ंत नैरेटिव गढ़ने में जुटा है।

डेमोक्रेट सांसद इल्हान उमर के इस्तीफे की मांग: पहचान को लेकर लगाए गंभीर आरोप

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने विपक्षी खेमे की मुखर नेता और मिनेसोटा से डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद इल्हान उमर को भी निशाने पर लिया। उन्होंने इल्हान उमर से अपने पद से तुरंत इस्तीफा देने की मांग उठाई। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज की एक पुरानी और विवादित रिपोर्ट का संदर्भ देते हुए सनसनीखेज दावा किया कि सांसद का असली नाम इल्हान उमर नहीं बल्कि 'इल्हान नूर सईद एल्मी' है और उन्होंने अपनी पहचान छुपाकर धोखाधड़ी की है। हालांकि, इस आरोप पर इल्हान उमर के आधिकारिक कार्यालय ने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए इसे पूरी तरह निराधार, झूठा और ध्यान भटकाने वाला षड्यंत्र बताया। उमर के प्रवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि उनका आधिकारिक और वास्तविक नाम इल्हान उमर ही है और ट्रंप बार-बार अपनी चुनावी रैलियों में अल्पसंख्यकों व महिला सांसदों को निशाना बनाकर नफरत फैलाने का काम करते हैं।

कैलिफोर्निया में फर्जी वोटिंग का आरोप: लाखों बोगस वोटर्स की जताई आशंका

चुनावी प्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल उठाने के अपने पुराने रुख को दोहराते हुए ट्रंप ने कैलिफोर्निया राज्य में बड़े पैमाने पर धांधली होने का आरोप मढ़ दिया। उन्होंने बिना कोई आधिकारिक दस्तावेज या साक्ष्य पेश किए दावा किया कि अकेले कैलिफोर्निया में 20 हजार से ज्यादा फर्जी मतदाता तैयार किए गए हैं। ट्रंप ने आगे कहा कि अगर पूरे राज्य की गहन जांच कराई जाए तो यह आंकड़ा लाखों में पहुंच सकता है, जिससे चुनाव परिणाम सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। उन्होंने कैलिफोर्निया के साथ-साथ मिनेसोटा और अन्य कई राज्यों की मतदान प्रक्रियाओं पर भी अविश्वास जताया और कहा कि मेल-इन बैलेट तथा कमजोर सत्यापन नियमों के कारण चुनावी तंत्र में भारी अनियमितताएं हो रही हैं। हालांकि, चुनाव अधिकारियों और राज्य प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से नकारते हुए पूरी मतदान प्रक्रिया को पारदर्शी और त्रुटिहीन बताया है।

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