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पुरुषों में भी बढ़ रहा ब्रेस्ट कैंसर का खतरा, लक्षण और कारण जानकर समय रहते हो जाएं सावधान

News India Live, Digital Desk : आमतौर पर ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) को महिलाओं से जुड़ी बीमारी माना जाता है, लेकिन यह एक बड़ा मिथक है। हकीकत यह है कि पुरुषों में भी ब्रेस्ट टिश्यू (स्तन ऊतक) होते हैं, जिनमें कैंसर कोशिकाएं विकसित हो सकती हैं। हालांकि, पुरुषों में इसके मामले महिलाओं की तुलना में मात्र 1% हैं, लेकिन जानकारी के अभाव और संकोच के कारण पुरुष इसके शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे इलाज में देरी हो जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पुरुषों में यह बीमारी अक्सर स्टेज 2 या स्टेज 3 में जाकर पता चलती है, जो चिंता का विषय है।इन लक्षणों को भूलकर भी न करें इग्नोरपुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर के संकेत काफी स्पष्ट होते हैं, बस जरूरत है उन पर ध्यान देने की:स्तन में गांठ: निप्पल के पास या छाती के ऊतकों में सख्त और दर्द रहित गांठ का होना सबसे प्रमुख लक्षण है।निप्पल में बदलाव: निप्पल का अचानक अंदर की ओर मुड़ना (Inverted Nipple) या उसके आकार में बदलाव आना।असामान्य रिसाव: निप्पल से खून या किसी पारदर्शी तरल पदार्थ का निकलना।त्वचा में परिवर्तन: स्तन की त्वचा पर गड्ढे पड़ना, लालिमा आना, पपड़ी बनना या वहां अल्सर (घाव) जैसा महसूस होना जो ठीक न हो रहा हो।बगल में सूजन: बगल (Armpit) या गर्दन के पास लिम्फ नोड्स में गांठ या सूजन महसूस होना, जो कैंसर के फैलने का संकेत हो सकता है।पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर के मुख्य कारणपुरुषों में इस बीमारी के पीछे कई शारीरिक और आनुवंशिक कारण हो सकते हैं:बढ़ती उम्र: 60 से 70 वर्ष की आयु के पुरुषों में इसका जोखिम सबसे अधिक होता है।हार्मोनल असंतुलन: शरीर में एस्ट्रोजन (Estrogen) लेवल का बढ़ना और टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) का कम होना इसका बड़ा कारण है।आनुवंशिक कारक (Genetics): यदि परिवार में किसी को पहले ब्रेस्ट कैंसर रहा हो या BRCA1 और BRCA2 जैसे जीन म्यूटेशन विरासत में मिले हों।लीवर और अंडकोष की बीमारियां: लीवर की गंभीर बीमारियों या अंडकोष (Testicles) में संक्रमण/चोट के कारण भी हार्मोनल बैलेंस बिगड़ सकता है।मोटापा और लाइफस्टाइल: अधिक वजन शरीर में एस्ट्रोजन के स्तर को बढ़ाता है। इसके अलावा शराब का अत्यधिक सेवन और रेडिएशन के संपर्क में आना भी खतरे को बढ़ाता है।जांच और बचाव के उपाययदि आपको छाती के आसपास कोई भी असामान्य बदलाव महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। इसकी पुष्टि के लिए मैमोग्राफी, अल्ट्रासाउंड या बायोप्सी की जाती है। शुरुआती चरण में पता चलने पर सर्जरी, कीमोथेरेपी और हार्मोन थेरेपी के जरिए इसका सफल इलाज संभव है। बचाव के लिए नियमित व्यायाम करें, वजन नियंत्रित रखें और संतुलित आहार लें। याद रखें, जागरूकता ही इस बीमारी से बचने का सबसे बड़ा हथियार है।

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