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मिडटर्म चुनाव में हार के बाद चौतरफा घिरे डोनाल्ड ट्रंप: पाकिस्तान से जुड़े क्रिप्टो सौदों की जांच करेंगे डेमोक्रेट्स

संयुक्त राज्य अमेरिका के मध्यावधि चुनाव 2026 (US Midterm Elections) के आधिकारिक नतीजे सामने आने के बाद वाशिंगटन के सत्ता के गलियारों में अभूतपूर्व उथल-पुथल शुरू हो गई है। रिपब्लिकन पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन और दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक पार्टी के बढ़ते दबदबे ने पूर्व राष्ट्रपति और 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' (MAGA) आंदोलन के सर्वेसर्वा डोनाल्ड ट्रंप की राजनीतिक ढाल को पूरी तरह कमजोर कर दिया है। चुनावी नतीजों ने न केवल रिपब्लिकन पार्टी के कद्दावर नेताओं और टेक्सास के दिग्गज सीनेटर टेड क्रूज जैसे चेहरों का मनोबल तोड़ दिया है, बल्कि उन तमाम अरबपति कॉर्पोरेट दिग्गजों की रातों की नींद उड़ा दी है जो अब तक ट्रंप की छत्रछाया में अपने कारोबारी साम्राज्य को सींच रहे थे। ट्रंप अक्सर सार्वजनिक मंचों से यह दावा करते नहीं थकते थे कि सिलिकॉन वैली के शीर्ष सीईओ और दुनिया के सबसे रसूखदार उद्योगपति उनके आगे-पीछे केवल इसलिए चक्कर काटते हैं ताकि उन्हें सरकारी नीतियों में सीधी रियायतें और राहत मिल सके। लेकिन चुनाव में सत्ता संतुलन बदलते ही यह साफ हो गया है कि ट्रंप के साथ नजदीकी अब इन कॉर्पोरेट घरानों के लिए सबसे बड़ा रणनीतिक और कानूनी नुकसान साबित होने वाली है।

प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) में नियंत्रण हासिल करते ही डेमोक्रेटिक पार्टी के शीर्ष सांसदों ने ट्रंप प्रशासन और उनके कार्यकाल से जुड़े तमाम संदिग्ध नीतिगत फैसलों, वित्तीय हेराफेरी और सत्ता के दुरुपयोग की व्यापक संसदीय जांच (Congressional Investigations) शुरू करने का औपचारिक बिगुल फूंक दिया है। वॉशिंगटन में कानून के जानकारों का मानना है कि आने वाले दो साल अमेरिकी राजनीति में तीखे कानूनी संघर्ष और संसदीय सम्मनों के गवाह बनेंगे। हालांकि डेमोक्रेटिक पार्टी के कुछ वरिष्ठ रणनीतिकारों ने यह आगाह भी किया है कि इन जांचों का मकसद राजनीतिक बदले की भावना से परे निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया का पालन कराना होना चाहिए ताकि संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा पर कोई आंच न आए। इस बदले हुए माहौल ने कैपिटल हिल से लेकर व्हाइट हाउस तक एक नई कानूनी जंग की जमीन तैयार कर दी है।

हाउस ओवरसाइट कमेटी का नेतृत्व संभालेंगे रॉबर्ट गार्सिया, पाकिस्तान से जुड़े क्रिप्टो नेटवर्क सहित 4 बड़े मोर्चों पर होगी घेराबंदी

कांग्रेस में बहुमत हासिल करने के बाद कैलिफोर्निया से आने वाले आक्रामक डेमोक्रेटिक सांसद रॉबर्ट गार्सिया के अत्यंत शक्तिशाली 'हाउस ओवरसाइट एंड गवर्नमेंट रिफॉर्म कमेटी' का नया अध्यक्ष बनने का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो चुका है। रॉबर्ट गार्सिया ने कमान संभालने से पहले ही जांच के चार सबसे बड़े और संवेदनशील कार्यक्षेत्र तय कर लिए हैं, जो सीधे तौर पर ट्रंप परिवार की वित्तीय जड़ों पर चोट करेंगे। इसमें सबसे बड़ा और चौंकाने वाला मामला डोनाल्ड ट्रंप के पारिवारिक व्यापारिक सौदों की परतें खोलना है। जांच एजेंसी की नजरें विशेष रूप से उस रहस्यमयी क्रिप्टोकरेंसी नेटवर्क और विदेशी फंड फ्लो पर टिकी हैं, जिसके तार पाकिस्तान और अन्य विदेशी संस्थाओं से सीधे जुड़े होने के पुख्ता आरोप हैं। यह जांच इस बात की तह तक जाएगी कि क्या ट्रंप परिवार के निजी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म्स और विदेशी प्रोजेक्ट्स के जरिए गैरकानूनी वित्तीय लाभ उठाए गए और इसके बदले अमेरिकी नीतियों को प्रभावित करने की कोशिश की गई।

इसके अलावा गार्सिया की कमेटी तीन अन्य प्रमुख मामलों पर पूरी ताकत से वार करने जा रही है। दूसरा मुख्य बिंदु कॉर्पोरेट भ्रष्टाचार और राजनीतिक घूसखोरी की गहन पड़ताल है, जिसके तहत उन सौदों की स्क्रूटनी होगी जिनमें बड़े उद्योगपतियों को अरबों डॉलर के सरकारी ठेके और नीतिगत छूटें दी गईं। तीसरा गंभीर मामला डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) और इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) द्वारा प्रवासियों और सीमावर्ती इलाकों में किए गए कथित मानवाधिकार हनन और अमानवीय दुर्व्यवहार से जुड़ा है। वहीं चौथा और सबसे विस्फोटक बिंदु कुख्यात जेफ्री एपस्टीन की संवेदनशील फाइलों और दस्तावेजों की सार्वजनिक समीक्षा से संबंधित है, जिसमें कई रसूखदार राजनीतिक और व्यापारिक हस्तियों के शामिल होने के संकेत मिलते रहे हैं। इन चार जांचों के जरिए डेमोक्रेट्स ट्रंप और उनके पूरे वित्तीय नेटवर्क को कानूनी कठघरे में खड़ा करने की अचूक योजना बना चुके हैं।

अरबपति एलन मस्क के लिए भारी पड़ेंगे अगले दो साल, संसदीय सुनवाइयों और सम्मनों के काटने पड़ सकते हैं चक्कर

ट्रंप के सबसे प्रमुख और आक्रामक कॉर्पोरेट समर्थकों में दुनिया के सबसे अमीर शख्स और टेस्ला व स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क का नाम सबसे ऊपर है। डेमोक्रेट्स की इस चुनावी विजय के बाद मस्क के लिए आने वाले दो साल अत्यंत जटिल, तनावपूर्ण और कानूनी अड़चनों से भरे साबित होने वाले हैं। व्यापारिक विश्लेषकों का मानना है कि मस्क को आने वाले महीनों में अपने व्यावसायिक कामकाज छोड़कर वाशिंगटन में संसदीय समितियों की मैराथन सुनवाइयों में गवाही देने के लिए बार-बार चक्कर काटने पड़ सकते हैं। उनके सरकारी अनुबंधों, डिफेंस स्पेस प्रोजेक्ट्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के नीतिगत फैसलों को लेकर अब डेमोक्रेटिक सांसदों की तीखी सवालों की बौछार का सामना करना पड़ेगा।

मध्यावधि चुनाव के दौरान एलन मस्क ने रिपब्लिकन पार्टी और उससे जुड़ी पोलिटिकल एक्शन कमेटियों (PACs) को सत्ता में वापस लाने के लिए अपनी तिजोरी का मुंह पूरी तरह खोल दिया था। संघीय चुनाव आयोग के नवीनतम वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, मस्क ने इस चुनाव में अकेले 445 मिलियन डॉलर (लगभग 3700 करोड़ रुपये से अधिक) की भारी-भरकम राशि पानी की तरह बहा दी। यह खगोलीय राशि एलन मस्क को अमेरिकी राजनीतिक इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा व्यक्तिगत राजनीतिक दानदाता (Biggest Individual Donor) साबित करती है। मस्क ने जिस तरह खुलेआम रिपब्लिकन उम्मीदवारों के पक्ष में आर्थिक और सोशल मीडिया ताकत झोंकी थी, उसने डेमोक्रेटिक खेमे में उनके प्रति गहरी नाराजगी पैदा कर दी थी। अब जब राजनीतिक पासा पलट चुका है, तो मस्क का यही कॉर्पोरेट दांव उनके वैश्विक कारोबार के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया है।

445 मिलियन डॉलर के निवेश पर 3 जीत और 40 हार, टेक्सास में मस्क के चहेते केन पैक्सटन को मिली करारी शिकस्त

अरबों रुपये का भारी चुनावी निवेश करने के बावजूद नतीजों के मोर्चे पर एलन मस्क को बेहद शर्मनाक राजनीतिक विफलता का मुंह देखना पड़ा है। चुनावी आंकड़ों की सूक्ष्म समीक्षा यह चौंकाने वाला सच उजागर करती है कि मस्क ने जिन 43 रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए सीधे तौर पर प्रचार किया और भारी फंडिंग की, उनमें से केवल 3 उम्मीदवार ही किसी तरह अपनी सीट बचा पाए, जबकि 40 उम्मीदवारों को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। इसी तरह अमेरिकी सीनेट की प्रतिष्ठा की लड़ाई में मस्क ने जिन 7 रिपब्लिकन सीनेटर प्रत्याशियों पर दांव लगाया था, उनमें से 6 प्रत्याशी चुनाव हार गए। दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति का यह 'स्ट्राइक रेट' यह साबित करने के लिए काफी है कि अमेरिकी मतदाताओं ने अरबपतियों के धनबल के प्रभाव को सिरे से खारिज कर दिया।

इस पूरे चुनाव में मस्क के लिए सबसे शर्मनाक और करारा झटका टेक्सास राज्य से लगा, जहां टेस्ला की गीगाफैक्ट्री और स्पेसएक्स के विशाल लॉन्च पैड सहित उनके सबसे बड़े व्यावसायिक हित स्थापित हैं। टेक्सास में अपने प्रभाव को सुरक्षित रखने के लिए मस्क ने विवादित रिपब्लिकन अटॉर्नी जनरल केन पैक्सटन को जिताने के लिए अकेले 230 मिलियन डॉलर (लगभग 1900 करोड़ रुपये) का भारी बजट झोंक दिया था। लेकिन इन तमाम विज्ञापनों और आर्थिक जोर-आजमाइश के बावजूद जमीनी स्तर पर मतदाताओं ने बदलाव के पक्ष में मतदान किया। युवा डेमोक्रेटिक नेता जेम्स तालारिको ने एक ऐतिहासिक मुकाबले में केन पैक्सटन को भारी मतों से पराजित कर दिया। टेक्सास में मस्क के इस सबसे महंगे राजनीतिक प्रोजेक्ट का ध्वस्त होना यह स्पष्ट करता है कि पैसे की ताकत जमीनी जनमत के सामने बेअसर साबित हुई है, और अब ट्रंप-मस्क की यह जोड़ी वाशिंगटन के नए शक्ति संतुलन के सामने बैकफुट पर आ चुकी है।

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