यूक्रेन का रूस के एयरफील्ड पर बड़ा हमला: नेपच्यून मिसाइलों से छह Su-34M जेट तबाह, तेल रिफाइनरी में भी लगी आग

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा भीषण संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। युद्ध के मैदान से एक बार फिर रूस को बहुत बड़ा झटका लगने की खबर सामने आ रही है। यूक्रेन की नौसेना ने रूस के वोरोनिश क्षेत्र में स्थित बोरिसोक्लेब्स्क एयरफील्ड (Borisoglebsk Airfield) पर रात के वक्त अचानक एक जोरदार मिसाइल हमला बोल दिया। इस खतरनाक और सटीक हमले में रूस के छह Su-34M सैन्य विमानों को पूरी तरह तबाह करने का दावा किया गया है। दोनों देशों के बीच जारी इस तबाही के दौर ने एक बार फिर वैश्विक चिंता बढ़ा दी है।
नेपच्यून मिसाइल सिस्टम का किया गया इस्तेमाल
यूक्रेन की नौसेना द्वारा टेलीग्राम पर जारी किए गए आधिकारिक बयान के अनुसार, बोरिसोक्लेब्स्क एयरफील्ड पर किए गए इस विध्वंसक हमले के लिए उन्होंने अपने स्वदेशी नेपच्यून तटीय मिसाइल सिस्टम (Neptune Coastal Missile System) का इस्तेमाल किया। यूक्रेन के इन हमलों ने एक बार फिर रूसी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
दूसरी ओर, क्षेत्रीय गवर्नर पावेल माल्कोव ने जानकारी दी कि इसी बीच रूस के रियाजान क्षेत्र में भी यूक्रेन के एक अन्य ड्रोन हमले के कारण वहां की एक प्रमुख तेल रिफाइनरी में भीषण आग लग गई। रूस की बड़ी तेल कंपनी 'रोसनेफ्ट' के स्वामित्व वाली यह रियाजान रिफाइनरी सीधे तौर पर राजधानी मॉस्को को ईंधन की आपूर्ति करती है और यह रूस की कुल तेल-शोधन क्षमता का लगभग 5% हिस्सा है। पिछले कुछ महीनों के दौरान इस महत्वपूर्ण रिफाइनरी को कई बार ड्रोन हमलों का निशाना बनाया जा चुका है।
बड़े पैमाने पर हुए नुकसान का आकलन जारी
रूसी स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, रियाजान क्षेत्र में हुए इन बड़े ड्रोन हमलों के कारण सुरक्षा के मद्देनजर दो जिलों के स्कूलों और किंडरगार्टन में कक्षाएं तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई हैं। गवर्नर माल्कोव ने बताया कि हमलों से हुए नुकसान का सटीक आकलन किया जा रहा है और आपातकालीन सेवाएं युद्धस्तर पर मौके पर राहत कार्य में जुटी हुई हैं। क्षेत्र में स्थित एक अन्य गोदाम को भी इन हमलों में भारी नुकसान पहुंचा है।
क्या सचमुच प्रभावी है ऊर्जा क्षेत्र का सीजफायर
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कूटनीतिक स्तर पर शांति स्थापित करने के दावे किए जा रहे हैं। गौरतलब है कि पिछले रविवार को ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक घोषणा की थी कि रूस और यूक्रेन ऊर्जा क्षेत्र में संघर्ष विराम (सीजफायर) के लिए मौखिक रूप से सहमत हो गए हैं। हालांकि, ज़मीन पर जिस तरह से ताबड़तोड़ मिसाइल और ड्रोन हमले जारी हैं, उससे साफ है कि किसी भी पक्ष ने आधिकारिक तौर पर इस संघर्ष विराम की पुष्टि नहीं की है और युद्ध का मैदान अभी भी पूरी तरह सुलग रहा है।