उत्तर प्रदेश

योगी जी के पेट में दर्द क्यों? रामगोपाल यादव के तीखे तंज से उत्तर प्रदेश की सियासत गर्माई

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर से भगवान श्रीराम के मंदिर और दर्शन को लेकर पारा काफी हाई हो चुका है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के अयोध्या स्थित राम मंदिर में जाकर रामलला के दर्शन करने के मामले ने राज्य के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। इस पूरे घटनाक्रम पर जब सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य भाजपा नेताओं की ओर से बयान सामने आए, तो समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद रामगोपाल यादव ने बेहद कड़े शब्दों में पलटवार किया है। रामगोपाल यादव के एक तीखे सवाल ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है, जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर पूछा है कि आखिर अखिलेश यादव के मंदिर जाने से मुख्यमंत्री के पेट में दर्द क्यों हो रहा है। इस बयान के सामने आने के बाद से ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है और आए दिन नए राजनीतिक समीकरणों पर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे और भाजपा की प्रतिक्रियाओं का पूरा दौर

राजनीतिक गलियारों में चर्चा इस बात की है कि जब भी विपक्षी दल के बड़े नेता धार्मिक स्थलों या विशेषकर अयोध्या के राम मंदिर का रुख करते हैं, तो राज्य की राजनीति में भूचाल आ जाता है। हाल ही में जब अखिलेश यादव ने अयोध्या पहुंचकर रामलला के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की, तो उसके बाद भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की तरफ से इसे राजनीतिक दिखावा और अवसरवादी राजनीति करार दिया गया। भाजपा नेताओं का कहना था कि समाजवादी पार्टी हमेशा से सनातन संस्कृति और राम मंदिर निर्माण के खिलाफ रही है और अब राजनीतिक नफा-नुकसान को देखकर मंदिर पहुंच रही है। इन तमाम बयानों और आलोचनाओं के बीच समाजवादी पार्टी के रणनीतिकारों और नेताओं ने डिफेंसिव होने के बजाय आक्रामक रुख अख्तियार करने का फैसला किया और इसी कड़ी में रामगोपाल यादव का यह तीखा बयान सामने आया जिसने सियासी पारा और अधिक बढ़ा दिया

'योगी जी के पेट में दर्द क्यों?' रामगोपाल यादव का सीधा और तीखा हमला

पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रो. रामगोपाल यादव ने मीडिया के सामने खुलकर अपनी बात रखी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयानों पर गहरी आपत्ति जताई। उन्होंने बेहद तीखे अंदाज में सवाल उठाते हुए कहा कि क्या भगवान राम पर किसी एक राजनीतिक दल या विशेष व्यक्ति का एकाधिकार है? रामगोपाल यादव ने दो टूक शब्दों में कहा कि अखिलेश यादव हिंदू हैं, सनातनी हैं और भगवान राम में उनकी गहरी आस्था है, इसलिए उन्हें किसी के प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब कोई विपक्षी नेता भगवान के दरबार में माथा टेकने जाता है, तो मुख्यमंत्री और उनकी पूरी पार्टी को परेशानी क्यों होने लगती है और उनके पेट में दर्द क्यों शुरू हो जाता है। रामगोपाल यादव के इस बयान ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक चौपालों तक एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जहां समर्थक और विरोधी अपने-अपने तर्क रख रहे हैं।

मंदिर की राजनीति और आगामी चुनावों पर पड़ने वाला दूरगामी प्रभाव

उत्तर प्रदेश की राजनीति में धर्म और विकास हमेशा से ही चुनावी वैतरणी पार करने के सबसे बड़े हथियार रहे हैं। जैसे-जैसे राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं, वैसे-वैसे हर दल अपनी रणनीति को धार देने में लगा हुआ है। समाजवादी पार्टी का यह रुख साफ संकेत दे रहा है कि पार्टी अब हिंदुत्व और धार्मिक मुद्दों पर रक्षात्मक मुद्रा में रहने के बजाय आक्रामक तरीके से अपनी धार्मिक और सामाजिक पहचान को जनता के बीच रखना चाहती है। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयानों से राज्य का राजनीतिक माहौल पूरी तरह से ध्रुवीकृत हो सकता है, जिसका सीधा असर आने वाले चुनावों पर पड़ सकता है। आम जनता और मतदाता भी इन तमाम सियासी बहसों को बहुत करीब से देख रहे हैं, जहां विकास के मुद्दों के साथ-साथ आस्था की राजनीति भी केंद्र बिंदु बनी हुई है।

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