उत्तर प्रदेश

लखनऊ में अब पॉलिथीन और गंदगी फैलाने वालों की खैर नहीं नगर निगम का हंटर चला

News India Live, Digital Desk : हम लखनऊ वाले अपनी तहजीब और नजाकत के लिए जाने जाते हैं, लेकिन सच कड़वा है जब सफाई की बात आती है, तो हम थोड़े लापरवाह हो जाते हैं। पान खाकर कहीं भी थूक देना या घर का कूड़ा चुपके से सड़क किनारे फेंक देना आम बात हो गई है। लेकिन अब संभल जाइए! लखनऊ नगर निगम (LMC) अब फुल एक्शन मोड में आ गया है।अगर आप आज (5 दिसंबर) बाजार जा रहे हैं या दुकान चलाते हैं, तो यह खबर आपके बहुत काम की है। नगर निगम ने ‘सिंगल यूज़ प्लास्टिक’ (Single-use Plastic) और ‘खुले में गंदगी’ (Littering) के खिलाफ एक बड़ा अभियान (Campaign) शुरू कर दिया है।क्या है नगर निगम का नया प्लान?नगर निगम के अधिकारी अब एसी कमरों से निकलकर सीधे ग्राउंड जीरो यानी बाजारों और सड़कों पर उतर आए हैं। उनका टारगेट दो चीजें हैं:प्लास्टिक को ‘ना’: वो पतली पॉलिथीन जो बैन होने के बावजूद धड़ल्ले से सब्जी मंडी और जनरल स्टोर पर मिल जाती थी, अब उस पर सख्त रोक लग रही है। दुकानों पर छापे मारे जा रहे हैं। अगर दुकानदार के पास प्रतिबंधित प्लास्टिक मिली तो भारी जुर्माना, और अगर ग्राहक के हाथ में दिखी तो उससे भी सवाल-जवाब हो सकता है।गंदगी फैलाना पड़ेगा महंगा: अक्सर लोग डस्टबिन की जगह कूड़ा प्लाट या नाले में फेंक देते हैं। इस अभियान के तहत, ऐसे ‘हॉटस्पॉट्स’ की निगरानी की जा रही है। अगर आप पब्लिक प्लेस पर गंदगी फैलाते पकड़े गए, तो अच्छा-खासा चालान कट सकता है।आप पर क्या असर होगा?सोचिए, आप 10 रुपये की धनिया लेने गए और पुलिस या निगम वालों ने 500 रुपये का चालान काट दिया क्योंकि आपके पास प्लास्टिक की थैली थी। बुरा लगेगा न? इसलिए बेहतर है कि “इलाज से परहेज भला”।दुकानदारों के लिए: रिस्क मत लीजिए। कागज या कपड़े के थैले ही इस्तेमाल करें।आम जनता के लिए: घर से अपना झोला लेकर निकलें। यह पुराने जमाने की बात जरूर है, लेकिन यही सबसे सही तरीका है।सफाई सिर्फ निगम का काम नहींदोस्तों, हम चाहते हैं कि हमारा लखनऊ भी इंदौर की तरह साफ-सुथरा (Cleanest City) बने। निगम अपनी सख्ती दिखा रहा है, चालान काट रहा है, लेकिन असली बदलाव तो हमारी आदतों से आएगा। शहर हमारा है, तो उसे गंदा भी हम ही क्यों करें?तो चलिए, आज से ही कसम खा लेते हैं न गंदगी करेंगे, न करने देंगे। और हाँ, अगर चालान से बचना है, तो प्लास्टिक को अभी ‘टाटा-बाय-बाय’ कह दीजिए!

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