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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज बैंक प्रमुखों के साथ करेंगी समीक्षा बैठक, घटेगा विदेशी मुद्रा का संकट

देश के विदेशी मुद्रा भंडार और वित्तीय स्थिरता को और अधिक मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बार फिर से अपनी कवायद तेज कर दी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सोमवार को देश के सभी प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSB) के शीर्ष अधिकारियों और प्रबंध निदेशकों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करेंगी। इस अहम बैठक का मुख्य एजेंडा अनिवासी भारतीयों (NRI) और ओवरसीज सिटिजंस ऑफ इंडिया (OCI) के माध्यम से देश में विदेशी मुद्रा जमा (फॉरेन करेंसी डिपॉजिट) आकर्षित करने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान की अब तक की प्रगति का जायजा लेना है।

विदेशी मुद्रा प्रवाह में आई भारी गिरावट बनी चिंता का मुख्य कारण

यह उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ऐसे संवेदनशील समय पर बुलाई गई है जब देश में विदेशी मुद्रा जमा के शुद्ध प्रवाह (इन्फ्लो) में काफी कमी दर्ज की गई है। वित्तीय मोर्चे पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान जो विदेशी मुद्रा जमा लगभग $7.1 अरब डॉलर हुआ करती थी, वह लुढ़ककर वित्त वर्ष 2025-26 में महज $94.6 करोड़ डॉलर के स्तर पर सिमट गई है। इस बड़ी गिरावट से निपटने और बैंकिंग प्रणाली में लिक्विडिटी को बनाए रखने के लिए सरकार और रिजर्व बैंक दोनों ने मिलकर रणनीतिक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

आरबीआई ने हटाई ब्याज दरों की सीमा और दी स्वैप सुविधा

स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने एनआरआई और ओसीआई वर्ग से आने वाले नए विदेशी मुद्रा जमा पर मिलने वाले ब्याज दरों की ऊपरी सीमा को आगामी 30 सितंबर तक के लिए पूरी तरह से हटा दिया है, जिससे बैंक अधिक ब्याज देकर निवेशकों को आकर्षित कर सकें। इसके साथ ही, नई और लचीली व्यवस्था के तहत आरबीआई बैंकों को तीन से पांच साल की परिपक्वता अवधि वाले विदेशी मुद्रा जमा के वास्ते रियायती विदेशी मुद्रा स्वैप (FX Swap) सुविधा भी मुहैया करा रहा है, जिससे बैंकों के लिए करेंसी रिस्क को हेज करने की लागत में भारी कमी आएगी।

पीएसयू और सीपीएसई कंपनियों के लिए ईसीबी जुटाने पर जोर

बैठक के दौरान केवल जमा अभियानों पर ही नहीं, बल्कि सरकारी कंपनियों द्वारा विदेशों से कमर्शियल कर्ज जुटाने की प्रक्रिया पर भी विशेष मंथन किया जाएगा। आरबीआई ने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSE) और अन्य सरकारी कंपनियों को 30 सितंबर 2026 तक बाहरी वाणिज्यिक उधार (ECB) के जरिये धन जुटाने के लिए विशेष प्रोत्साहन देने का ऐलान किया है। आमतौर पर ये सरकारी उपक्रम ईसीबी के माध्यम से सालाना लगभग $10-12 अरब डॉलर की विदेशी पूंजी देश में लेकर आते हैं, और इस पूरी मुहिम का मकसद देश के विदेशी मुद्रा ढांचे को और अधिक सुदृढ़ करना है।

 

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