उत्तर प्रदेश

शिक्षकों के लिए संजीवनी बनी मुख्यमंत्री कैशलेस चिकित्सा योजना! मुफ्त इलाज का बड़ा तोहफा

उत्तर प्रदेश के सरकारी शिक्षकों और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आ रही है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री कैशलेस चिकित्सा योजना इन दिनों प्रदेश के माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के लिए वरदान साबित हो रही है। गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए अब शिक्षकों को अपनी जमा-पूंजी खर्च करने या कर्ज लेने की कतई जरूरत नहीं पड़ रही है। इस योजना की सबसे बड़ी सफलता यह है कि महज बीते 10 दिनों के भीतर ही प्रदेश के 142 से अधिक शिक्षकों और उनके आश्रितों को इसका सीधा लाभ मिल चुका है।

बिना जेब ढीली किए मिल रहा है वर्ल्ड क्लास इलाज

पहले के समय में चिकित्सा प्रतिपूर्ति (Medical Reimbursement) के लिए शिक्षकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे और महीनों तक उनका पैसा फंसा रहता था। लेकिन इस नई व्यवस्था ने पूरी तस्वीर को बदल कर रख दिया है। अब स्टेट हेल्थ कार्ड के जरिए शिक्षक और उनके परिवार के सदस्य सूचीबद्ध (Empanelled) निजी और सरकारी अस्पतालों में जाकर सीधे अपना इलाज करवा रहे हैं। अस्पताल में भर्ती होने से लेकर डिस्चार्ज होने तक मरीज के परिजनों को एक भी रुपया कैश काउंटर पर जमा नहीं करना पड़ रहा है, जिससे उन्हें मानसिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर बड़ी राहत मिली है।

10 दिनों में 142 से ज्यादा गुरुजनों को मिली नई जिंदगी

विभाग से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 10 दिनों में रिकॉर्ड 142 शिक्षकों और उनके परिवार के सदस्यों ने इस योजना के तहत पूरी तरह कैशलेस इलाज की सुविधा का लाभ उठाया है। इलाज पाने वाले इन शिक्षकों में दिल की बीमारी, किडनी की समस्या, कैंसर और घुटने के रिप्लेसमेंट जैसे बड़े ऑपरेशन शामिल हैं। पश्चिमी यूपी से लेकर पूर्वांचल तक के जिलों में फैले नेटवर्क के कारण स्थानीय स्तर पर ही शिक्षकों को बड़े कॉरपोरेट अस्पतालों में इलाज की सुविधा मिल रही है, जिससे उन्हें दिल्ली या लखनऊ जैसे बड़े शहरों की दौड़ लगाने से भी मुक्ति मिली है।

स्टेट हेल्थ कार्ड से आसान हुई इलाज की राह

इस योजना का लाभ उठाने के लिए शिक्षकों को सिर्फ अपना 'स्टेट हेल्थ कार्ड' अस्पताल के आयुष्मान/कैशलेस काउंटर पर दिखाना होता है। इसके बाद अस्पताल प्रशासन खुद ही विभाग से अप्रूवल लेकर इलाज की प्रक्रिया शुरू कर देता है। माध्यमिक और बेसिक शिक्षा संघों ने भी सरकार के इस कदम की सराहना की है। शिक्षकों का कहना है कि इस योजना के धरातल पर उतरने से विभाग के लाखों कर्मचारियों के सिर से इलाज के भारी-भरकम खर्च का डर हमेशा के लिए खत्म हो गया है। सरकार अब इस योजना के दायरे और अस्पतालों की संख्या को और बढ़ाने पर विचार कर रही है ताकि प्रदेश के कोने-कोने में तैनात शिक्षकों को त्वरित इलाज मिल सके।

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