‘हमने जंग जीत ली!’ ईरान पर डोनाल्ड ट्रंप का ‘Mission Accomplished’ दावा; क्या खाड़ी में थम गया टकराव या बाकी है सस्पेंस?

मध्य पूर्व (Middle East) के बेहद संवेदनशील भू-राजनीतिक परिदृश्य में एक बार फिर बड़ा सियासी और कूटनीतिक भूचाल आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य और कूटनीतिक अभियान को लेकर अपनी 'ऐतिहासिक जीत' का दावा ठोक दिया है। उन्होंने साल 2003 के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के मशहूर अंदाज में ईरान के संदर्भ में 'Mission Accomplished' (मिशन पूरा हुआ) का नारा बुलंद करते हुए कहा कि अमेरिका ने अपने तमाम रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल कर लिया है और विपक्षी ताकतों की आक्रामकता को पूरी तरह पस्त कर दिया है। हालांकि, ट्रंप के इस आक्रामक दावे के बीच रणनीतिक विश्लेषकों और खाड़ी क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि जमीन पर हालात इतने सीधे नहीं हैं और संघर्ष के कई पहलू अभी भी अनसुलझे हैं।
ट्रंप का जीत का दावा: क्या है व्हाइट हाउस और ट्रुथ सोशल का रुख?
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि ईरान की परमाणु और मिसाइल क्षमताओं के विस्तार को रोकने, क्षेत्रीय प्रॉक्सी नेटवर्क की कमर तोड़ने और अमेरिकी सैन्य प्रभुत्व को स्थापित करने में उनके प्रशासन ने अप्रत्याशित सफलता हासिल की है। ट्रंप ने दावा किया कि उनके कड़े आर्थिक प्रतिबंधों, नौसैनिक दबाव और रणनीतिक हमलों ने तेहरान को भारी दबाव में ला दिया है।
राष्ट्रपति के मुताबिक, अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र और ऊर्जा आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा को बहाल किया है। उन्होंने अपनी चिर-परिचित शैली में दावा किया कि जो काम दशकों से अटके थे, उन्हें उनके कड़े फैसलों ने कुछ ही समय में निर्णायक अंजाम तक पहुंचा दिया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और जमीनी हकीकत का टकराव
भले ही वाशिंगटन से जीत के बड़े दावे किए जा रहे हों, लेकिन रणनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग यानी होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव की लपटें अभी पूरी तरह शांत नहीं हुई हैं।
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दुनिया भर के लगभग 20% कच्चे तेल के व्यापार का यह मुख्य गलियारा लगातार तनाव, नौसैनिक गश्त, माइन-स्वीपिंग ऑपरेशन्स और सुरक्षा चेतावनियों के घेरे में बना हुआ है।
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तेहरान ने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए जलमार्ग पर अपने कानूनी और भौगोलिक अधिकारों की बात दोहराई है और अमेरिकी नौसैनिक उपस्थिति को क्षेत्रीय अशांति का मुख्य कारण बताया है।
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वैश्विक शिपिंग और ऑयल टैंकर कंपनियां अभी भी इस रूट पर हाई-अलर्ट और ऊंचे इंश्योरेंस प्रीमियम के जोखिम के बीच आवागमन कर रही हैं, जिससे पूर्ण शांति के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जॉर्ज बुश के 2003 वाले 'मिशन एकॉम्प्लिश्ड' की ताजा हुई यादें
ट्रंप के इस बयान ने राजनीतिक हलकों में 1 मई 2003 की उस ऐतिहासिक घटना की यादें ताजा कर दी हैं, जब इराक युद्ध की शुरुआत के कुछ ही हफ्तों बाद तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश ने एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन पर 'मिशन एकॉम्प्लिश्ड' के बड़े बैनर तले भाषण दिया था। बाद के वर्षों में इराक में लंबा गृहयुद्ध और अस्थिरता छिड़ गई थी, जिसके चलते वह बैनर अमेरिकी कूटनीति के लिए एक तीखा सबक बन गया था।
राजनीतिक आलोचक ट्रंप के इस नए ऐलान को आगामी घरेलू चुनावों और अमेरिकी मतदाताओं के बीच 'मजबूत कमांडर-इन-चीफ' की छवि चमकाने की कवायद के रूप में देख रहे हैं, जबकि सैन्य जानकारों का मानना है कि अशांत पश्चिम एशिया में किसी भी एकतरफा जीत की घोषणा समय से पहले की गई जल्दबाजी साबित हो सकती है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार और कूटनीति पर क्या होगा असर?
इस घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल (Brent Crude) और कमोडिटी बाजारों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखी जा रही है। बाजार को यह उम्मीद है कि दोनों पक्षों के बीच सीधे टकराव की आशंका कम हो सकती है, लेकिन जब तक औपचारिक शांति समझौता या प्रतिबंधों में ठोस कूटनीतिक राहत नहीं मिलती, तब तक तेल सप्लाई चेन में अनिश्चितता का साया बरकरार रहेगा। मध्यस्थ देशों (जैसे ओमान और कतर) के जरिए कूटनीतिक वार्ताओं की कोशिशें जारी हैं, ताकि इस बयानबाजी को जमीनी स्तर पर एक स्थायी युद्धविराम में बदला जा सके।