4 मैचों में लुटाए 879 रन… फिर भी गेंदबाजों के समर्थन में उतरे कोच मोर्ने मोर्केल, दिया बड़ा बयान

क्रिकेट के सबसे छोटे प्रारूप यानी टी20 क्रिकेट में इन दिनों बल्लेबाजों का ऐसा खौफनाक तांडव देखने को मिल रहा है, जहां गेंदबाजों के लिए मैदान पर अपनी इज्जत बचाना भी मुश्किल होता जा रहा है। भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेली जा रही रोमांचक पांच मैचों की टी20 सीरीज इसका सबसे जीवंत उदाहरण बन चुकी है। इस सीरीज में गेंदबाजों की जमकर कुटाई हुई है और शुरुआती चार मैचों में ही भारतीय गेंदबाजों ने कुल मिलाकर 879 रन लुटा दिए हैं। सोशल मीडिया से लेकर क्रिकेट विशेषज्ञों के बीच गेंदबाजों के इस खराब प्रदर्शन की आलोचना हो रही है, लेकिन इस सबके बीच टीम इंडिया के गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्केल (Morne Morkel) अपने गेंदबाजों के ढाल बनकर सामने आए हैं। उन्होंने खिलाड़ियों का खुलकर समर्थन किया है और उनके बचाव में एक बहुत बड़ा बयान दिया है।
चार टी20 मुकाबलों में गेंदबाजों की खराब स्थिति और रन वर्षा
भारत और वेस्टइंडीज के बीच चल रही यह मौजूदा टी20 सीरीज गेंदबाजों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रही है। पिचें पूरी तरह से सपाट और बल्लेबाजों के अनुकूल हैं, जिसका फायदा उठाते हुए कैरेबियाई बल्लेबाजों ने मैदान के चारों तरफ चौकों-छक्कों की बारिश कर दी है। हालात यह रहे हैं कि रांची में खेले गए एक मुकाबले में तो भारतीय गेंदबाज 250 रनों के विशाल लक्ष्य का बचाव करने में भी नाकाम रहे थे, जहां वेस्टइंडीज ने महज 18.3 ओवरों में ही उस टारगेट को हासिल कर इतिहास रच दिया था।
सीरीज के अभी तक खेले गए चार मुकाबलों में ही भारतीय गेंदबाजी आक्रमण पूरी तरह बेबस नजर आया है और वे 800 से अधिक रन लुटा चुके हैं। इस भारी-भरकम स्कोर और गेंदबाजों की असफलता को लेकर फैंस और मीडिया में लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। हर कोई यह जानना चाहता है कि दुनिया के बेहतरीन गेंदबाज माने जाने वाले ये खिलाड़ी इस तरह आसानी से रन क्यों खा रहे हैं।
बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेला जाएगा सीरीज का फाइनल मुकाबला
भारत और वेस्टइंडीज के बीच इस रोमांचक संघर्ष का पांचवां और अंतिम मुकाबला शनिवार, 17 अक्टूबर को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू के प्रसिद्ध एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम (M. Chinnaswamy Stadium) में खेला जा रहा है। यह मुकाबला दोनों टीमों के लिए किसी वर्चुअल फाइनल से कम नहीं है, क्योंकि जो भी टीम आज का मैच जीतेगी, सीरीज पर उसका कब्जा हो जाएगा।
बेंगलुरु का यह मैदान अपनी छोटी बाउंड्री और रनों की सुनामी के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। ऐसे में मैच से ठीक पहले गेंदबाजी कोच का यह बयान टीम के अंदर सकारात्मक ऊर्जा भरने का काम कर सकता है। कोच मोर्ने मोर्केल ने मैच से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में बात करते हुए साफ किया कि मैदान पर उतरने वाले खिलाड़ी मशीन नहीं बल्कि इंसान हैं और उनसे हर मैच में करिश्माई या मैच जिताऊ प्रदर्शन की उम्मीद करना पूरी तरह से गलत है।
लगातार व्यस्त इंटरनेशनल शेड्यूल और मानसिक थकान पर मोर्ने मोर्केल की दो टूक
भारतीय टीम के गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्केल ने खिलाड़ियों के खराब प्रदर्शन के पीछे के असली कारणों का खुलासा करते हुए उनके मानसिक स्वास्थ्य और भारी-भरकम शेड्यूल (Busy Schedule) का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि लगातार क्रिकेट खेलने की वजह से खिलाड़ियों पर जो मानसिक दबाव बनता है, उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मोर्ने मोर्केल ने मीडिया से बातचीत में बेबाक अंदाज में कहा, "मैं सोशल मीडिया पर लिखी जाने वाली तमाम बातें और आलोचनाएं पढ़ता हूं। लेकिन हम अक्सर एक बहुत महत्वपूर्ण पहलू भूल जाते हैं, जिसे 'मानसिक थकान' (Mental Fatigue) कहते हैं। हमें इसे बहुत बारीकी से मैनेज करना होता है।"
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि किस तरह खिलाड़ी बिना किसी बड़े आराम के एक टूर्नामेंट से सीधे दूसरे दौरे पर पहुंच जाते हैं। उदाहरण के तौर पर, एशियाई खेलों (Asian Games) के तुरंत बाद कई खिलाड़ी सीधे वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज खेलने के लिए मैदान पर उतर गए। इसके अलावा, व्यस्त यात्रा कार्यक्रमों के चलते उन्हें कई बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए दिल्ली का दौरा करना पड़ा और फिर तुरंत मैच के लिए वापस लौटना पड़ा। इस तरह की लगातार यात्राओं और व्यस्तता से खिलाड़ियों का शरीर और दिमाग दोनों थक जाते हैं।
"मैं अपने गेंदबाजों का बहुत सम्मान करता हूं, उन्हें गलती करने की छूट मिलनी चाहिए"
गेंदबाजों द्वारा चार मैचों में 879 रन लुटाए जाने के बावजूद मोर्ने मोर्केल ने अपने खिलाड़ियों का पक्ष लेते हुए कहा कि वे अपनी टीम के हर गेंदबाज का पूरा सम्मान करते हैं। मौजूदा समय में खिलाड़ियों पर जिस तरह का मानसिक दबाव और देश की उम्मीदों का भारी बोझ रहता है, वह अपने आप में बहुत बड़ा तनाव पैदा करता है।
मोर्केल ने आगे कहा, "भारतीय टीम के इस बेहद व्यस्त और थकान भरे शेड्यूल को देखते हुए हमारे ये खिलाड़ी जिस जज्बे के साथ मैदान पर प्रदर्शन कर रहे हैं, उसके लिए मैं उनका दिल से सम्मान करता हूँ। यही वजह है कि मैं कई बार यह सोचता हूँ कि हमें इन खिलाड़ियों को कभी-कभी गलती करने की छूट देनी चाहिए और उन पर हर वक्त परफेक्ट प्रदर्शन करने का अवास्तविक दबाव नहीं डालना चाहिए। इन लड़कों पर उम्मीदों का बहुत बड़ा बोझ होता है।"
कोच का यह बयान टीम के अंदरूनी माहौल को मजबूत करने और खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। अब देखने यह दिलचस्प होगा कि बेंगलुरु के इस निर्णायक मुकाबले में भारतीय गेंदबाज अपने कोच के इस भरोसे पर कितना खरा उतर पाते हैं और क्या वे कैरेबियाई बल्लेबाजों को रोककर सीरीज अपने नाम करने में सफल होते हैं।