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8th Pay Commission: कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ा दिन! चेन्नई में शुरू हुई दो दिवसीय अहम बैठक; फिटमेंट फैक्टर, वेतन वृद्धि और पेंशन पर ये हैं 5 बड़े अपडेट्स

केंद्रीय कर्मचारियों और लाखों पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों व सेवा शर्तों की समीक्षा के लिए गठित 8वां केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) अब अपने देशव्यापी परामर्श दौर के तहत पूरी तरह एक्शन में आ चुका है। आयोग का दो दिवसीय महत्वपूर्ण दौरा आज, 7 सितंबर 2026 से चेन्नई में औपचारिक रूप से शुरू हो गया है, जो 8 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान आयोग तमिलनाडु क्षेत्र के केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों, रक्षा प्रतिष्ठानों, रेलवे, डाक विभाग और पेंशनर एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों के साथ आमने-सामने बैठकर उनकी मांगों और ज्ञापनों पर विस्तृत चर्चा कर रहा है।

जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले इस आयोग का गठन नवंबर 2025 में किया गया था और इसे 18 महीने के भीतर अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपनी हैं। आयोग ने अपने 10 महीने पूरे कर लिए हैं और अब राज्यों में क्षेत्रीय स्तर पर स्टेकहोल्डर्स की राय जुटाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। दिल्ली, लद्दाख, उत्तर प्रदेश (लखनऊ), पश्चिम बंगाल (कोलकाता), ओडिशा (भुवनेश्वर) और हाल ही में जयपुर के सफल दौरों के बाद चेन्नई की इस बैठक को दक्षिण भारत के कर्मचारियों के लिहाज से काफी निर्णायक माना जा रहा है।

8वें वेतन आयोग की चेन्नई बैठक से जुड़े 5 बड़े अपडेट्स

चेन्नई परामर्श और आयोग के ताजा घटनाक्रमों के बीच 5 प्रमुख बिंदु सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में हैं:

  • अपडेट 1: फिटमेंट फैक्टर पर यूनियनों का दबाव: कर्मचारी यूनियनों ने 2.86x से लेकर 3.83x तक के फिटमेंट फैक्टर की जोरदार मांग रखी है। वहीं, वित्तीय जानकारों का अनुमान है कि सरकार 2.15x से 2.57x के बीच के फॉर्मूले पर विचार कर सकती है, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी 35,000 से 46,000 रुपये के दायरे में पहुंच सकती है। हालांकि, आयोग ने साफ किया है कि जब तक सभी राज्यों का परामर्श पूरा नहीं होता, आधिकारिक फिटमेंट फैक्टर पर कोई अंतिम घोषणा नहीं होगी।

  • अपडेट 2: वार्षिक इंक्रीमेंट दर 3% से बढ़ाकर 5% से 7% करने की मांग: चेन्नई बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दा वार्षिक वेतन वृद्धि (Annual Increment) की दर रहा। कर्मचारी संगठनों (NC-JCM, AINPSEF, AIDEF और FNPO) ने ज्ञापन देकर दलील दी है कि 7वें वेतन आयोग की 3% वार्षिक वृद्धि दर महंगाई के सामने नाकाफी है। यूनियनों ने इसे बढ़ाकर 5% से 7% करने की सिफारिश की है, ताकि निचले स्तर के कर्मचारियों की सैलरी 6 से 7 वर्षों में दोगुनी हो सके।

  • अपडेट 3: पेंशन सुधार और कम्यूटेशन अवधि घटाने का प्रस्ताव: पेंशनर संघों ने मांग रखी है कि पुरानी पेंशन के अनुसार न्यूनतम पेंशन को संशोधित बेसिक पे का 50% किया जाए। साथ ही, पेंशन कम्यूटेशन की बहाली अवधि को मौजूदा 15 वर्ष से घटाकर 11 या 12 वर्ष करने और 65 व 75 वर्ष की उम्र से ही चरणबद्ध अतिरिक्त पेंशन देने का आग्रह किया गया है।

  • अपडेट 4: भत्तों और बोनस सीलिंग में संशोधन: आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए यूनियनों ने प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (PLB) की गणना सीमा को 7,000 रुपये से बढ़ाकर न्यूनतम बेसिक पे या 21,000 रुपये करने का मुद्दा आयोग और सरकार के समक्ष मजबूती से उठाया है। इसके अलावा महानगरों के बढ़ते किराए को देखते हुए एचआरए (HRA) दरों को 40% तक ले जाने का प्रस्ताव भी रखा गया है।

  • अपडेट 5: देशव्यापी दौरों का अगला शेड्यूल जारी: चेन्नई में 7-8 सितंबर की बैठक के तुरंत बाद आयोग 9 सितंबर 2026 को केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में परामर्श करेगा। इसके बाद 16 से 18 सितंबर तक चंडीगढ़ में तीन दिवसीय बैठक होगी और 7-8 अक्टूबर 2026 को आयोग बेंगलुरु का दौरा करेगा।

कर्मचारी यूनियनों और आयोग के बीच संवाद का महत्व

चेन्नई में हो रही इस बैठक में रेलवे तकनीकी पर्यवेक्षक संघ (IRTSA), रक्षा असैन्य कर्मचारी और डाक कर्मचारी महासंघ सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि टियर-1 और तटीय औद्योगिक शहरों में जीवन-यापन की लागत काफी बढ़ चुकी है, इसलिए भत्तों और मकान किराए में क्षेत्रीय वास्तविकताओं को ध्यान में रखकर सिफारिशें की जानी चाहिए।

आयोग इन सभी मांगों को संकलित कर अपनी अंतिम रिपोर्ट का मसौदा तैयार करेगा। केंद्र सरकार के लगभग 50 लाख सेवारत कर्मचारियों और 65 लाख से अधिक पेंशनभोगियों के लिए यह प्रक्रिया बेहद अहम है, क्योंकि इन्हीं सिफारिशों के आधार पर 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होने वाले नए वेतन ढांचे की रूपरेखा तय होगी।

8th CPC आगामी परामर्श निर्धारित तारीखें
चेन्नई (तमिलनाडु) 07 और 08 सितंबर 2026
पुडुचेरी 09 सितंबर 2026
चंडीगढ़ 16 से 18 सितंबर 2026
बेंगलुरु (कर्नाटक) 07 और 08 अक्टूबर 2026
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