Swaminarayan Jayanti 2026 : कौन हैं नीलकंठ वर्णी? दिल्ली अक्षरधाम में 108 फीट ऊंची प्रतिमा का हुआ अनावरण

News India Live, Digital Desk: आज देशभर में स्वामीनारायण जयंती का जन्मोत्सव बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इसी पावन अवसर पर देश की राजधानी दिल्ली स्थित सुप्रसिद्ध स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ा है। मंदिर परिसर में भगवान स्वामीनारायण के किशोर स्वरूप ‘नीलकंठ वर्णी’ की 108 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा की गई है। पचधातु से बनी यह विशाल ‘तपोमूर्ति’ न केवल इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना है, बल्कि यह करोड़ों भक्तों की आस्था का नया केंद्र बन गई है। 27 मार्च 2026 को रामनवमी के साथ पड़ने वाली यह जयंती इस बार अक्षरधाम के इस नए आकर्षण के कारण और भी विशेष हो गई है।नीलकंठ वर्णी: 11 साल की उम्र में घर छोड़कर की 12,000 किमी की यात्राभगवान स्वामीनारायण का जन्म उत्तर प्रदेश के छपिया में हुआ था, लेकिन महज 11 साल की अल्पायु में उन्होंने गृहत्याग कर दिया और ‘नीलकंठ वर्णी’ के नाम से सात वर्षों तक पूरे भारत की पदयात्रा की। उन्होंने नंगे पैर हिमालय की बर्फीली चोटियों से लेकर कन्याकुमारी के तटों तक लगभग 12,000 किलोमीटर का सफर तय किया। अक्षरधाम में स्थापित यह प्रतिमा उनके उसी तपस्वी स्वरूप को दर्शाती है, जिसमें वे एक पैर पर खड़े होकर गहन साधना कर रहे हैं। यह स्वरूप युवाओं के लिए दृढ़ संकल्प और आत्म-अनुशासन की प्रेरणा देता है।अक्षरधाम की ‘तपोमूर्ति’ क्यों है इतनी खास?दिल्ली के आसमान को छूती यह 108 फीट की प्रतिमा दुनिया की सबसे ऊंची ‘तपोमूर्ति’ मानी जा रही है। इसे बनाने में करीब 50 कुशल कारीगरों और संतों ने एक साल तक दिन-रात मेहनत की है। प्रतिमा में नीलकंठ वर्णी को ‘मुक्तिनाथ’ (नेपाल) की कठिन परिस्थितियों में योग मुद्रा में दिखाया गया है। अक्षरधाम फ्लाईओवर से गुजरने वाले राहगीरों को अब दूर से ही भगवान के इस ओजस्वी स्वरूप के दर्शन हो सकेंगे। मंदिर प्रशासन के अनुसार, इस मूर्ति की स्थापना का उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को त्याग और सेवा के मार्ग से जोड़ना है।स्वामीनारायण जयंती और रामनवमी का अद्भुत संयोगयह एक सुखद संयोग है कि चैत्र शुक्ल नवमी के दिन ही भगवान राम और भगवान स्वामीनारायण, दोनों का प्राकट्य हुआ था। आज स्वामीनारायण संप्रदाय के अनुयायी निर्जला उपवास रखकर और विशेष आरती के साथ अपने आराध्य का वंदन कर रहे हैं। अक्षरधाम में हुए इस भव्य प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में विश्वभर से आए संतों और हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। वैदिक मंत्रोच्चार और ‘विश्व शांति महायज्ञ’ के साथ इस महोत्सव का समापन हुआ, जिसने पूरी दिल्ली को भक्तिमय कर दिया है।