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भारत में फंसी ईरान की संजीवनी 40 टन दवाओं की खेप लेकर उड़ने वाला था विमान, अमेरिकी हमले ने बिगाड़ा खेल

News India Live, Digital Desk: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच एक बड़ी मानवीय त्रासदी की खबर सामने आ रही है। ईरान ने अपने देश में मरीजों की जान बचाने के लिए चंदे और दान के माध्यम से 40 टन जरूरी दवाएं जुटाई थीं, लेकिन यह भारी-भरकम खेप अब भारत में ही फंस गई है। वजह कोई कूटनीतिक अड़चन नहीं, बल्कि एक हवाई हमला है। दरअसल, जिस विमान से इन दवाओं को ईरान ले जाया जाना था, वह हाल ही में हुए अमेरिकी हवाई हमले (US Airstrike) में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे दवाओं की सप्लाई चेन पूरी तरह ठप हो गई है।40 टन दवाओं का स्टॉक, भारत से ईरान पहुंचने का था इंतजारईरान इस समय गंभीर दवा संकट और युद्ध जैसी स्थितियों से जूझ रहा है। वहां की सरकार और नागरिक समूहों ने मिलकर करीब 40 टन दवाओं का स्टॉक इकट्ठा किया था। इन दवाओं की खरीदारी और संकलन में भारत की भी अहम भूमिका रही है। दवाओं की यह खेप पूरी तरह तैयार थी और इसे विशेष विमान के जरिए तेहरान पहुंचाया जाना था। लेकिन, अंतिम समय पर विमान के उपलब्ध न होने और तकनीकी खराबी (हमले के कारण) ने इस पूरे मिशन पर पानी फेर दिया है।अमेरिकी एयरस्ट्राइक ने उड़ान पर लगाया ‘ब्रेक’सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने जिस विमान को इन दवाओं को ले जाने के लिए तैनात किया था, वह अमेरिकी सेना द्वारा किए गए हालिया हवाई हमले की चपेट में आ गया। विमान के क्षतिग्रस्त होने के कारण अब कोई भी वैकल्पिक व्यवस्था तुरंत संभव नहीं हो पा रही है। चूंकि यह दवाएं ‘लाइफ-सेविंग’ कैटेगरी की हैं, इसलिए इन्हें एक निश्चित तापमान और विशेष परिस्थितियों में ही ले जाया जा सकता है। विमान की अनुपलब्धता ने ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि वहां अस्पतालों में इन दवाओं का इंतजार कर रहे हजारों मरीजों की जान जोखिम में है।भारत में फंसी खेप: लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा की चुनौतीवर्तमान में यह 40 टन दवाओं का स्टॉक भारत के एक सुरक्षित लॉजिस्टिक सेंटर में रखा गया है। जानकारों का कहना है कि ईरान अब दूसरे विमान की व्यवस्था करने में जुटा है, लेकिन युद्धग्रस्त क्षेत्र में उड़ानों पर लगे प्रतिबंध और सुरक्षा जोखिमों के कारण कोई भी कंपनी फिलहाल इस रूट पर उड़ान भरने को तैयार नहीं है। इसके साथ ही, अमेरिकी प्रतिबंधों के साये में इन दवाओं के ट्रांजेक्शन और शिपिंग को लेकर भी कई तकनीकी पेच फंसे हुए हैं।शांतिदूत बनने की कोशिश में चीन, बढ़ रही है रूस-ईरान की नजदीकीएक ओर जहां मानवीय सहायता रुकी हुई है, वहीं दूसरी ओर चीन इस संकट का फायदा उठाकर मध्य पूर्व में ‘शांतिदूत’ बनने की कोशिश कर रहा है। ईरान और अफगानिस्तान के बीच के विवादों को सुलझाने के पीछे चीन की बड़ी रणनीति मानी जा रही है। भारत के लिए भी यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि दवाओं का यह स्टॉक मानवीय आधार पर जल्द से जल्द अपनी मंजिल तक पहुंचना जरूरी है। अब देखना यह होगा कि ईरान इस ‘लॉजिस्टिक्स संकट’ से उबरने के लिए किस अंतरराष्ट्रीय शक्ति की मदद लेता है।

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