धर्म

Budh Pradosh Vrat 2026 : अप्रैल का पहला प्रदोष व्रत कब? जानें शिव पूजा का सबसे सटीक मुहूर्त और जरूरी नियम

News India Live, Digital Desk: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है, जो भगवान शिव की कृपा पाने का सबसे उत्तम दिन माना जाता है। अप्रैल 2026 का पहला प्रदोष व्रत ‘बुध प्रदोष’ के रूप में मनाया जाएगा, क्योंकि यह बुधवार के दिन पड़ रहा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, बुध प्रदोष का व्रत रखने से न केवल शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, बल्कि संतान प्राप्ति और बौद्धिक क्षमता में वृद्धि के योग भी बनते हैं। शिव भक्त इस दिन प्रदोष काल में महादेव और माता पार्वती की विशेष आराधना करते हैं।तिथि और शुभ मुहूर्त: कब रखा जाएगा व्रत?पंचांग गणना के अनुसार, वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ 14 अप्रैल 2026, मंगलवार को रात 09:12 बजे से होगा और इसका समापन 15 अप्रैल 2026, बुधवार को रात 08:45 बजे होगा। चूंकि प्रदोष व्रत की पूजा सूर्यास्त के समय यानी प्रदोष काल में की जाती है, इसलिए उदयातिथि के अनुसार बुध प्रदोष व्रत 15 अप्रैल 2026, बुधवार को ही रखा जाएगा।पूजा का सबसे उत्तम समय (Shubh Muhurat)प्रदोष काल वह समय होता है जब सूर्यास्त के बाद और रात्रि के आगमन से पहले महादेव साक्षात शिवलिंग में वास करते हैं। 15 अप्रैल को पूजा का शुभ मुहूर्त इस प्रकार है:प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: शाम 06:45 बजे से रात 09:02 बजे तक।अमृत काल: सुबह 11:20 बजे से दोपहर 12:55 बजे तक।ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:22 बजे से सुबह 05:08 बजे तक।बुध प्रदोष व्रत की सरल पूजा विधिइस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र (हरे या सफेद रंग के) धारण करें और व्रत का संकल्प लें। पूरे दिन निराहार या फलाहार रहकर शिव नाम का जाप करें। शाम को सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले दोबारा स्नान करें और शिव मंदिर या घर के मंदिर में भगवान शिव का गंगाजल और दूध से अभिषेक करें। बेलपत्र, धतूरा, शमी के पत्ते और सफेद चंदन अर्पित करें। अंत में बुध प्रदोष व्रत की कथा सुनें और घी के दीपक से आरती करें।भूलकर भी न करें ये गलतियां: बरतें सावधानीप्रदोष व्रत के दौरान कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना अनिवार्य है। पूजा में कभी भी केतकी के फूल या तुलसी के पत्तों का प्रयोग न करें, क्योंकि ये महादेव को अप्रिय हैं। इसके अलावा, शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय तांबे के लोटे का उपयोग करें, लेकिन दूध चढ़ाने के लिए स्टील या चांदी के पात्र का ही प्रयोग करें। व्रत के दौरान तामसिक भोजन (लहसुन, प्याज) और किसी के प्रति द्वेष भावना रखने से व्रत का फल निष्फल हो जाता है।

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