Election Commission : कौन हैं IAS अनुराग यादव? चुनाव आयोग की मीटिंग में क्यों छिड़ गई CEC से तीखी बहस, जानें पूरा मामला

News India Live, Digital Desk: देश में चुनावी सुगबुगाहट के बीच प्रशासनिक गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। आमतौर पर शांत रहने वाली चुनाव आयोग की बैठकों में उस वक्त सन्नाटा पसर गया, जब एक सीनियर IAS अधिकारी और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के बीच तीखी बहस हो गई। यह वाकया सोशल मीडिया से लेकर सत्ता के गलियारों तक चर्चा का विषय बना हुआ है। आखिर कौन हैं अनुराग यादव और ऐसा क्या हुआ कि उन्होंने सीधे चुनाव आयोग के प्रमुख से ही लोहा ले लिया?मीटिंग में अचानक कैसे बिगड़ा माहौल?दरअसल, चुनाव आयोग आगामी चुनावों की तैयारियों को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर रहा था। बैठक का मुख्य उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को सुचारू बनाना और सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लेना था। इसी दौरान उत्तर प्रदेश कैडर के IAS अधिकारी अनुराग यादव ने कुछ प्रशासनिक मुद्दों और फील्ड ड्यूटी की चुनौतियों पर अपनी बात रखी। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो चर्चा के दौरान किसी बात पर सहमति नहीं बन पाई और देखते ही देखते बहस का लहजा कड़ा हो गया।अनुराग यादव: एक बेबाक प्रशासनिक छविIAS अनुराग यादव 2000 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के अधिकारी हैं। प्रशासनिक हलकों में उन्हें एक ऐसे अधिकारी के रूप में जाना जाता है जो अपनी बात को बेबाकी और तथ्यों के साथ रखने के लिए मशहूर हैं। वह वर्तमान में सचिव स्तर पर कार्यरत हैं और इससे पहले भी कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इस घटना के बाद से ही लोग उनके करियर ग्राफ और पुराने रिकॉर्ड्स को खंगाल रहे हैं कि आखिर एक आईएएस अधिकारी ने संवैधानिक संस्था के प्रमुख के सामने अपना पक्ष इतनी सख्ती से कैसे रखा।मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ किस बात पर हुआ विवाद?सूत्रों के अनुसार, विवाद की मुख्य जड़ चुनाव ड्यूटी के दौरान अधिकारियों की तैनाती और स्थानीय स्तर पर आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को लेकर थी। जब CEC ज्ञानेश कुमार ने कुछ कड़े निर्देश दिए, तो अनुराग यादव ने धरातल की सच्चाई का हवाला देते हुए उन पर असहमति जताई। बहस इतनी बढ़ गई कि बैठक में मौजूद अन्य अधिकारी भी हैरान रह गए। हालांकि, इस पूरे मामले पर अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई लिखित बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन यह घटना प्रशासनिक अनुशासन और अभिव्यक्ति की आजादी के बीच एक नई बहस को जन्म दे रही है।