कच्चे तेल में लगी आग तो होगा बड़ा धमाका $120 के पार जाते ही औंधे मुंह गिरेंगे सोना-चांदी, जानें क्या है असली वजह

News India Live, Digital Desk : वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है और इस बीच कमोडिटी मार्केट से एक ऐसी खबर आ रही है जो निवेशकों के होश उड़ा सकती है। अगर आप भी सोने और चांदी में निवेश करने की सोच रहे हैं या पहले से निवेश कर चुके हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आने वाला उछाल सराफा बाजार (Bullion Market) के लिए ‘खतरे की घंटी’ साबित हो सकता है।कच्चे तेल और सोने का क्या है खतरनाक कनेक्शन?आमतौर पर माना जाता है कि महंगाई बढ़ने पर सोने की चमक बढ़ती है, लेकिन इस बार समीकरण कुछ अलग नजर आ रहे हैं। अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें $120 प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर जाती हैं, तो इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, तेल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी से दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव बढ़ेगा। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो निवेशक सोने जैसे ‘नॉन-यील्डिंग एसेट’ से पैसा निकालकर बॉन्ड और डॉलर में लगाने लगते हैं, जिससे सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट (Crash) देखने को मिल सकती है।डॉलर की मजबूती बढ़ाएगी निवेशकों की टेंशनक्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी का सीधा मतलब है अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का व्यापार डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर के मजबूत होते ही अन्य मुद्राओं वाले देशों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है। इससे मांग में कमी आती है और कीमतें नीचे की ओर फिसलने लगती हैं। बाजार के जानकारों का कहना है कि $120 का स्तर एक ऐसा ‘ब्रेकिंग पॉइंट’ है, जहां से लिक्विडिटी का संकट खड़ा हो सकता है और निवेशक मार्जिन कॉल को पूरा करने के लिए अपने कीमती धातुओं के होल्डिंग्स को बेच सकते हैं।चांदी पर भी मंडरा रहे हैं काले बादलसोने के साथ-साथ चांदी की सेहत पर भी इसका बुरा असर पड़ने की संभावना है। चांदी का उपयोग केवल गहनों में ही नहीं, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र (Industrial Sector) में भी बड़े पैमाने पर होता है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें परिवहन और विनिर्माण लागत को बढ़ा देती हैं, जिससे औद्योगिक मांग सुस्त पड़ सकती है। यही वजह है कि अगर तेल की कीमतों में उबाल आया, तो चांदी की चमक सोने के मुकाबले ज्यादा फीकी पड़ सकती है।निवेशकों के लिए क्या है विशेषज्ञों की सलाह?फिलहाल बाजार में अनिश्चितता का माहौल है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस समय एकमुश्त निवेश करने के बजाय ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपनाना बेहतर होगा। यदि आप खरीदारी करना ही चाहते हैं, तो गिरावट आने पर धीरे-धीरे पोर्टफोलियो में सोने को शामिल करें। कच्चे तेल की हर चाल पर पैनी नजर रखना इस समय समझदारी होगी, क्योंकि $120 का आंकड़ा सराफा बाजार के लिए बड़े ‘क्रैश’ का ट्रेलर साबित हो सकता है।