उत्तर प्रदेश

धनंजय सिंह पर हमले के मामले में बड़ी खबर, वाराणसी कोर्ट ने विधायक अभय सिंह और MLC विनीत सिंह को किया बरी

News India Live, Digital Desk : उत्तर प्रदेश की राजनीति और बाहुबल के गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आई है। वाराणसी की एक अदालत ने पूर्व सांसद धनंजय सिंह (Dhananjay Singh) पर जानलेवा हमले के 22 साल पुराने हाई-प्रोफाइल मामले में अपना फैसला सुना दिया है। अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में अयोध्या के गोशाईगंज से सपा विधायक अभय सिंह (Abhay Singh) और एमएलसी विनीत सिंह (Vineet Singh) समेत सभी आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया है।क्या था पूरा मामला?यह मामला साल 2002 का है, जब पूर्वांचल में वर्चस्व की जंग चरम पर थी। धनंजय सिंह अपने साथियों के साथ जौनपुर से वाराणसी की ओर जा रहे थे। वाराणसी के नदेसर इलाके में उनकी गाड़ी पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई थी। इस हमले में धनंजय सिंह बाल-बाल बच गए थे, लेकिन उनके सुरक्षाकर्मी और साथी घायल हुए थे। धनंजय सिंह ने इस हमले का आरोप अपने धुर विरोधी अभय सिंह और विनीत सिंह पर लगाया था।अदालत का फैसला: गवाहों के मुकरने और सबूतों की कमी का लाभवाराणसी की एमपी-एमएलए कोर्ट (MP-MLA Court) में इस मामले की सुनवाई लंबे समय से चल रही थी। सुनवाई के दौरान कई अहम मोड़ आए:गवाहों का रुख: अभियोजन पक्ष के कई महत्वपूर्ण गवाह समय के साथ अपने बयानों से मुकर गए।साक्ष्यों की कमी: अदालत ने पाया कि पुलिस और अभियोजन पक्ष ऐसे पुख्ता सबूत पेश करने में नाकाम रहे जो सीधे तौर पर इन नेताओं को हमले से जोड़ सकें।बरी हुए अन्य लोग: अभय सिंह और विनीत सिंह के अलावा इस केस में नामजद अन्य सहयोगियों को भी दोषमुक्त करार दिया गया है।राजनीतिक गलियारों में हलचलइस फैसले के बाद अभय सिंह और विनीत सिंह के समर्थकों में खुशी की लहर है। अभय सिंह ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और अंततः सत्य की जीत हुई है। बता दें कि अभय सिंह और धनंजय सिंह के बीच की अदावत दशकों पुरानी है, जो लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र संघ की राजनीति से शुरू हुई थी।धनंजय सिंह के लिए एक और झटका?एक ओर जहां धनंजय सिंह के विरोधियों को अदालत से राहत मिली है, वहीं धनंजय सिंह खुद वर्तमान में कानूनी पेचीदगियों का सामना कर रहे हैं। हाल ही में एक अन्य मामले में सजा सुनाए जाने के कारण उन्हें जेल जाना पड़ा था, जिसके चलते वे 2024 के लोकसभा चुनाव की दौड़ से बाहर हो गए थे। अब इस पुराने मामले में आरोपियों के बरी होने को उनके लिए एक कानूनी झटके के रूप में देखा जा रहा है।

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