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पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका असम FIR रद्द करने से इनकार, अब चलेगा आपराधिक मुकदमा

News India Live, Digital Desk: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मीडिया विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने असम में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) को रद्द करने से साफ इनकार कर दिया है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा द्वारा दर्ज कराया गया था। अदालत के इस फैसले के बाद अब खेड़ा के खिलाफ आपराधिक धाराओं के तहत कानूनी कार्यवाही का रास्ता साफ हो गया है।सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से किया मनान्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति पीबी वराले की पीठ ने पवन खेड़ा की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने असम पुलिस द्वारा दर्ज मामले को खारिज करने की मांग की थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहती और खेड़ा को निचली अदालत में अपनी बात रखने की छूट दी है। बता दें कि खेड़ा पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज है।क्या है पूरा मामला?यह विवाद तब शुरू हुआ था जब पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम का कथित तौर पर मजाक उड़ाया था। इसके बाद असम और उत्तर प्रदेश में उनके खिलाफ कई शिकायतें दर्ज हुईं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा ने भी उन पर मानहानि और अन्य आपराधिक आरोपों में मामला दर्ज कराया था। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में दर्ज अलग-अलग एफआईआर को क्लब करके असम ट्रांसफर करने का आदेश दिया था।बीएनएस की धाराओं के तहत शुरू होगी कार्यवाहीसुप्रीम कोर्ट के इस ताजा रुख के बाद अब असम पुलिस मामले में चार्जशीट दाखिल करने और कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए स्वतंत्र है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद खेड़ा को अब असम की संबंधित अदालत में पेश होना पड़ सकता है और नियमित जमानत के लिए आवेदन करना होगा।कांग्रेस और भाजपा के बीच तेज हुई सियासी जंगसुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। असम भाजपा ने इसे कानून की जीत बताया है, वहीं कांग्रेस ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला करार दिया है। गौरतलब है कि पवन खेड़ा को पिछले साल इस मामले में दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान से उतारकर गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद उन्हें अंतरिम जमानत मिल गई थी। अब उन पर नियमित मुकदमा चलाने की तैयारी है।

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