सरहद पर ब्लैकआउट से मचा हड़कंप पंजाब J&K में आधी रात सेना का महाअभ्यास, ऑपरेशन सिंदूर की याद दिलाकर पाक को दी चेतावनी

News India Live, Digital Desk: पंजाब और जम्मू-कश्मीर से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बीती रात उस वक्त हड़कंप मच गया जब अचानक कई इलाकों में ‘ब्लैकआउट’ कर दिया गया। यह कोई बिजली की कटौती नहीं, बल्कि भारतीय सेना और सुरक्षा बलों का एक बड़ा ‘मॉक ड्रिल’ था। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की वर्षगांठ के मौके पर आयोजित इस युद्धाभ्यास का मकसद पाकिस्तान की किसी भी हिमाकत का मुंहतोड़ जवाब देने की अपनी तैयारियों को परखना था। आधी रात को हुए इस शक्ति प्रदर्शन ने सीमा पार बैठे दुश्मनों की नींद उड़ा दी है।जब अचानक अंधेरे में डूबे सरहदी गांव: सुरक्षा का कड़ा घेरासूत्रों के मुताबिक, पंजाब के गुरदासपुर, अमृतसर और जम्मू-कश्मीर के सांबा सेक्टर में सुरक्षा बलों ने गुप्त तरीके से इस ड्रिल को अंजाम दिया। अभ्यास के दौरान सीमावर्ती गांवों की लाइटें बंद करवा दी गईं ताकि घुसपैठ या हवाई हमले की स्थिति में दुश्मन को भ्रमित किया जा सके। इस दौरान आधुनिक राडार, थर्मल इमेजर और नाइट विजन उपकरणों के साथ सेना के जवानों ने मोर्चों पर अपनी पोजीशन ली। इस ‘ब्लैकआउट’ ड्रिल ने यह साबित कर दिया कि भारतीय जांबाज अंधेरे में भी दुश्मन को धूल चटाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।’ऑपरेशन सिंदूर’ की बरसी पर पाकिस्तान को कड़ा संदेशइस ड्रिल का समय बेहद अहम चुना गया है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की यादों को ताजा करते हुए सेना ने यह दिखाया है कि भारतीय सीमाएं अब अभेद्य हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अभ्यास से न केवल जवानों का मनोबल बढ़ता है, बल्कि यह पाकिस्तान के लिए एक सीधा संकेत है कि अगर उसने ड्रोन के जरिए हथियारों की तस्करी या आतंकवाद को बढ़ावा दिया, तो भारत ‘प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक’ (Pre-emptive Strike) करने से पीछे नहीं हटेगा।ड्रोन घुसपैठ और टेरर लॉन्च पैड पर पैनी नजरहाल के दिनों में पंजाब सीमा पर पाकिस्तानी ड्रोनों की बढ़ती आवाजाही ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार की ड्रिल में ‘एंटी-ड्रोन सिस्टम’ का भी परीक्षण किया गया। खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, सीमा पार लॉन्च पैड्स पर आतंकी हलचल तेज हुई है, जिसे देखते हुए सेना ने ‘हाई अलर्ट’ जारी कर दिया है। रात के अंधेरे में किए गए इस अभ्यास में यह देखा गया कि आपात स्थिति में कितनी जल्दी रिस्पॉन्स टीम को सक्रिय किया जा सकता है।स्थानीय प्रशासन और जनता का मिला पूरा सहयोगइस मॉक ड्रिल को सफल बनाने में स्थानीय पुलिस और सिविल प्रशासन ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ब्लैकआउट के दौरान ग्रामीणों को पहले ही सूचित कर दिया गया था ताकि उनमें घबराहट न फैले। नागरिकों ने भी सेना के इस कदम की सराहना की और सुरक्षा प्रयासों में सहयोग दिया। रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि ऐसी ड्रिल भविष्य में भी जारी रहेंगी ताकि सीमा पर जीरो-टोलरेंस की नीति को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।