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सऊदी अरब से तनातनी के बीच UAE ने छोड़ा तेल देशों का संगठन पाकिस्तान की इस चाल ने बिगाड़ा खेल?

News India Live, Digital Desk: वैश्विक अर्थव्यवस्था के सबसे शक्तिशाली संगठन ‘ओपेक’ (OPEC) में एक ऐसा भूचाल आया है, जिसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने सऊदी अरब के साथ गहरे मतभेदों के चलते इस संगठन से बाहर निकलने का मन बना लिया है। तेल की राजनीति में आए इस बड़े मोड़ ने न केवल मिडिल ईस्ट के समीकरण बदल दिए हैं, बल्कि इसमें पाकिस्तान का भी एक ‘एंगल’ सामने आ रहा है। यूएई के इस कड़े कदम से कच्चा तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में खलबली मच गई है।सऊदी और यूएई के बीच वर्चस्व की जंग सालों से ओपेक में सऊदी अरब का दबदबा रहा है, लेकिन अब यूएई अपनी स्वतंत्र तेल नीति बनाना चाहता है। यूएई का मानना है कि सऊदी अरब अपनी मर्जी से तेल उत्पादन की सीमा तय कर रहा है, जिससे यूएई की कमाई पर असर पड़ रहा है। यूएई ने अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने में अरबों डॉलर खर्च किए हैं, और अब वह चाहता है कि उसे ज्यादा तेल बेचने की आजादी मिले। सऊदी अरब के अड़ियल रवैये ने यूएई को संगठन छोड़ने जैसे कड़े कदम की ओर धकेल दिया है।पाकिस्तान की भूमिका और यूएई की नाराजगी इस पूरे विवाद में पाकिस्तान का नाम आना सबको हैरान कर रहा है। रिपोर्ट्स की मानें तो सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकियों और कुछ गुप्त समझौतों ने यूएई को असहज कर दिया है। यूएई को लगता है कि क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक फैसलों में सऊदी अरब अब उसे नजरअंदाज कर रहा है और पाकिस्तान जैसे देशों को तवज्जो दे रहा है। इसी ‘गुस्से’ और ‘अविश्वास’ ने आग में घी का काम किया है, जिससे खाड़ी देशों की दशकों पुरानी एकता दांव पर लग गई है।दुनिया भर में बढ़ सकती हैं तेल की कीमतें अगर यूएई आधिकारिक तौर पर ओपेक से बाहर निकलता है, तो इसका सीधा असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ेगा। ओपेक देशों के बीच एकता टूटने से तेल की सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। यूएई दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों में से एक है और उसका संगठन से बाहर होना ओपेक की ताकत को काफी हद तक कमजोर कर देगा। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए भी यह खबर चिंता का सबब बन सकती है।क्या टूट जाएगा तेल उत्पादक देशों का गठबंधन? राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यूएई का यह कदम एक ‘चेन रिएक्शन’ शुरू कर सकता है। अगर यूएई अपनी शर्तों पर तेल बेचना शुरू करता है, तो संगठन के अन्य छोटे देश भी बगावत कर सकते हैं। सऊदी अरब के लिए यह उसकी लीडरशिप पर सबसे बड़ा प्रहार है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अमेरिका या अन्य पश्चिमी देश इस विवाद को सुलझाने के लिए बीच-बचाव करेंगे या फिर तेल की दुनिया में एक नए युग की शुरुआत होगी।

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