फर्श से अर्श तक! JEE में केमिस्ट्री में मिला था सिर्फ 1 नंबर, फिर अपनी जिद से बने उसी परीक्षा कमेटी के चेयरमैन

जिंदगी में कई बार ऐसे मोड़ आते हैं जब एक असफलता इंसान को पूरी तरह तोड़ देती है। खासकर देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा यानी जेईई (JEE) की तैयारी करने वाले छात्र जब कम अंकों या असफलता से घबरा जाते हैं, तो उनके लिए यह कहानी किसी चमत्कार और संजीवनी से कम नहीं है। शिक्षा और कूटनीति की दुनिया से सफलता की एक ऐसी हैरतअंगेज दास्तां सामने आई है, जहां एक छात्र को कभी इसी कठिन परीक्षा के केमिस्ट्री (रसायन विज्ञान) पेपर में महज 1 अंक मिला था। लेकिन उसने इस हार को अपनी नियति नहीं माना और अपनी अटूट जिद व कड़ी मेहनत के दम पर आगे चलकर उसी परीक्षा का आयोजन करने वाली सर्वोच्च कमेटी के चेयरमैन का पद संभालकर इतिहास रच दिया। जब रिजल्ट देखकर उड़ गए थे होश और मिला था सिर्फ एक अंक इस प्रेरणादायक सफर की शुरुआत बेहद साधारण और संघर्षों से भरी रही। अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद जब इस होनहार छात्र ने आईआईटी में दाखिला पाने के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा (JEE) दी, तो नतीजों ने उन्हें गहरा झटका दिया। फिजिक्स और मैथ्स में अच्छे अंक होने के बावजूद केमिस्ट्री के पेपर ने उनके सारे समीकरण बिगाड़ दिए और उन्हें इस विषय में सिर्फ 1 अंक हासिल हुआ। इस खराब स्कोर के कारण उनका आईआईटी में पढ़ने का सपना उस वक्त पूरी तरह से टूट गया था। आस-पास के लोगों और रिश्तेदारों ने उनके क्रेडिबिलिटी पर सवाल उठाने शुरू कर दिए थे, लेकिन इस असफलता ने उनके भीतर कुछ बड़ा करने की आग को और सुलगने का मौका दे दिया। हार मानने के बजाय कमजोरी को ही बना लिया अपनी सबसे बड़ी ताकत एक आम छात्र जहां ऐसी विफलता के बाद डिप्रेशन में चला जाता या अपना रास्ता बदल लेता, वहीं इस जुझारू युवा ने अपनी कमजोरी का डटकर सामना करने का फैसला किया। उन्होंने केमिस्ट्री विषय से डरने के बजाय उसे ही अपनी ताकत बनाने की ठानी। उन्होंने दिन-रात एक करके बेसिक कॉन्सेप्ट्स को दोबारा पढ़ा, अपनी कमियों को सुधारा और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कदम आगे बढ़ा दिए। केमिस्ट्री में उनकी दिलचस्पी इस कदर बढ़ी कि उन्होंने इसी विषय में महारत हासिल की और देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों से उच्च डिग्रियां और रिसर्च फेलोशिप प्राप्त की। कुछ ही सालों में वे उसी विषय के जाने-माने विशेषज्ञ और प्रोफेसर बनकर उभरे, जिसने कभी उन्हें फेल होने की कगार पर खड़ा किया था। जिस परीक्षा ने कभी रुलाया था, उसी के सर्वोच्च पद पर हुई ताजपोशी समय का चक्र घूमा और इस मेधावी प्रोफेसर की प्रशासनिक क्षमताओं, दूरदर्शिता और शिक्षा के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान को देखते हुए सरकार और शिक्षा मंत्रालय ने उन्हें एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया। उन्हें देश की उसी सर्वोच्च परीक्षा नियामक संस्था और कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया गया, जो हर साल लाखों छात्रों के भाग्य का फैसला करने वाली जेईई (JEE) परीक्षा का संचालन करती है। जो छात्र कभी 1 अंक पाकर निराश खड़ा था, अब वह उस पूरे सिस्टम को सुधारने, पारदर्शी बनाने और परीक्षा के नए मापदंड तय करने वाली सबसे बड़ी कुर्सी पर बैठा था। यह केवल एक पद की प्राप्ति नहीं थी, बल्कि असफलता के मुंह पर थप्पड़ जैसी एक ऐतिहासिक कूटनीतिक जीत थी। आज के युवा और आईआईटी की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए सबसे बड़ा सबक यह जादुई सक्सेस स्टोरी आज देश के उन करोड़ों युवाओं और कोचिंग सेंटरों में पढ़ रहे छात्रों के लिए एक बहुत बड़ा सबक है, जो किसी एक मॉक टेस्ट या मुख्य परीक्षा में कम नंबर आने पर अपनी जिंदगी को खत्म मान लेते हैं। यह कहानी चीख-चीख कर कहती है कि कोई भी सिंगल शीट ऑफ पेपर या एक परीक्षा का रिजल्ट आपका भविष्य तय नहीं कर सकता। असफलताएं केवल आपके प्रयासों में रह गई कमियों को दर्शाती हैं, आपकी काबिलियत को नहीं। अगर आपके भीतर अपनी कमियों को स्वीकार करने का हौसला और उन्हें सुधारने का जज्बा है, तो आज की सबसे बड़ी हार ही कल की आपकी सबसे शानदार और ऐतिहासिक जीत की बुनियाद बनेगी।