धर्म

संतान प्राप्ति की चाहत होगी पूरी! पुरुषोत्तम मास में भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित करें यह एक खास फल

संतान प्राप्ति की चाहत होगी पूरी! पुरुषोत्तम मास में भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित करें यह एक खास फल

हिंदू धर्म और वैदिक ज्योतिष में पुरुषोत्तम मास यानी अधिकमास को बेहद पवित्र और पुण्यदायी माना गया है। यह महीना भगवान श्रीहरि विष्णु और उनके पूर्ण अवतार भगवान श्रीकृष्ण को पूरी तरह समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष महीने में किए गए दान, पुण्य और पूजा-पाठ का फल अन्य महीनों की तुलना में कई गुना अधिक मिलता है। कूटनीतिक और आध्यात्मिक जानकारों का मानना है कि जो विवाहित जोड़े लंबे समय से संतान सुख से वंचित हैं या जिन्हें संतान प्राप्ति में लगातार बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, उनके लिए पुरुषोत्तम मास किसी वरदान से कम नहीं है। इस महीने में की गई श्रीकृष्ण की विशेष आराधना सूनी गोद को खुशियों से भर सकती है।

भगवान श्रीकृष्ण को बेहद प्रिय है यह खास फल, ऐसे करें अर्पित शास्त्रों और पुराणों में संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपतियों के लिए पुरुषोत्तम मास में एक बेहद सरल और अचूक उपाय बताया गया है। इस महीने के दौरान निःसंतान दंपतियों को नियमित रूप से लड्डू गोपाल या भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप की पूजा करनी चाहिए। पूजा के दौरान भगवान कृष्ण को तुलसी दल के साथ 'पुत्रजीवक फल' या विशेष रूप से ताजे और मीठे 'नारियल' और 'केले' का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि देवकी नंदन श्रीकृष्ण को यह खास फल अर्पित करने से कुंडली के सभी पितृ दोष और संतान हीनता के योग पूरी तरह समाप्त हो जाते हैं और घर में जल्द ही किलकारियां गूंज उठती हैं।

निःसंतान दंपतियों के लिए अचूक मंत्र और पूजा की सही विधि इस पावन महीने में सिर्फ फल चढ़ाना ही काफी नहीं है, बल्कि उसके साथ सही विधि-विधान का पालन करना भी बेहद जरूरी है। पति-पत्नी को एक साथ मिलकर ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करने के बाद पीले वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद बाल गोपाल की मूर्ति के सामने घी का दीपक जलाकर संतान गोपाल मंत्र 'ॐ देवकी सुत गोविंद वासुदेव जगत्पते। देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः।' का कम से कम 108 बार जाप करना चाहिए। मंत्र जाप के बाद अर्पित किए गए फल को प्रसाद के रूप में दोनों को ग्रहण करना चाहिए। इस पूरी प्रक्रिया को पूरे भक्ति भाव और अटूट विश्वास के साथ करने से भगवान कृष्ण स्वयं उस दंपति की झोली भर देते हैं।

धार्मिक आस्था और विश्वास से दूर होगी जीवन की हर बाधा पुरुषोत्तम मास में किए जाने वाले इस उपाय को लेकर देश भर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों का भी यही मानना है कि यह समय ब्रह्मांडीय ऊर्जा से भरपूर होता है। इस दौरान किए गए सात्विक प्रयास और प्रार्थनाएं सीधे ईश्वर तक पहुंचती हैं। यदि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी देखें, तो इस पावन काल में पूजा-पाठ करने से मानसिक तनाव दूर होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो संतान उत्पत्ति के लिए शारीरिक रूप से भी बेहद मददगार साबित होता है। इसलिए, अगर आपके मन में भी संतान प्राप्ति की तीव्र इच्छा है, तो इस पुरुषोत्तम मास के सुनहरे मौके को हाथ से न जाने दें और पूरे नियम के साथ कन्हैया की शरण में आ जाएं।

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