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मामूली नहीं है धूप का यह थपेड़ा: डॉक्टर से जानिए आखिर कब ‘लू’ बन जाती है जानलेवा स्थिति, ये गलतियां बिल्कुल न करें

मामूली नहीं है धूप का यह थपेड़ा: डॉक्टर से जानिए आखिर कब 'लू' बन जाती है जानलेवा स्थिति, ये गलतियां बिल्कुल न करें

गर्मियों का मौसम अपने साथ मौसमी बीमारियों की एक लंबी लिस्ट लेकर आता है। इस मौसम में कोई त्वचा की एलर्जी से परेशान रहता है, तो किसी का पाचन तंत्र खराब हो जाता है। लेकिन इन सबमें जो समस्या सबसे ज्यादा देखने को मिलती है और जिसे लोग अक्सर बहुत हल्के में ले लेते हैं, वह है 'लू लगना' यानी हीटस्ट्रोक (Heatstroke)

ज्यादातर लोग सोचते हैं कि लू लगना महज धूप की वजह से होने वाली एक सामान्य सुस्ती या थकान है, जो ग्लूकोज पानी पीने से ठीक हो जाएगी। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, यह धारणा बेहद खतरनाक है। हीटस्ट्रोक वास्तव में एक गंभीर और कई मामलों में जानलेवा बीमारी का रूप ले सकती है। समय पर सही देखभाल न मिलने की स्थिति में यह किसी व्यक्ति की जान तक ले सकती है।

विशेष रूप से छोटे बच्चों, बुजुर्गों, दिल के मरीजों (Heart Patients) और गर्भवती महिलाओं को इसका सबसे ज्यादा खतरा होता है। इसके अलावा, जो लोग धूप में फील्ड वर्क करते हैं, वे भी इसके सीधे निशाने पर होते हैं।

शरीर का कूलिंग सिस्टम फेल होने पर क्या होता है?

आकाश हेल्थकेयर के डायरेक्टर एंड यूनिट हेड (यूनिट-1, कार्डियोलॉजी) डॉ. संजय कुमार चुघ के अनुसार, हमारे शरीर के भीतर तापमान को संतुलित रखने का एक प्राकृतिक सिस्टम होता है, जो अत्यधिक गर्मी में इस तरह काम करता है:

 तापमान का विज्ञान

हमारे शरीर का सामान्य तापमान लगभग 37°C होता है। जब बाहर गर्मी बढ़ती है, तो हमारा शरीर पसीने के जरिए खुद को अंदर से ठंडा बनाए रखता है। लेकिन, जब बाहर का पारा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और गर्म हवाएं चलती हैं, तो शरीर का यह नेचुरल कूलिंग सिस्टम धीरे-धीरे काम करना बंद कर देता है। ऐसी स्थिति में अगर शरीर का आंतरिक तापमान बढ़कर 40°C (104°F) या उससे ऊपर पहुंच जाए और वह कम न हो, तो व्यक्ति हीटस्ट्रोक यानी लू का शिकार हो जाता है।

लू कब बन जाती है एक मेडिकल इमरजेंसी?

डॉ. संजय कुमार चुघ आगे बताते हैं कि लू की स्थिति तब सबसे ज्यादा जानलेवा साबित होती है, जब व्यक्ति का तेज बुखार किसी भी दवा या उपाय से कम नहीं हो पाता। जब मरीज की त्वचा पूरी तरह गर्म और सूखी (बिना पसीने के) हो जाए, उसे तेज चक्कर आने लगें या वह बेहोश होने लगे, तो यह बेहद गंभीर संकेत हैं।

ऐसी स्थिति में शरीर के भीतर क्या बदलाव आते हैं, इसे नीचे दी गई तालिका से आसानी से समझा जा सकता है:

लू के जानलेवा हमले से खुद को कैसे बचाएं? (Prevention Tips)

अगर आप रोजाना धूप में बाहर निकलते हैं या आपका काम फील्ड का है, तो अपनी दिनचर्या में इन जरूरी आदतों को शामिल करके आप हीटस्ट्रोक से पूरी तरह सुरक्षित रह सकते हैं:

  • भरपूर पानी पिएं: शरीर में पानी का स्तर बनाए रखने के लिए पूरे दिन में कम से कम 3 से 4 लीटर पानी जरूर पिएं। प्यास न भी लगी हो, तो भी थोड़े-थोड़े अंतराल पर पानी पीते रहें।

  • पारंपरिक पेयों का लें सहारा: केवल सादा पानी पीने के बजाय अपनी डाइट में नींबू पानी, ताजी छाछ, नमकीन लस्सी और नारियल पानी को शामिल करें। ये चीजें शरीर को तुरंत ठंडक देती हैं।

  • इलेक्ट्रोलाइट्स का इस्तेमाल: यदि धूप में ज्यादा देर रहना पड़े, तो ओआरएस (ORS) या इलेक्ट्रोलाइट्स वाले ड्रिंक्स पिएं। इससे पसीने के जरिए बाहर निकलने वाले जरूरी मिनरल्स की कमी शरीर में नहीं हो पाती।

  • कैफीन से दूरी बनाएं: तेज गर्मी के दिनों में बहुत ज्यादा चाय, कॉफी या कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक्स पीने से बचें। इनमें मौजूद कैफीन शरीर को हाइड्रेट करने के बजाय अंदरूनी पानी को तेजी से सोखता है (Dehydration बढ़ाता है)।

  • पीक अवर्स में बाहर जाने से बचें: दोपहर 12 बजे से लेकर शाम 4 बजे के बीच सूरज की किरणें सबसे तीखी होती हैं और गर्म हवाएं (लू) चलती हैं। कोशिश करें कि इस दौरान घर या ऑफिस से बाहर न निकलें।

बाहर निकलते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान

  1. कपड़ों का चुनाव: जब भी बाहर जाना जरूरी हो, हमेशा हल्के रंग के, ढीले-ढाले और सूती (Cotton) कपड़े ही पहनें। सिंथेटिक कपड़े गर्मी को शरीर के अंदर रोकते हैं।

  2. सुरक्षा कवच: अपने सिर और चेहरे को टोपी, सूती गमछे या छाते से ढककर रखें। आंखों को धूप की तपिश से बचाने के लिए अच्छी क्वालिटी का चश्मा (Sunglasses) जरूर लगाएं।

  3. पानी से भरपूर फल: गर्मियों के सीजन में मिलने वाले खास फल जैसे तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी और संतरे को अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं। इनमें पानी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, जो शरीर को अंदर से तरोताजा रखती है।

  4. पर्याप्त आराम: बहुत ज्यादा शारीरिक थकान से बचें और शरीर को पूरा आराम दें ताकि आपका मेटाबॉलिज्म और आंतरिक तापमान नियंत्रण में बना रहे।

एक जरूरी सलाह: लू लगना दिखने में भले ही एक आम मौसमी समस्या लगे, लेकिन लापरवाही बरतने पर यह सीधे अंगों को ठप कर सकती है। यदि आपको या आपके आस-पास किसी व्यक्ति को अत्यधिक तेज बुखार, त्वचा का लाल व सूखा होना, जी मिचलाना या चक्कर आने जैसे शुरुआती लक्षण दिखाई दें, तो घरेलू नुस्खों के भरोसे बैठने के बजाय तुरंत नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें।

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