व्यापार

NRI Deposits Rate Hike: डॉलर लाओ, बंपर मुनाफा पाओ! भारतीय बैंकों ने FCNR स्कीम में किया ऐतिहासिक बदलाव, जानें कमाई का नया नियम

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से देश में विदेशी मुद्रा का भंडार बढ़ाने और रुपये को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती देने के लिए दिए गए प्रोत्साहनों का असर अब साफ दिखने लगा है। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंकों— स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) ने अपने एनआरआई (NRI) ग्राहकों को लुभाने के लिए विदेशी मुद्रा गैर-निवासी यानी FCNR(B) डिपॉजिट स्कीम पर ब्याज दरों में भारी बढ़ोतरी कर दी है।

इस ऐतिहासिक बदलाव के बाद विदेश में रहने वाले भारतीयों को अपनी डॉलर जमा राशि पर पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा और आकर्षक रिटर्न मिल सकेगा। नए नियमों के तहत एनआरआई ग्राहक अब अमेरिकी डॉलर (USD) में जमा पर सीधे 6 फीसदी तक का सालाना रिटर्न हासिल कर सकते हैं, जो पहले महज 3.35 फीसदी के आसपास हुआ करता था। यानी बैंकों ने सीधा 2.65 फीसदी तक का बड़ा जंप लिया है। आपको बता दें कि इससे पहले एचडीएफसी बैंक, यस बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक भी अपनी ब्याज दरों को अपडेट कर चुके हैं।

SBI की नई 'FCNR एडवांटेज स्कीम' का गणित

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने इस मौके का फायदा उठाने के लिए विशेष रूप से 'FCNR(B) एडवांटेज डिपॉजिट स्कीम' पेश की है। इस स्कीम के तहत ब्याज दरों को जमा की जाने वाली रकम और समय अवधि (Tenure) के हिसाब से बेहद स्मार्ट तरीके से तय किया गया है:

  • 10 लाख डॉलर (1 Million USD) तक की जमा पर:

    • 3 साल से लेकर 4 साल से कम की अवधि के लिए: 5.25 फीसदी ब्याज।

    • 4 साल से लेकर 5 साल से कम की अवधि के लिए: 5.50 फीसदी ब्याज।

    • पूरे 5 साल की फिक्स्ड अवधि के लिए: 5.75 फीसदी ब्याज।

  • 10 लाख डॉलर से अधिक की बड़ी जमा पर: अगर कोई एनआरआई ग्राहक 10 लाख डॉलर से ज्यादा की रकम पूरे 5 साल के लिए जमा करता है, तो उसे अधिकतम 6 फीसदी की दर से बंपर रिटर्न दिया जाएगा।

बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB): अलग-अलग विदेशी मुद्राओं पर नए रेट्स

बैंक ऑफ बड़ौदा ने केवल अमेरिकी डॉलर ही नहीं, बल्कि दुनिया की कई अन्य प्रमुख मुद्राओं (Currencies) पर भी अपनी ब्याज दरों को बढ़ा दिया है। बैंक की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बीना वाहीद के मुताबिक, आरबीआई द्वारा हाल ही में FCNR(B) डिपॉजिट और विदेशी कमर्शियल कर्ज (ECB) के नियमों में दी गई ढील के कारण बैंकों के लिए विदेशी फंड जुटाना काफी आसान हो गया है।

बैंक ऑफ बड़ौदा की नई दरों को आप नीचे दी गई तालिका से आसानी से समझ सकते हैं:

समय से पहले पैसा निकालने के नियम: लॉक-इन पीरियड को समझें

भले ही ब्याज दरें बहुत आकर्षक हैं, लेकिन एसबीआई की इस नई FCNR(B) एडवांटेज स्कीम में निवेश करने से पहले आपको इसके 'प्री-मैच्योर विड्रॉल' (समय से पहले निकासी) के कड़े नियमों को जरूर जान लेना चाहिए। पैसे निकालने की समय सीमा के हिसाब से बैंक ने पेनल्टी की एक पूरी चेन तय की है:

1.पहले 1 साल के भीतर (0 से 12 महीने):पूर्ण प्रतिबंध.

डिपॉजिट करने के पहले एक साल के दौरान आप किसी भी स्थिति में समय से पहले अपना पैसा वापस नहीं निकाल सकते हैं। इसमें पूरी तरह लॉक-इन लागू रहेगा।

2.1 साल के बाद लेकिन 3 साल से पहले:3.50% की फिक्स्ड दर.

यदि आप एक साल का समय पूरा होने के बाद और तीन साल की अवधि खत्म होने से पहले पैसा निकालते हैं, तो आपको स्कीम की तय दर नहीं मिलेगी। आपको केवल 3.50 फीसदी की दर से ही ब्याज दिया जाएगा, जितने समय तक पैसा बैंक में रहा होगा।

3.3 साल के बाद लेकिन 5 साल से पहले:1% की कटौती (Penality).

अगर आप तीन साल पूरे होने के बाद लेकिन मैच्योरिटी (5 साल) से पहले अपनी जमा राशि निकालते हैं, तो उस विशिष्ट अवधि के लिए जो ब्याज दर लागू थी, बैंक उसमें से 1 फीसदी की कटौती करके बाकी का पैसा आपको सौंपेगा।

 एक्सपर्ट टेक (Takeaway)

यदि आप एक एनआरआई हैं और ग्लोबल मार्केट के उतार-चढ़ाव के बीच अपनी गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखते हुए मजबूत रिटर्न कमाना चाहते हैं, तो यह समय भारतीय बैंकों में FCNR(B) अकाउंट खोलने के लिए सबसे बेस्ट है। बस निवेश करने से पहले अपनी लिक्विडिटी (पैसे की जरूरत) का आकलन कर लें, ताकि आपको समय से पहले निकासी की पेनल्टी न भरनी पड़े।

Back to top button