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Vitamin B12 Deficiency: दिनभर रहती है सुस्ती और कमजोरी? शरीर में हो सकती है इस एक जरूरी विटामिन की कमी; जानें लक्षण और बचाव के उपाय

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और असंतुलित जीवनशैली के कारण कई लोग दिनभर बिना कोई भारी काम किए भी लगातार थकान और कमजोरी महसूस करते हैं। सुबह सोकर उठने के बाद भी शरीर में एनर्जी की कमी, आलस और सुस्ती बने रहना एक आम समस्या बन चुकी है। अक्सर लोग इसे केवल काम का तनाव या नींद की कमी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, यह आपके शरीर के भीतर पल रही किसी जरूरी विटामिन की गंभीर कमी का बड़ा अलार्म (संकेत) हो सकता है।

लगातार बनी रहने वाली शारीरिक थकान न सिर्फ आपके काम को प्रभावित करती है, बल्कि यह समय के साथ शरीर को खोखला भी कर सकती है। आइए जानते हैं कि बिना काम किए होने वाली इस थकान के मुख्य लक्षण क्या हैं, इसके पीछे कौन सा विटामिन जिम्मेदार है और देश के वरिष्ठ डॉक्टर इस विषय पर क्या सलाह देते हैं।

शरीर में थकान और कमजोरी के मुख्य लक्षण

यदि आपके शरीर को सही पोषण और जरूरी विटामिन्स नहीं मिल रहे हैं, तो आपका शरीर इन सामान्य और गंभीर लक्षणों के जरिए आपको सचेत करता है:

  • सामान्य लक्षण: हर समय शरीर टूटा-टूटा रहना, थोड़ा सा काम करते ही हांफ जाना, मांसपेशियों (Muscles) में लगातार मीठा दर्द होना, किसी भी काम में मन न लगना और याददाश्त व फोकस करने में भारी दिक्कत आना।

  • गंभीर लक्षण: सीढ़ियां चढ़ते समय अचानक सांस फूलना, दिल की धड़कन (Heartbeat) का अप्रत्याशित रूप से तेज हो जाना, बैठे-बैठे अचानक सिर भारी होना या चक्कर आना।

  • तात्कालिक प्रभाव: कई बार अचानक आंखों के सामने अंधेरा छा जाना, बिस्तर से उठने का मन न करना और दिनभर केवल लेटे रहने की इच्छा होना। यदि ये लक्षण आपके शरीर में हफ्तों से बने हुए हैं, तो इसे बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए।

कौन सा विटामिन दूर करता है थकान? जानें एक्सपर्ट की राय

लेडी हार्डिंग हॉस्पिटल (नई दिल्ली) के मेडिसिन विभाग के डायरेक्टर एवं एचओडी (HOD) डॉ. एल.एच. घोटेकर के मुताबिक, शरीर की इस क्रॉनिक थकान और सुस्ती को दूर करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण और जिम्मेदार तत्व विटामिन बी12 (Vitamin B12) है।

शरीर के लिए क्यों संजीवनी है विटामिन B12?

  1. रेड ब्लड सेल्स (RBC) का निर्माण: विटामिन B12 हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं (Red Blood Cells) को बनाने में सबसे मुख्य भूमिका निभाता है। जब शरीर में बी12 की कमी होती है, तो स्वस्थ आरबीसी का बनना कम हो जाता है, जिससे व्यक्ति एनीमिया (खून की कमी) का शिकार हो जाता है।

  2. नर्वस सिस्टम को मजबूती: यह विटामिन हमारे नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) को सुचारू रूप से चलाने और ब्रेन सिग्नल्स को एक्टिव रखने में सहायक होता है। इसकी कमी से न्यूरोलॉजिकल समस्याएं, चक्कर आना और सुन्नता होने लगती है।

  3. ऑक्सीजन और एनर्जी का प्रवाह: विटामिन B12 भोजन को एनर्जी में बदलने की सेलुलर प्रक्रिया को सपोर्ट करता है। शरीर में इसकी कमी होने से अंगों और ऊतकों तक ऑक्सीजन की सप्लाई धीमी हो जाती है, जिसके कारण कोशिकाएं पर्याप्त ऊर्जा नहीं बना पातीं और व्यक्ति हर समय बिना काम किए भी थका हुआ महसूस करता है।

प्राकृतिक रूप से कैसे करें विटामिन B12 की कमी को पूरा?

चूंकि हमारा शरीर विटामिन B12 को खुद से नहीं बना सकता, इसलिए इसे पूरी तरह से अपनी दैनिक डाइट (Diet) के माध्यम से ही प्राप्त करना पड़ता है। इसकी पूर्ति के लिए निम्नलिखित खाद्य पदार्थों को अपनी थाली का हिस्सा बनाएं:

फूड कैटेगरी सर्वश्रेष्ठ विकल्प (Dietary Sources)
डेयरी प्रोडक्ट्स (Dairy) दूध, ताजा दही, पनीर, छाछ और मक्खन (शाकाहारियों के लिए सर्वोत्तम)।
मांसाहारी स्रोत (Non-Veg) अंडा, उबला हुआ मांस (लीन मीट), चिकन और समुद्री मछली (जैसे साल्मन और टूना)।
फोर्टिफाइड फूड्स जो लोग विशुद्ध शाकाहारी या वीगन (Vegan) हैं, वे फोर्टिफाइड अनाज (Cereals), फोर्टिफाइड सोया मिल्क या बादाम मिल्क और पोषण संबंधी यीस्ट (Nutritional Yeast) का सेवन कर सकते हैं।

महत्वपूर्ण डॉक्टरी सलाह: यदि शरीर में विटामिन B12 का स्तर बहुत ज्यादा गिर चुका है, तो केवल भोजन से इसकी तुरंत भरपाई संभव नहीं होती। ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह पर विशिष्ट सप्लीमेंट्स (Tablets) या विटामिन B12 के क्लिनिकल इंजेक्शन दिए जाते हैं। कभी भी बिना डॉक्टरी परामर्श या ब्लड टेस्ट कराए खुद से मेडिकल स्टोर से खरीदकर हाई-डोज सप्लीमेंट्स न लें।

डाइट के साथ लाइफस्टाइल में सुधार भी है बेहद जरूरी

सिर्फ विटामिन्स की गोलियां खा लेने से थकान की समस्या जड़ से खत्म नहीं होगी, इसके लिए आपको अपनी दैनिक दिनचर्या (Lifestyle) में भी ये 4 महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार करने होंगे:

  • स्लीप साइकिल (Sleep Cycle): रोजाना 7 से 8 घंटे की गहरी और गुणवत्तापूर्ण नींद लें। रात में समय पर सोने और सुबह एक निश्चित समय पर उठने का अनुशासन बनाएं।

  • शारीरिक सक्रियता: शरीर को सुस्ती के जाल से बाहर निकालने के लिए रोजाना कम से कम 20 से 30 मिनट हल्की एक्सरसाइज, वॉक (टहलना) या योग व प्राणायाम जरूर करें। इससे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है।

  • तनाव प्रबंधन (Stress Management): मानसिक तनाव और अत्यधिक चिंता (Anxiety) भी शरीर की ऊर्जा को बहुत तेजी से सोखती है, जिससे शारीरिक थकान दोगुनी महसूस होती है। मेडिटेशन के जरिए मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें।

  • डिजिटल डिटॉक्स: देर रात तक स्क्रीन टाइम (मोबाइल, लैपटॉप, टीवी) को कम करें। ऑफिस के काम के दौरान हर एक-दो घंटे में अपनी सीट से उठकर 5 मिनट का छोटा ब्रेक लें और दिनभर शरीर को हाइड्रेटेड रखने के लिए पर्याप्त पानी पीते रहें।

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