विदेश

PoK में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ बगावत: सड़कों पर उतरे हजारों लोग, लगे ‘पाक आर्मी वापस जाओ’ के नारे

पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से इस समय एक बहुत बड़ी और संवेदनशील खबर सामने आ रही है। पिछले लंबे समय से आर्थिक तंगहाली, भारी टैक्स और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रही पीओके की स्थानीय जनता का गुस्सा अब पाकिस्तानी हुकूमत और वहां की सेना के खिलाफ पूरी तरह से फूट पड़ा है। जमीन से मिल रही ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीओके के विभिन्न हिस्सों में हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरकर हिंसक और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन की सबसे हैरान और महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रदर्शनकारी अब सीधे तौर पर पाकिस्तानी सेना को वहां से चले जाने की चेतावनी दे रहे हैं, और साथ ही ऐतिहासिक रूप से भारत के रुख का समर्थन करते नजर आ रहे हैं।

पाकिस्तानी सेना के खिलाफ क्यों भड़की पीओके की जनता

पीओके में भड़के इस जनआक्रोश के पीछे कई गंभीर और पुराने कारण जिम्मेदार हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना और वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) स्थानीय लोगों के मानवाधिकारों का लगातार हनन कर रही हैं। क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन इसके बदले में स्थानीय युवाओं को न तो रोजगार मिल रहा है और न ही क्षेत्र का विकास हो रहा है। इसके अलावा, हाल के दिनों में आटे, बिजली और ईंधन की कीमतों में की गई बेतहाशा बढ़ोतरी ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। यही वजह है कि अब लोग डर छोड़कर सीधे तौर पर 'पाकिस्तानी सेना यहां से दफा हो जाओ' के नारे बुलंद कर रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों ने किया भारत के रुख का खुला समर्थन

इस पूरे विरोध प्रदर्शन में एक बहुत बड़ा राजनीतिक मोड़ तब आया जब प्रदर्शनकारियों के बीच से भारत के समर्थन में आवाजें उठने लगीं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कई रैलियों में प्रदर्शनकारियों ने भारतीय कश्मीर (जम्मू-कश्मीर) में हो रहे विकास और वहां की कानून व्यवस्था की तुलना अपने बदतर हालातों से की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भारत के नियंत्रण वाले हिस्से में लोग शांति और समृद्धि से रह रहे हैं, जबकि पाकिस्तान ने पीओके को केवल एक सैन्य चारागाह बनाकर रख दिया है। कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में कहा कि उनका हक और न्याय केवल भारत की नीतियों और व्यवस्था के तहत ही सुरक्षित रह सकता है।

मुजफ्फराबाद और पुंछ में सुरक्षा व्यवस्था बेहद तनावपूर्ण

तनाव की गंभीरता को देखते हुए मुजफ्फराबाद, रावलकोट और पुंछ समेत पीओके के कई प्रमुख शहरों में भारी संख्या में पाकिस्तानी पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती कर दी गई है। स्थानीय प्रशासन ने कई संवेदनशील इलाकों में इंटरनेट सेवाओं पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है ताकि विरोध प्रदर्शनों की तस्वीरें और वीडियो दुनिया के सामने न आ सकें। इसके बावजूद, युवाओं और नागरिक समाज के संगठनों का हौसला कम नहीं हो रहा है और वे छिटपुट रास्तों से मार्च निकाल रहे हैं। मानव अधिकार संगठनों ने भी पाकिस्तान सरकार से अपील की है कि वह शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग करने से बचे।

वैश्विक स्तर और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर

पीओके में हो रही इस बड़ी उथल-पुथल पर नई दिल्ली में भारतीय सुरक्षा एजेंसियां और वैश्विक रणनीतिक विशेषज्ञ लगातार नजर बनाए हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत हमेशा से यह दोहराता आया है कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा है, जिसमें पाकिस्तान का अवैध कब्जा वाला क्षेत्र भी शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि पीओके की जनता के भीतर से उठ रही यह आवाज पाकिस्तान के उस झूठे प्रोपेगैंडा को पूरी तरह से ध्वस्त करती है, जो वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कश्मीर को लेकर फैलाता रहा है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन क्या रुख अख्तियार करता है, इस पर पूरे दक्षिण एशिया की नजरें टिकी हुई हैं।

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