Israel Elections 2026: ईरान और हमास से महा-युद्ध के बीच इजरायल में आम चुनाव का एलान, 38 साल बाद समय पर वोटिंग; दांव पर नेतन्याहू की सत्ता

मिडिल ईस्ट (Middle East) में ईरान, लेबनान और गाजा के साथ साल भर से भीषण युद्ध में उलझे इजरायल से इस वक्त की सबसे बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है. इजरायल में आगामी आम संसदीय चुनावों (General Elections) की तारीखों का आधिकारिक एलान कर दिया गया है. चुनावी तारीख की घोषणा होते ही इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) के करीब 4 दशक लंबे राजनीतिक करियर की सबसे चुनौतीपूर्ण परीक्षा की घड़ी आ गई है. युद्ध के इस तनावपूर्ण माहौल के बीच चुनावी बिगुल बजते ही पूरे इजरायल में सियासी सरगर्मियां सातवें आसमान पर पहुंच गई हैं.
रविवार देर शाम आई इजरायली मीडिया (Israeli Media Reports) की आधिकारिक रिपोर्टों के मुताबिक, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की वर्तमान सरकार का चार साल का कार्यकाल पूरा होने पर आगामी 27 अक्टूबर 2026 को देश में आम चुनाव कराए जाएंगे.
38 साल बाद इतिहास दोहराएगा इजरायल
'टाइम्स ऑफ इजरायल' की एक विशेष रिपोर्ट के मुताबिक, सत्तारूढ़ लिकुड पार्टी के वरिष्ठ नेता ओफिर काट्ज ने स्पष्ट किया कि इजरायली कानून के अनुसार निर्धारित तारीख पर ही अगले चुनाव संपन्न होंगे. इजरायल की मौजूदा संसद यानी 'नेसेट' (Knesset) 17 जुलाई 2026 को अपना चार साल का कार्यकाल पूरा कर रही है. कार्यकाल पूरा होते ही संसद चुनावी ब्रेक पर चली जाएगी और 7 सितंबर तक उम्मीदवारों की अंतिम सूची फाइनल कर ली जाएगी.
यह चुनाव बेहद ऐतिहासिक होने जा रहा है क्योंकि बीते 38 सालों के इजरायली इतिहास में यह पहली बार होगा जब राष्ट्रीय चुनाव किसी समय पूर्व विघटन के बजाय अपने निर्धारित समय पर (On Schedule) हो रहे हैं. आखिरी बार साल 1988 में तय समय पर चुनाव हुए थे. इसके साथ ही, नेतन्याहू के नेतृत्व वाली यह दक्षिणपंथी सरकार पिछले 50 वर्षों में पूरे चार साल का कार्यकाल पूरा करने वाली इजरायल की पहली सरकार बन जाएगी.
सबसे लंबे समय तक रहने वाले पीएम की सबसे कठिन परीक्षा
बेंजामिन नेतन्याहू इजरायल के इतिहास में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले प्रधानमंत्री हैं. वे अब तक रिकॉर्ड 6 बार देश के प्रधानमंत्री बन चुके हैं, जिसमें उनका पहला कार्यकाल 1996 में शुरू हुआ था और छठा कार्यकाल दिसंबर 2022 से अब तक जारी है. हालांकि, इस बार राजनीतिक विश्लेषक इसे उनके जीवन का सबसे कठिन चुनाव मान रहे हैं.
इजरायली जनता इस बार वोट डालते समय 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा किए गए औचक हमले, इंटेलिजेंस व सुरक्षा विफलता (Security Failure), गाजा-लेबनान युद्ध के तौर-तरीकों, ईरान के साथ सीधे सैन्य टकराव और अमेरिका के साथ बिगड़े कूटनीतिक संबंधों के आधार पर नेतन्याहू सरकार का मूल्यांकन करेगी. हालांकि, नेतन्याहू अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई के खात्मे और ईरानी सैन्य तंत्र को कमजोर करने को अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक जीत बताकर राष्ट्रवाद के नाम पर चुनाव प्रचार को धार दे रहे हैं.
क्या कह रहे हैं इजरायल के चुनावी सर्वे? (Opinion Polls)
इजरायल के प्रमुख मीडिया हाउस 'चैनल 12' के ताजा पोल (Pre-Poll Survey) के मुताबिक, इस बार के महा-मुकाबले में भी किसी भी एक राजनीतिक दल को पूर्ण बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है. वर्तमान में नेतन्याहू की 'लिकुड पार्टी' (Likud Party) और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजनकोट की विपक्षी 'याशर पार्टी' (Yashar Party) दोनों 23-23 सीटों के साथ सबसे बड़े राजनीतिक दलों के रूप में उभर रहे हैं.
वहीं 'चैनल 13' के एक अन्य ओपिनियन पोल में आइजनकोट की पार्टी को सबसे बड़ी पार्टी बनते दिखाया गया है. कुल मिलाकर, इजरायल की 120 सदस्यीय संसद (Knesset) में सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों का जादुई आंकड़ा किसी भी गठबंधन को आसानी से मिलता नहीं दिख रहा है, जिससे इजरायल में एक बार फिर 'हंग पार्लियामेंट' (त्रिशंकु संसद) बनने के आसार मजबूत हो गए हैं.