विदेश

पाकिस्तान की सेना और ISI के सीक्रेट बजट पर अमेरिका का कड़ा प्रहार, शहबाज सरकार से मांगा पाई-पाई का हिसाब

अंतरराष्ट्रीय राजनीति और आर्थिक गलियारों से इस वक्त एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां महाशक्ति अमेरिका ने अपनी सामरिक सख्ती दिखाते हुए पाकिस्तान के रक्षा बजट और खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के गुप्त खर्चों पर करारा हथौड़ा चलाया है। अमेरिका ने कड़े शब्दों में शहबाज शरीफ सरकार से पूछा है कि वह अपनी सेना और खुफिया तंत्र पर पानी की तरह बहने वाले पैसे का पूरा और पारदर्शी हिसाब दे। इस अमेरिकी कदम से इस्लामाबाद की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं, क्योंकि पाकिस्तान लंबे समय से अपने गुप्त सैन्य खर्चों और विदेशी कर्जों के असली आंकड़ों को दुनिया से छुपाता आया है।

अमेरिकी सख्ती के पीछे की असली वजह और आर्थिक संकट

पाकिस्तान इस समय इतिहास के सबसे गंभीर आर्थिक संकट और विदेशी मुद्रा भंडार की भारी कमी से जूझ रहा है। देश की जनता दो वक्त की रोटी और महंगाई के बोझ से त्रस्त है, जबकि दूसरी ओर हुक्मरान अपनी फौज और खुफिया तंत्र को मजबूत करने के नाम पर अरबों-खरबों रुपये झोंक रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक से मिलने वाले बेलआउट पैकेजों के बावजूद पारदर्शिता की कमी को देखते हुए अब अमेरिका ने कड़ा रुख अपनाया है। वाशिंगटन का साफ कहना है कि अमेरिकी टैक्सपेयर्स के पैसों या वैश्विक वित्तीय सहायता का इस्तेमाल क्षेत्रीय अस्थिरता या मनमाने गुप्त अभियानों के लिए नहीं होना चाहिए, जिसके चलते पाकिस्तान से पाई-पाई का हिसाब मांगा गया है।

रक्षा तंत्र और आईएसआई के गुप्त खर्चों पर कसेगा शिकंजा

पाकिस्तान की राजनीति और अर्थव्यवस्था में सेना और आईएसआई का प्रभाव जगजाहिर है, जो अक्सर बिना किसी जवाबदेही के भारी-भरकम बजट का इस्तेमाल करते हैं। अमेरिकी प्रशासन के इस सीधे दखल के बाद अब पाकिस्तान के नीति-निर्माताओं पर अंतरराष्ट्रीय दबाव काफी बढ़ गया है। जानकारों का मानना है कि यदि पाकिस्तान इस गुप्त बजट का संतोषजनक विवरण देने में नाकाम रहता है, तो उसे भविष्य में मिलने वाली अमेरिकी और पश्चिमी देशों की वित्तीय सहायता या अंतरराष्ट्रीय ऋणों से भी हाथ धोना पड़ सकता है। इस हाई-वोल्टेज कूटनीतिक ड्रामे ने एक बार फिर पाकिस्तानी हुक्मरानों की कलई खोलकर रख दी है।

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