देश

एक पैर के सहारे 50 दिनों की दुर्गम यात्रा: बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए दंडवत प्रणाम करते निकले मुकेश बम, अटूट आस्था देखकर नतमस्तक हुए लोग

असीम आस्था और भक्ति के आगे शरीर की शारीरिक सीमाएं भी घुटने टेक देती हैं। इसकी एक अद्भुत और भावुक कर देने वाली मिसाल देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा पर निकले दिव्यांग शिव भक्त मुकेश बम बने हैं। मात्र एक पैर के सहारे और वैशाखी की मदद से 50 दिनों की अत्यंत कठिन दंडवत प्रणाम यात्रा पर निकले मुकेश बम को देखकर हर कोई हैरान और नतमस्तक है। भीषण गर्मी, तपती सड़कों और शरीर को तोड़ देने वाली शारीरिक थकान के बावजूद मुकेश के चेहरे पर न तो कोई शिकन है और न ही अपने संकल्प से पीछे हटने का कोई इरादा।

अटूट आस्था: एक पैर के सहारे 50 दिनों की कठिन साधना

सावन और भादो के पवित्र महीने में बाबा धाम की यात्रा करने वाले लाखों श्रद्धालुओं में मुकेश की यह यात्रा सबसे अनूठी और प्रेरणादायक मानी जा रही है। अमूमन दो पैरों पर सामान्य रूप से चलने वाले कांवड़ियों के लिए भी सौ किलोमीटर से अधिक का सफर तय करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन मुकेश बम ने अपने जीवन के इस सबसे बड़े धार्मिक संकल्प को पूरा करने के लिए 'दंडवत प्रणाम' यानी शरीर को पूरी तरह जमीन पर बिछाकर नमन करते हुए आगे बढ़ने का कठिन रास्ता चुना। एक पैर न होने के बावजूद वे हर कदम पर बाबा भोलेनाथ का नाम जपते हुए जमीन पर लेटकर प्रणाम करते हैं और फिर उठकर अपनी वैशाखी के सहारे अगले कदम के लिए तैयार होते हैं। 50 दिनों की इस अनवरत साधना में उनका एकमात्र लक्ष्य बाबा बैद्यनाथ के पावन दरबार में हाजिरी लगाना है।

तपती सड़क और शरीर की परीक्षा: कैसे तय हो रहा किलोमीटरों का सफर

रास्ते में मिलने वाले अन्य कांवड़िये और स्थानीय नागरिक जब मुकेश की इस अदम्य भक्ति को देखते हैं, तो उनका सिर स्वतः ही श्रद्धा से झुक जाता है। रास्ते की पथरीली जमीन, धूप से तपती डामर की सड़कें और लगातार झुकने से होने वाला शारीरिक दर्द भी उनके बुलंद हौसलों को डिगा नहीं पा रहा है। मुकेश का कहना है कि यह यात्रा उनकी अपनी शारीरिक क्षमता से नहीं, बल्कि भगवान शिव की असीम कृपा और अदृश्य शक्ति के बल पर पूरी हो रही है। जब भी शरीर थककर जवाब देने लगता है, तो 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' का उद्घोष उन्हें नया संबल और असीमित ऊर्जा प्रदान करता है। मार्ग में पड़ने वाले गांवों और शहरों के लोग जगह-जगह पर उनके विश्राम, जलपान और प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के लिए स्वतः आगे आ रहे हैं।

प्रेरणा की मिसाल: भक्ति और इच्छाशक्ति का जीवंत संदेश

मुकेश बम की यह दंडवत यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति, समर्पण और कभी न हार मानने वाले जज्बे का जीवंत संदेश भी है। बाबा बैद्यनाथ धाम जाने वाले हजारों अन्य श्रद्धालु मुकेश की इस निष्ठा से प्रेरणा ले रहे हैं। हर दिन कई सौ मीटर की दूरी दंडवत करते हुए तय करना किसी आम इंसान के लिए असंभव सा प्रतीत होता है, लेकिन जब मन में अगाध श्रद्धा हो तो कठिन से कठिन मार्ग भी आसान बन जाता है। देवघर में बाबा बैद्यनाथ के पवित्र ज्योतिर्लिंग पर जलाभिषेक की उम्मीद में आगे बढ़ रहे मुकेश बम आज लाखों शिव भक्तों के लिए प्रेरणापुंज बन चुके हैं।

Back to top button