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डोनाल्ड ट्रंप का ईरान पर सबसे बड़ा आर्थिक हमला, घोषित किया ‘इकोनॉमिक डी-डे’

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और कड़ी आर्थिक कार्रवाई का ऐलान करते हुए इसे 'इकोनॉमिक डी-डे' (Economic D-Day) का नाम दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि जो भी देश, वित्तीय संस्थान, कंपनियां, एयरपोर्ट या सरकारी एजेंसियां ईरान को किसी भी प्रकार की सहायता प्रदान करेंगी, उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

अब तक की सबसे कड़ी आर्थिक कार्रवाई

अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर अपनी पोस्ट में कहा कि उन्होंने ईरान को समझौते का जितना बेहतरीन मौका दिया, उतना किसी ने नहीं दिया, लेकिन वे इसका फायदा उठाने में नाकाम रहे। इसके बाद अब ईरान के खिलाफ सबसे सख्त आर्थिक कदम उठाए जा रहे हैं।

इस अभियान के तहत ईरान के तेल व्यापार, नकदी लेन-देन, मनी एक्सचेंज कंपनियों के उपयोग और जहाजों के फर्जी पंजीकरण जैसी गतिविधियों पर पूरी तरह से शिकंजा कसा जाएगा। ट्रंप ने इस मुहिम की तुलना द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नॉर्मंडी में अमेरिकी सैनिकों की ऐतिहासिक लैंडिंग (D-Day) से की है और अमेरिका के सभी सहयोगी देशों से अपील की है कि वे ईरान से पैदा होने वाले खतरे को समाप्त करने के लिए संयुक्त रूप से साथ आएं।

ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य क्षमता पर दबाव

डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि इन तमाम पाबंदियों से ईरान की सैन्य ताकत और अर्थव्यवस्था पहले ही बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि ईरान की नौसेना और वायु सेना लगभग निष्क्रिय हो चुकी हैं तथा सैन्य कारखाने तबाह हो चुके हैं।

क्या है 'इकोनॉमिक डी-डे'?

'इकोनॉमिक डी-डे' कोई पारंपरिक या आधिकारिक कानूनी शब्द नहीं है, बल्कि यह अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ईरान के खिलाफ छेड़े गए वृहद आर्थिक युद्ध को परिभाषित करने के लिए इस्तेमाल किया गया है। ऐतिहासिक रूप से 6 जून 1944 का 'डी-डे' नॉर्मंडी में मित्र देशों के सैन्य अभियान के रूप में दर्ज है, जिसने द्वितीय विश्व युद्ध की दिशा बदल दी थी। इसी संदर्भ का हवाला देते हुए ट्रंप ने ईरान को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग करने के लिए इस नई आर्थिक रणनीति का ऐलान किया है।

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