नेपाल में जलप्रलय का तांडव: 95 की मौत, सैकड़ों लापता; 19 पुल और 11 हाइड्रो प्रोजेक्ट बहने से बिजली-सड़क नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त

नेपाल-तिब्बत सीमा से सटे उत्तरी नेपाल के रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन जिलों में बुधवार सुबह भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आए भयानक सैलाब ने पलक झपकते ही सब कुछ तबाह कर दिया। प्रारंभिक वैज्ञानिक आकलन के अनुसार, तिब्बत क्षेत्र में 4.4 तीव्रता के भूकंप और ल्हेंदे नदी में भारी हिमस्खलन व चट्टानें गिरने से नदी का प्रवाह रुक गया था। जब यह प्राकृतिक अवरोध अचानक टूटा, तो पानी और मलबे की विशालकाय दीवार निचले इलाकों पर कहर बनकर टूट पड़ी।
इस त्रासदी में अब तक 95 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और करीब 1000 लोग लापता व संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं। नेपाल सरकार ने प्रभावित जिलों को तीन महीने के लिए आपदा संभावित क्षेत्र घोषित कर दिया है।
105 भारतीयों समेत विदेशी पर्यटक और सुरक्षा बल लापता
आपदा के समय कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे कई तीर्थयात्री और पर्यटक सीमावर्ती इलाकों में मौजूद थे। नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, लापता लोगों में 105 से अधिक भारतीय नागरिक, 37 एनआरआई और अन्य विदेशी नागरिक शामिल हैं।
इसके अलावा, टिमुरे बॉर्डर पोस्ट पर तैनात नेपाल पुलिस और सुरक्षा बलों के करीब 80 जवान भी इस सैलाब की चपेट में आने के बाद से लापता हैं। सेना और राहत दलों के सामने कई इलाकों में हेलिपैड तक बह जाने के कारण बचाव कार्य में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
11 हाइड्रो प्रोजेक्ट तबाह: नेशनल ग्रिड से 431 मेगावाट बिजली बाहर
इस जलप्रलय ने नेपाल के ऊर्जा क्षेत्र की रीढ़ तोड़ दी है। भोटेकोशी और त्रिशूली बेसिन में स्थित 11 प्रमुख हाइड्रोपावर प्लांट गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
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त्रिशूली-3 'B', चिलिमे, रसुवागढ़ी और त्रिशूली-3 'A' जैसे बिजली संयंत्रों के पावर हाउस और टनल जलमग्न हो गए हैं।
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हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स और कंस्ट्रक्शन साइट्स पर काम करने वाले 220 से अधिक इंजीनियर और कर्मचारी संपर्क से बाहर हो गए हैं।
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ट्रांसमिशन लाइनें टूटने और प्लांट्स बंद होने से नेशनल ग्रिड से 431.1 मेगावाट बिजली की सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई है।
19 पुल और 40 किलोमीटर सड़कें बहीं: प्रमुख राजमार्ग पूरी तरह बंद
बाढ़ और भूस्खलन के प्रचंड वेग में रसुवा से माल्खु के बीच बने 19 प्रमुख मोटरेबल और झूला पुल ताश के पत्तों की तरह ढह गए। करीब 40 किलोमीटर लंबी सड़कें मलबे में तब्दील हो चुकी हैं।
नेपाल-चीन व्यापार का मुख्य केंद्र 'रसुवागढ़ी-केरुंग' बॉर्डर और फ्रेंडशिप कॉरिडोर पूरी तरह कट गया है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर पृथ्वी राजमार्ग, गल्छी-स्याफ्रुबेसी और मुग्लिंग-नारायणगढ मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा दी है। 25 से अधिक टेलीकॉम टावर और ऑप्टिकल फाइबर टूटने से बड़े इलाके में संचार व्यवस्था ठप हो चुकी है।
नेपाली सेना का सघन बचाव अभियान, भारत ने भेजी तत्काल मानवीय मदद
आपदा प्रभावित क्षेत्रों में नेपाली सेना, आर्म्ड पुलिस फोर्स और नेपाल पुलिस ने बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया है। 14 से अधिक हेलिकॉप्टरों, खोजी कुत्तों और ड्रोनों के जरिए मलबे में फंसे लोगों को निकाला जा रहा है। त्रिशूली मिलिट्री कैंप और काठमांडू के अस्पतालों में घायलों के इलाज के लिए इमरजेंसी वार्ड बनाए गए हैं।
संकट की इस घड़ी में भारत ने पड़ोसी धर्म निभाते हुए तुरंत 10 टन मानवीय सहायता (HADR) और जरूरी जीवनरक्षक दवाइयां नेपाल भेजी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के शीर्ष नेतृत्व से बात कर गहरी संवेदना व्यक्त की और भारतीय वायुसेना व एनडीआरएफ को स्टैंडबाय पर रखने का भरोसा दिया है।