विदेश

चीन ने एक साल में दूसरी बार किया राफेल के साथ वॉरगेम, भारतीय वायुसेना से खौफ में ड्रैगन

भारतीय वायुसेना की ताकत का लोहा आज पूरी दुनिया मान रही है, और इसका सबसे बड़ा उदाहरण ड्रैगन यानी चीन की हरकतों में साफ तौर पर देखा जा सकता है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स ने एक साल के भीतर दूसरी बार राफेल लड़ाकू विमानों को ध्यान में रखकर सीक्रेट वॉरगेम अभ्यास किया है। भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल राफेल फाइटर जेट्स की मारक क्षमता, अत्याधुनिक मिसाइलों और डॉगफाइट स्किल्स से चीन इस कदर खौफ में है कि वह लगातार अपनी रणनीति में बदलाव कर रहा है। ड्रैगन की यह छटपटाहट इस बात का सबूत है कि भारतीय आसमान की सुरक्षा करने वाला राफेल चीन के लिए किसी बड़े सिरदर्द से कम नहीं है।

भारतीय वायुसेना के राफेल से क्यों कांप रहा है ड्रैगन

जब से भारतीय वायुसेना में फ्रांसीसी मूल के राफेल विमान शामिल हुए हैं, तब से एशिया के सामरिक समीकरण पूरी तरह से बदल चुके हैं। राफेल में लगी मेटेओर बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल और स्कैल्प क्रूज मिसाइल ऐसी ताकतें हैं, जो दुश्मन के रडार को चकमा देकर सटीक निशाना लगाने में पूरी तरह सक्षम हैं। चीन अपनी सीमा के पास लगातार युद्धाभ्यास कर रहा है और उसके फाइटर पायलट्स को राफेल की आधुनिक तकनीकों से निपटने के लिए विशेष रूप से ट्रेंड किया जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का बार-बार इस तरह का वॉरगेम करना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि वह भारतीय वायुसेना की बढ़ती रणनीतिक बढ़त और राफेल की मारक क्षमता से अंदर तक डरा हुआ है।

एक साल में दूसरी बार सीक्रेट वॉरगेम अभ्यास की असल वजह

प्राप्त खुफिया और सामरिक रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन की वायुसेना ने पिछले कुछ महीनों में दूसरी बार राफेल जैसे उन्नत चौथी पीढ़ी के विमानों की युद्ध शैली को सिमुलेट करते हुए बड़े पैमाने पर अभ्यास किया है। चीनी सेना यह अच्छी तरह जानती है कि वास्तविक युद्ध की स्थिति में तिब्बत और लद्दाख जैसे ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में राफेल भारतीय वायुसेना को एक निर्णायक बढ़त दिला सकता है। चीनी सैनिक और रणनीतिकार इस बात को लेकर चिंतित हैं कि उनके अपने स्टील्थ और नॉन-स्टील्थ विमान भारतीय राफेल के सामने कितनी देर टिक पाएंगे। इसी आशंका के चलते चीन अपनी वायुसेना की कमियों को दूर करने के लिए बार-बार इस तरह के युद्ध अभ्यास आयोजित कर रहा है ताकि वह अपनी सुरक्षा कमजोरियों को छुपा सके।

भारत की रणनीतिक बढ़त और वायुसेना की तैयारी

भारतीय वायुसेना सिर्फ रक्षात्मक रुख अपनाने के बजाय किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह आक्रामक और चाक-चौबंद स्थिति में तैयार रहती है। भारत ने अपने पश्चिमी और पूर्वी दोनों मोर्चों पर राफेल विमानों को रणनीतिक रूप से तैनात किया है, जिससे चीन और पाकिस्तान दोनों की नींद उड़ी हुई है। भारतीय पायलट्स की बेहतरीन ट्रेनिंग और राफेल की जैमिंग क्षमताएं इसे दुनिया के सबसे घातक फाइटर जेट्स की श्रेणी में रखती हैं। चीन चाहे कितनी भी बार वॉरगेम कर ले या अपनी सीमा पर सैन्य बुनियादी ढांचे को मजबूत कर ले, भारतीय वायुसेना की चौकसी और राफेल की ताकत के आगे उसकी हर चाल नाकाम साबित हो रही है।

ग्लोबल डिफेंस मार्केट में राफेल का दबदबा और चीन की मायूसियां

अंतरराष्ट्रीय रक्षा मंचों पर भी राफेल की लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है और इसकी तकनीकी श्रेष्ठता ने चीनी विमानन उद्योगों की पोल खोलकर रख दी है। चीन अक्सर अपने स्वदेशी विमानों के बेहतर होने का दावा करता है, लेकिन जब बात वास्तविक युद्ध कौशल और हथियारों की गुणवत्ता की आती है, तो राफेल जैसे विमानों के सामने चीनी तकनीक पीछे छूट जाती है। चीन का यह बार-बार वॉरगेम करना इस बात का मनोवैज्ञानिक प्रमाण है कि वह भारत की बढ़ती सैन्य ताकत के सामने मनोवैज्ञानिक दबाव महसूस कर रहा है। आने वाले दिनों में भारतीय वायुसेना की यह ताकत देश की सीमाओं को और अधिक सुरक्षित बनाने में एक मजबूत ढाल साबित होगी।

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