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यूपीटीईटी में 62 हजार कार्यरत शिक्षक हुए फेल, क्या खतरे में है सरकारी नौकरी या मिलेगा दोबारा मौका? जानें सुप्रीम कोर्ट की डेडलाइन और योगी सरकार का प्लान

उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग और परिषदीय विद्यालयों में तैनात हजारों शिक्षकों के लिए उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के ताजा परिणामों ने नई हलचल पैदा कर दी है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा जारी नतीजों में जहां 13 लाख से अधिक नए अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल की है, वहीं राज्य के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पहले से सेवाएं दे रहे करीब 62,028 कार्यरत शिक्षक इस पात्रता परीक्षा को उत्तीर्ण करने में असफल रहे हैं।

इस परिणाम के सामने आते ही शिक्षक संगठनों, शिक्षा मित्रों और सरकारी शिक्षकों के बीच यह गंभीर सवाल खड़ा हो गया है कि क्या परीक्षा में फेल होने के बाद इन शिक्षकों की नौकरी पर तत्काल खतरा मंडराने लगा है या फिर सरकार और अदालत की ओर से उन्हें कोई राहत मिलने जा रही है।

2.68 लाख कार्यरत शिक्षकों ने दी थी परीक्षा, 62 हजार नहीं कर सके क्वालिफाई

आंकड़ों के मुताबिक, इस बार की यूपीटीईटी परीक्षा में कुल 2,68,799 कार्यरत शिक्षकों ने हिस्सा लिया था। इनमें से 2,06,771 शिक्षक परीक्षा पास करने में सफल रहे, जबकि 62,028 शिक्षक न्यूनतम कट-ऑफ अंक हासिल करने में असफल रह गए।

प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) पर 1,22,405 कार्यरत शिक्षक परीक्षा में बैठे थे, जिनमें से 93,387 शिक्षकों ने परीक्षा उत्तीर्ण की। वहीं उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6 से 8) की बात करें तो 1,46,394 कार्यरत शिक्षक परीक्षा में शामिल हुए, जिनमें से 1,13,384 शिक्षक ही सफल घोषित हुए। हालांकि कुल पास प्रतिशत 76 से 77 प्रतिशत के आसपास रहा, लेकिन फेल होने वाले 62 हजार शिक्षकों की संख्या अपने आप में एक बड़ा प्रशासनिक और नीतिगत मुद्दा बन गई है।

क्या तुरंत चली जाएगी नौकरी? सुप्रीम कोर्ट के आदेश की बारीकियां

यूपीटीईटी में असफल हुए कार्यरत शिक्षकों के मन में सबसे बड़ा डर सेवा समाप्ति को लेकर है। हालांकि, कानूनी और प्रशासनिक नियमों के अनुसार इन शिक्षकों की नौकरी तुरंत जाने की कोई संभावना नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना अनिवार्य तो किया है, लेकिन इसके लिए एक तय समय सीमा भी प्रदान की है। शीर्ष अदालत के दिशानिर्देशों के तहत कार्यरत शिक्षकों के पास पात्रता हासिल करने के लिए पर्याप्त अवसर हैं। जिन शिक्षकों की सेवा में पांच वर्ष से अधिक का समय शेष है, उन्हें पात्रता हासिल करने के लिए निश्चित मोहलत दी गई है, जबकि कम समय बचे होने वाले शिक्षकों के लिए सेवानिवृत्ति और पदोन्नति के अलग नियम तय किए गए हैं। इसलिए पहली बार में असफल होने का मतलब यह कतई नहीं है कि शिक्षकों को सीधे पदमुक्त कर दिया जाएगा।

योगी सरकार का बड़ा कदम: कार्यरत शिक्षकों के लिए अलग परीक्षा की तैयारी

शिक्षकों के तनाव और सामान्य अभ्यर्थियों के साथ प्रतिस्पर्धा के दबाव को देखते हुए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने पहले ही एक अहम नीतिगत फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुसार, बेसिक शिक्षा परिषद में तैनात पुराने शिक्षकों के लिए राज्य स्तर पर एक अलग और विशेष पात्रता परीक्षा आयोजित करने का खाका तैयार किया जा रहा है।

इस विशेष परीक्षा का उद्देश्य कार्यरत शिक्षकों को अपनी पात्रता साबित करने के लिए एक पारदर्शी और अनुकूल मंच प्रदान करना है, ताकि उन्हें नए व फ्रेश अभ्यर्थियों के साथ सीधे कठिन मेरिट होड़ में न जूझना पड़े। शिक्षा सेवा चयन आयोग इस विशेष परीक्षा के प्रारूप और पाठ्यक्रम पर तेजी से काम कर रहा है, जिससे असफल रहे शिक्षकों को जल्द ही अपनी योग्यता साबित करने का अगला मौका मिल सके।

62 हजार शिक्षकों के पास अब क्या हैं आगे के कानूनी और विभागीय रास्ते

इस परीक्षा में असफल रहे 62 हजार शिक्षकों के सामने अब मुख्य रूप से आगामी अवसरों का उपयोग करना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है। शिक्षक संगठन भी सरकार से मांग कर रहे हैं कि इन सेवारत शिक्षकों के लिए विभागीय स्तर पर विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएं, ताकि वे बिना किसी मानसिक दबाव के आगामी पात्रता परीक्षा को पास कर सकें।

विभागीय जानकारों का स्पष्ट कहना है कि शिक्षकों को घबराने के बजाय आने वाले समय में प्रस्तावित विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा या केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET/UPTET) के अगले सत्रों की तैयारी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, ताकि निर्धारित डेडलाइन समाप्त होने से पहले वे अपनी सेवा को कानूनी रूप से पूरी तरह सुरक्षित बना सकें।

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