उत्तर प्रदेश

AMU के प्रतिभाशाली छात्र कृष्णा ने पीजी में की आत्महत्या, NDA परीक्षा पास कर चुका था होनहार, सुसाइड नोट में लिखा- ‘मैं एक लूजर

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से उच्च शिक्षा के एक प्रतिष्ठित संस्थान अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) परिसर से एक बेहद झकझोर देने वाली और दिल को चीर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने पूरे शैक्षणिक जगत और मृतक छात्र के परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। यूनिवर्सिटी के हॉस्टल या पीजी में रहने वाले एक प्रतिभाशाली छात्र, जिसने अपनी मेहनत के दम पर देश की प्रतिष्ठित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी यानी एनडीए (NDA) की लिखित परीक्षा सफलताપूर्वक पास कर ली थी, उसने संदिग्ध परिस्थितियों में आत्महत्या कर ली। इस सनसनीखेज घटना के सामने आने के बाद से यूनिवर्सिटी प्रशासन और स्थानीय पुलिस के होश उड़े हुए हैं। छात्र के कमरे से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसमें उसने अपनी मौत के लिए खुद को जिम्मेदार ठहराते हुए खुद को एक 'लूजर' बताया है, जिसने हर किसी को अंदर से झकझोर कर रख दिया है।

प्रतिभाशाली छात्र कृष्णा का एएमयू परिसर में खौफनाक कदम

मृतक छात्र की पहचान कृष्णा के रूप में हुई है, जो अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में रहकर अपनी आगे की पढ़ाई पूरी कर रहा था और देश के सबसे कठिन माने जाने वाले रक्षा बलों के इम्तिहान की तैयारी में जुटा हुआ था। जो छात्र अपनी बुद्धि, कौशल और कड़ी मेहनत के बल पर एनडीए जैसी देश की सर्वोच्च परीक्षा को क्रैक कर चुका हो, उसके द्वारा इस तरह का चरम कदम उठाया जाना किसी के भी गले नहीं उतर रहा है। आसपास के छात्रों और जानने वालों का कहना है कि कृष्णा पढ़ाई में काफी होनहार था और उसका भविष्य उज्जवल दिखाई दे रहा था, लेकिन अंदर ही अंदर वह किस भारी मानसिक तनाव, डिप्रेशन या निजी उथल-पुथल से गुजर रहा था, इसकी भनक उसके करीबियों तक को नहीं लग पाई। अचानक हुई इस घटना से पूरा कैंपस सकते में है और हर कोई यही सोच रहा है कि आखिर ऐसी कौन सी बात थी जो इस युवा होनहार छात्र को मौत के आगोश में खींच ले गई।

सुसाइड नोट में मिला दर्दनाक संदेश: 'मैं एक लूजर हूं'

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और एएमयू के सुरक्षा अधिकारी मौके पर पहुंच गए और कमरे का दरवाजा तोड़कर शव को कब्जे में लिया। तलाशी के दौरान पुलिस को कमरे से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ, जो इस पूरे मामले की गुत्थी को थोड़ा बहुत तो बयान करता है लेकिन साथ ही कई अनसुलझे सवाल भी छोड़ जाता है। उस सुसाइड नोट में कृष्णा ने लिखा है कि वह अपनी जिंदगी से तंग आ चुका है और उसे ऐसा महसूस होता है कि वह हर मोर्चे पर असफल हो गया है, इसलिए उसने खुद को एक 'लूजर' करार देते हुए अपनी इस खौफनाक अंत की इबारत लिख डाली। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि आज की युवा पीढ़ी पर उम्मीदों का बोझ, आत्म-मूल्यांकन का अत्यधिक दबाव और कई बार अंदर ही अंदर पनपने वाला अकेलापन उन्हें किस तरह खामोशी से अंदर से खोखला कर देता है, यह घटना उसका एक और कड़वा और दर्दनाक उदाहरण है।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, रो-रोकर बुरा हाल

जैसे ही कृष्णा की आत्महत्या की यह मनहूस खबर उसके घर-परिवार वालों तक पहुंची, उनके पैरों तले जमीन खिसक गई और परिवार में कोहराम मच गया। माता-पिता और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, और उनका मानना है कि उनका बेटा इतना कमजोर नहीं हो सकता था कि वह ऐसी कोई बात सोचे। परिवार के सदस्यों का कहना है कि उन्होंने तो अपने बेटे को देश की सेवा में जाने और अफसर बनने के सपने के साथ यूनिवर्सिटी भेजा था, लेकिन उन्हें क्या पता था कि उनका बेटा इस तरह एक दिन मृत अवस्था में मिलेगा। पुलिस ने परिजनों को सूचित कर दिया है और उनके अलीगढ़ पहुंचने पर आगे की कानूनी कार्रवाई और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, ताकि मौत के वास्तविक कारणों का कानूनी रूप से खुलासा हो सके।

पुलिस जांच और कैंपस में मानसिक स्वास्थ्य पर उठते सवाल

अलीगढ़ पुलिस अब इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि आखिर किन परिस्थितियों के चलते कृष्णा ने यह कदम उठाया। पुलिस उसके मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स, चैट और उसके दोस्तों से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि पिछले कुछ दिनों से वह किसके संपर्क में था और क्या उसे किसी तरह का मानसिक दबाव या प्रताड़ना मिल रही थी। इस दुखद घटना ने एक बार फिर से देश भर के बड़े शिक्षण संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, काउंसलिंग की कमी और उनके ऊपर लगातार बने रहने वाले प्रेशर के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। यदि समय रहते ऐसे प्रतिभाशाली युवाओं की मानसिक परेशानियों को पहचान लिया जाए, तो कई बहुमूल्य जिंदगियों को बचाया जा सकता है।

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