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सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद FSSAI का बड़ा कदम: पैकेट वाले खाने पर लगेगा लाल ‘स्टॉप’ साइन

देशभर के करोड़ों उपभोक्ताओं, खासकर बच्चों और युवाओं की सेहत को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एक ऐतिहासिक और कड़ा कदम उठाया है। बाजार में बिकने वाले चिप्स, नमकीन, कुकीज, नूडल्स और पैकेज्ड ड्रिंक्स जैसे अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स के पैकेट के सामने अब लाल रंग का षट्कोणीय (Hexagonal) चेतावनी निशान लगाना अनिवार्य होने जा रहा है। यह लाल निशान ठीक उसी तरह दिखाई देगा जैसे ट्रैफिक में रुकने का 'स्टॉप' (STOP) साइन होता है, ताकि खरीदार पैकेट उठाते ही एक नजर में समझ सकें कि वे जो खाना खरीद रहे हैं, उसमें नमक, चीनी या सेचुरेटेड फैट की मात्रा तय सीमा से कहीं ज्यादा है।

यह बड़ा नीतिगत बदलाव सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र सरकार और फूड सेफ्टी रेगुलेटर को लगाई गई कड़ी फटकार के बाद सामने आया है। गैर-सरकारी संस्था '3S एंड अवर हेल्थ सोसाइटी' द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने दो टूक पूछा था कि क्या नियामक लोगों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर नहीं है। कोर्ट के कड़े रुख के बाद FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट में अनुपालन हलफनामा (Compliance Affidavit) दाखिल कर फ्रंट-ऑफ-पैक न्यूट्रिशन लेबलिंग (FoPNL) के तहत लाल चेतावनी चिन्ह लागू करने की पूरी रूपरेखा पेश कर दी है।

क्या है फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग और लाल हेक्सागोनल सिंबल का नया नियम?

अब तक भारत में बिकने वाले पैकेटबंद सामानों पर पोषण संबंधी जानकारी (Nutritional Information) पैकेट के पिछले हिस्से पर बेहद बारीक अक्षरों में एक जटिल टेबल के रूप में छापी जाती थी। आम उपभोक्ता, बुजुर्ग या बच्चे इस बारीक चार्ट को न तो समझ पाते थे और न ही पढ़ पाते थे। कंपनियां इसका फायदा उठाकर पैकेट के आगे बड़े-बड़े दावों (जैसे 'नेचुरल', 'हेल्दी', 'विटामिन युक्त') के जरिए ग्राहकों को आकर्षित करती थीं।

FSSAI के नए प्रस्ताव के अनुसार, अब पैकेट के फ्रंट यानी सामने वाले मुख्य हिस्से पर लाल रंग का हेक्सागोनल बॉक्स छपेगा। इसमें उत्पाद के अवयवों के आधार पर स्पष्ट अंग्रेजी और स्थानीय भाषाओं में बड़े अक्षरों में लिखा होगा:

  • HIGH FAT: यदि उत्पाद में निर्धारित सीमा से अधिक अनहेल्दी या एडेड सेचुरेटेड फैट है।

  • HIGH SUGAR: यदि प्रोडक्ट में अधिक मात्रा में अतिरिक्त चीनी (Added Sugar) का इस्तेमाल किया गया है।

  • HIGH SALT: यदि सोडियम या नमक की मात्रा शरीर की दैनिक जरूरत की सुरक्षित सीमा को पार करती है।

  • HIGHLY SWEETENED BEVERAGE: अत्यधिक मीठे कार्बोनेटेड पेय, पैक्ड जूस और एनर्जी ड्रिंक्स के लिए अलग से विशेष चेतावनी।

इसके साथ ही FSSAI ने यह भी तय किया है कि चेतावनी का फॉन्ट साइज पैकेट के पीछे छपने वाले न्यूट्रिशन टेबल के फॉन्ट से कम से कम एक पॉइंट बड़ा होना चाहिए, ताकि वह दूर से ही आसानी से नजर आ सके।

दो चरणों में लागू होगी व्यवस्था: कंपनियों को मिलेगा रेसिपी सुधारने का मौका

नियामक ने उद्योग जगत की तैयारियों और उपभोक्ताओं की समझ को ध्यान में रखते हुए इस चेतावनी प्रणाली को दो अलग-अलग चरणों (Phased Manner) में लागू करने की योजना बनाई है:

  • पहला चरण (Phase I): पहले चरण में यह लाल हेक्सागोनल चेतावनी केवल उन खाद्य उत्पादों पर अनिवार्य रूप से लगाई जाएगी, जिनमें तीन प्रमुख हानिकारक तत्वों—फैट, शुगर और सॉल्ट—में से कम से कम 'दो या दो से अधिक' तत्व निर्धारित सीमा से अधिक होंगे। उदाहरण के लिए, यदि किसी चिप्स पैकेट में फैट और नमक दोनों ज्यादा हैं, तो उस पर 'HIGH FAT – HIGH SALT' का संयुक्त लाल निशान छपेगा।

  • दूसरा चरण (Phase II): दूसरे चरण के तहत इस नियम का दायरा और कड़ा कर दिया जाएगा। तब किसी भी ऐसे उत्पाद पर भी लाल निशान लगाना अनिवार्य होगा, जिसमें सिर्फ 'एक' तत्व (चाहे केवल शुगर, केवल फैट या केवल सॉल्ट) भी मानक सीमा से अधिक पाया जाएगा।

चरणबद्ध व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह है कि बड़ी फूड कंपनियां अपने उत्पादों में नमक, तेल और चीनी की मात्रा घटाकर उनकी रेसिपी को सुधारें (Reformulation) ताकि उनके पैकेट पर लाल खतरे का निशान लगने से बच सके।

चिप्स, नमकीन से लेकर सॉफ्ट ड्रिंक्स तक: इन उत्पादों पर दिखेगा सीधा असर

इस नए नियम का सबसे बड़ा असर भारतीय बाजार में बिकने वाले उन अल्ट्रा-प्रोसेस्ड स्नैक्स और ड्रिंक्स पर पड़ेगा, जो युवाओं और बच्चों की दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं:

  • आलू के चिप्स, भुजिया और नमकीन: इनमें पाम ऑयल, डीप फ्राइंग फैट और अत्यधिक नमक का इस्तेमाल होता है, जिससे ये सीधे 'High Fat – High Salt' की श्रेणी में आएंगे।

  • चॉकलेट, क्रीम बिस्कुट और वेफर्स: इनमें ट्रांस फैट, रिफाइंड पाम फैट और अत्यधिक मैदा व चीनी की मात्रा पाई जाती है, जिससे ये 'High Sugar – High Fat' चेतावनी के दायरे में आएंगे।

  • कोल्ड ड्रिंक्स, कार्बोनेटेड बेवरेजेज और बॉटल्ड जूस: एक कैन सोडा में औसतन 7 से 10 चम्मच तक चीनी घुली होती है, जिन पर अब प्रमुखता से 'Highly Sweetened Beverage' का लाल निशान छापना होगा।

  • इंस्टेंट नूडल्स, फ्रोजन फूड और रेडी-टू-ईट मील्स: इनमें लंबे समय तक शेल्फ लाइफ बनाए रखने के लिए सोडियम और प्रिजर्वेटिव्स की भारी मात्रा होती है।

किन उत्पादों को मिलेगी छूट: प्राकृतिक और एकल-सामग्री वाले खाद्य पदार्थ बाहर

FSSAI ने स्पष्ट किया है कि लाल चेतावनी का यह नियम सभी प्रकार के खाद्य पदार्थों पर आंख मूंदकर लागू नहीं होगा। सिंगल इंग्रीडिएंट (एकल सामग्री) वाले उत्पादों और प्राकृतिक रूप से वसा या मिठास से भरपूर पारपंरिक सामग्रियों को इस चेतावनी लेबल से बाहर रखा गया है:

  • देसी घी, मक्खन और कच्चा दूध: डेयरी से जुड़े प्राकृतिक एकल उत्पाद इस नियम से बाहर रहेंगे।

  • शुद्ध खाद्य तेल (Edible Oils): सरसों का तेल, तिल का तेल, मूंगफली का तेल आदि को छूट रहेगी।

  • गुड़, शहद, टेबल शुगर और सादा नमक: क्योंकि ये सीधे तौर पर बुनियादी रसोई सामग्री (Raw Ingredients) हैं, इसलिए इन पर यह चेतावनी लागू नहीं होगी।

मानक तय करने के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद और राष्ट्रीय पोषण संस्थान (ICMR-NIN) द्वारा जारी 'डाइटरी गाइडलाइंस फॉर इंडियंस 2024' (Dietary Guidelines for Indians, 2024) में निर्धारित न्यूट्रिएंट थ्रेशोल्ड को आधार बनाया गया है।

भारत में क्यों जरूरी हुआ यह फैसला? लाइफस्टाइल बीमारियों की बढ़ती महामारी

भारत वर्तमान में गंभीर गैर-संचारी रोगों (Non-Communicable Diseases – NCDs) जैसे टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, फैटी लिवर, कम उम्र में दिल के दौरे और बचपन में बढ़ते मोटापे (Childhood Obesity) की चुनौती से जूझ रहा है।

वैश्विक अध्ययनों और मेडिकल रिसर्च से यह साबित हो चुका है कि जब लोग सुपरमार्केट या किराने की दुकान से सामान खरीदते हैं, तो लाल रंग का चेतावनी सिंबल उन्हें अनहेल्दी विकल्पों से दूर रहने और स्वस्थ विकल्प चुनने में 60% से अधिक प्रभावी ढंग से मदद करता है। चिली, मैक्सिको और ब्राजील जैसे देशों में जब इसी तरह के ब्लैक और रेड वार्निंग लेबल्स लागू किए गए, तो वहां पैकेज्ड शुगरी ड्रिंक्स और जंक फूड की खपत में 20% से 30% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया और आगे की राह

सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और न्यूट्रिशन एडवोकेसी ग्रुप्स ने FSSAI के इस फैसले का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही कुछ सुधारों की भी मांग की है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि चरण-1 में 'दो या दो से अधिक' तत्वों की शर्त के कारण केवल बहुत ज्यादा मीठे ड्रिंक्स या बहुत ज्यादा नमक वाले प्रोडक्ट्स छूट न जाएं, इसलिए चरण-2 को बिना किसी देरी के जल्द लागू किया जाना चाहिए। साथ ही, भारत की भाषाई विविधता को देखते हुए चेतावनी को अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में भी बड़े आकार में छापा जाना चाहिए।

FSSAI बहुत जल्द इस प्रस्ताव को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (लेबलिंग एंड डिस्प्ले) रेगुलेशंस में संशोधन के रूप में आधिकारिक गजट में अधिसूचित करेगा। आने वाले दिनों में जब आप बाजार से कोई पैकेट खरीदेंगे, तो पैकेट के आगे लगा यह लाल निशान आपको और आपके परिवार को अनजाने में जहर जैसी अतिरिक्त चीनी और वसा खाने से बचाने में एक शक्तिशाली रक्षा कवच साबित होगा।

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