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घर पर ही इन 5 आसान योगासनों से पाएं गजब की फिटनेस, फेफड़े और शरीर रहेंगे दुरुस्त

सर्दियों की दस्तक के साथ ही दिल्ली-एनसीआर समेत देश के तमाम बड़े शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। हवा में तैरते जहरीले धुंध और स्मॉग के बीच सुबह और शाम के वक्त खुली हवा में सांस लेना भी किसी चुनौती से कम नहीं रह गया है। आमतौर पर सेहत बनाने के लिए लोग सुबह-सुबह पार्कों में दौड़ लगाते हैं या जिम का रुख करते हैं, लेकिन गंभीर वायु प्रदूषण के इस दौर में बाहर जाकर भारी वर्कआउट करना फायदे की जगह फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। वातावरण में घुले अति सूक्ष्म कण जैसे पीएम 2.5 (PM2.5) और पीएम 10 (PM10) गहरी सांस लेने पर सीधे श्वसन नली के जरिए फेफड़ों की गहराई तक पहुंच जाते हैं और खून में घुलकर हृदय तथा शरीर के अन्य संवेदनशील अंगों को बीमार बना सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि जब प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा हो, तो खुले में जाने से बचना ही सबसे समझदारी भरा कदम है। ऐसे हालात में अपनी दिनचर्या और फिटनेस से समझौता करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, क्योंकि घर के सुरक्षित वातावरण में रहकर किए जाने वाले 5 पारंपरिक योगासन आपके पूरे शरीर को ऊर्जावान, लचीला और निरोगी बनाए रखने के लिए सबसे प्रभावी और सुरक्षित विकल्प साबित होते हैं।

सूर्य नमस्कार से करें दिन की शुरुआत: 12 शक्तिशाली स्टेप्स में छिपा है फुल बॉडी वर्कआउट का राज

घर के भीतर रहकर पूरे शरीर की मांसपेशियों को सक्रिय करने के लिए सूर्य नमस्कार से बेहतर कोई दूसरा अभ्यास नहीं हो सकता। सूर्य नमस्कार केवल एक साधारण आसन नहीं है, बल्कि यह 12 शक्तिशाली और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित आसनों का एक संपूर्ण क्रमबद्ध चक्र है। सुबह उठने के बाद शरीर में होने वाली अकड़न और सुस्ती को दूर भगाने में इसका अभ्यास जादू की तरह काम करता है। जब आप 12 स्टेप्स के इस पूरे सेट को लयबद्ध तरीके से सांसों के तालमेल के साथ दोहराते हैं, तो सिर से लेकर पैर के अंगूठे तक की हर नस में रक्त संचार (ब्लड सर्कुलेशन) तेजी से सुधरता है। यह फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढ़ाता है, रीढ़ की हड्डी में गजब का लचीलापन लाता है और मेटाबॉलिज्म को तेज करता है। नियमित रूप से 5 से 10 चक्र सूर्य नमस्कार करने से कार्डियोवैस्कुलर मजबूती मिलती है और आप बिना किसी भारी वजन को उठाए दिनभर ऊर्जा और ताजगी से भरे रहते हैं।

भुजंगासन से दूर करें पीठ दर्द और जकड़न: सीना चौड़ा कर फेफड़ों को देता है भरपूर ऑक्सीजन

दिनभर कंप्यूटर स्क्रीन के सामने घंटों बैठे रहने और प्रदूषण के कारण घरों में सिमट जाने से लोगों में पीठ दर्द, सर्वाइकल और कंधों में जकड़न की समस्या तेजी से बढ़ती है। ऐसे में कोबरा पोज यानी भुजंगासन शरीर के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। पेट के बल लेटकर हथेलियों के सहारे छाती को ऊपर उठाने वाला यह अभ्यास मुख्य रूप से पीठ, कमर और पेट की मांसपेशियों को गहराई से स्ट्रेच कर मजबूत बनाता है। जब आप भुजंगासन की मुद्रा में आते हैं, तो आपकी छाती का घेरा फैलता है, जिससे फेफड़ों को फैलने और ज्यादा ऑक्सीजन ग्रहण करने में सीधी मदद मिलती है। इसके अलावा, यह आसन उदर (पेट) के आंतरिक अंगों पर हल्का दबाव डालकर पाचन क्रिया को उत्तेजित करता है और शरीर में ऊर्जा के स्तर को ऊपर उठाता है। सुबह खाली पेट 5 से 7 बार गहरी सांसों के साथ भुजंगासन का अभ्यास करने से रीढ़ की हड्डी लचीली रहती है और शरीर का पॉस्चर एकदम सही बना रहता है।

पवनमुक्तासन से पाएं गैस और भारीपन से छुटकारा: पेट की चर्बी घटाने और मेटाबॉलिज्म तेज करने में असरदार

मौसम बदलने और प्रदूषण के डर से घरों में बंद रहने की वजह से लोगों की शारीरिक गतिविधियां (फिजिकल एक्टिविटी) अचानक काफी कम हो जाती हैं। गतिशीलता घटने का सबसे पहला असर हमारे पाचन तंत्र पर पड़ता है, जिसके चलते गैस बनना, खट्टी डकारें, अपच, कब्ज और पेट में भारीपन की शिकायत आम हो जाती है। इन तमाम परेशानियों से प्राकृतिक तरीके से राहत पाने के लिए पवनमुक्तासन सबसे कारगर योग मुद्रा है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह आसन आंतों में रुकी हुई अतिरिक्त और दूषित गैस को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़ते हुए छाती से सटाने की यह प्रक्रिया पेट के निचले हिस्से की चर्बी को कम करने में भी सहायक है और सुस्त पड़े मेटाबॉलिज्म को दोबारा सक्रिय कर देती है। रोजाना 8 से 10 बार पवनमुक्तासन करने से पेट हल्का महसूस होता है, पाचन अग्नि तीव्र होती है और शरीर में गजब की फुर्ती बनी रहती है।

वीरभद्रासन और ताड़ासन से बनाएं लोअर बॉडी मजबूत: स्टैमिना बढ़ाने और पॉस्चर सुधारने का अचूक फॉर्मूला

जिम जाए बिना पैरों, जांघों और कूल्हों की मांसपेशियों को फौलादी मजबूती देने के लिए वीरभद्रासन यानी वॉरियर पोज एक बेजोड़ अभ्यास है। वीरभद्रासन शरीर के संतुलन (बैलेंस) को सुधारता है, मानसिक एकाग्रता को बढ़ाता है और पूरे लोअर बॉडी को शानदार तरीके से टोन करता है। यह आसन पैरों की पिंडलियों और जांघों में ताकत भरकर शरीर के ओवरऑल स्टैमिना को दोगुना कर देता है। इसके साथ ही, अपने योगाभ्यास के अंत में ताड़ासन का अभ्यास जरूर शामिल करना चाहिए। ताड़ासन देखने में भले ही एक बेहद सरल अभ्यास प्रतीत हो, लेकिन पंजों के बल खड़े होकर दोनों हाथों को आसमान की ओर खींचने की यह मुद्रा रीढ़ की हड्डी के हर जोड़ को खोल देती है। यह पूरे शरीर में एक सुखद खिंचाव लाता है, गलत ढंग से बैठने या लेटने के कारण बिगड़े बॉडी पॉस्चर को सीधा करता है और स्नायु तंत्र को शांत करता है। सुबह के वक्त केवल 5 से 10 मिनट ताड़ासन करने से मन एकाग्र होता है और शरीर पूरी तरह हल्का व तरोताजा महसूस करने लगता है।

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