उत्तर प्रदेश

30 नदियां, लेकिन ‘रानी’ एक ही! जानिये उत्तर प्रदेश की सबसे लंबी नदी का पूरा सफर, जो बिजनौर से घुसकर गाजीपुर तक बहती है

यूपी की असली लाइफलाइन:उत्तर प्रदेश सिर्फ आबादी के लिहाज से ही नंबर वन नहीं है,बल्कि कुदरत ने भी इसे दिल खोलकर नेमतें बख्शी हैं। खेत-खलिहान हों या जंगल,यूपी की जमीन बेहद उपजाऊ है। और इस उपजाऊपन का पूरा श्रेय जाता है यहां बहने वाली नदियों को।वैसे तो प्रदेश में करीब30छोटी-बड़ी नदियां बहती हैं,जिनमें यमुना,गोमती,घाघरा और रामगंगा जैसे बड़े नाम शामिल हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यूपी की सबसे बड़ी और सबसे लंबी नदी (Longest River of UP)कौन सी है?वह कोई और नहीं,बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र’गंगा’है। आइये जानते हैं यूपी में गंगा के इस सफर के बारे में।यूपी में1450किलोमीटर का’महा-सफर’गंगा नदी अपनी पूरी यात्रा में करीब2525किलोमीटरबहती है,लेकिन इसका सबसे बड़ा और अहम हिस्सा उत्तर प्रदेश में ही गुजरता है। अपने उद्गम से निकलने के बाद यह नदी यूपी के दिल से होकर करीब1450किलोमीटरतक बहती है। यही वजह है कि इसे प्रदेश की’लाइफलाइन’कहा जाता है।बिजनौर से एंट्री,गाजीपुर से विदाईयह जानना बहुत दिलचस्प है कि गंगा यूपी में कहाँ से आती है और कहाँ से जाती है।उद्गम:यह उत्तराखंड के’गोमुख ग्लेशियर’से निकलती है। पहाड़ों का सफर तय करते हुए हरिद्वार के मैदानी इलाकों में आती है।यूपी में प्रवेश:इसके बाद यहबिजनौरजिले के जरिए उत्तर प्रदेश की सीमा में दाखिल होती है।प्रमुख पड़ाव:बिजनौर के बाद यह गढ़मुक्तेश्वर,फर्रूखाबाद,कन्नौज और बिठूर होते हुए इंडस्ट्रियल सिटी कानपुर पहुँचती है।संगम:इसके बाद आता है इसका सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव—प्रयागराज। यहाँ गंगा अपनी’सहेली’यमुना से मिलती है,जिसे हम’संगम’कहते हैं।विदाई:प्रयागराज से आगे बढ़ते हुए वाराणसी,मिर्जापुर होते हुए यहगाजीपुरपहुंचती है,जो यूपी में इसका आखिरी जिला है। इसके बाद यह बिहार की तरफ निकल जाती है।किसानों के लिए सोना और भक्तों के लिए मोक्षगंगा नदी यूपी के लिए सिर्फ पानी का स्रोत नहीं है।खेती का आधार:गंगा और यमुना मिलकर जो’दोआब’ (दो नदियों के बीच की जमीन) बनाते हैं,वहां की जलोढ़ मिट्टी (Alluvial Soil)दुनिया की सबसे उपजाऊ मिट्टियों में से एक है। यहाँ गेहूं और धान की बंपर पैदावार इसी नदी की बदौलत होती है।मोक्षदायिनी:धार्मिक नजरिये से देखें तो बनारस के घाट हों या प्रयाग का कुंभ,सब गंगा के बिना अधूरे हैं। इसे’पापनाशिनी’माना जाता है। यूपी का हर वह शहर जहाँ से गंगा गुजरती है,वहां इसके किनारे बने घाट लोगों की सुबह और शाम का हिस्सा हैं।तो अगली बार जब आप गंगा किनारे बैठें,तो याद रखिएगा कि आप उस नदी को देख रहे हैं जो1450किलोमीटर तक यूपी की प्यास बुझाती है!

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