मनोरंजन

CJP प्रदर्शन पर क्यों खामोश रहे दिलजीत दोसांझ? आखिरकार तोड़ी चुप्पी, बोले- ‘मुझे देश विरोधी कहा गया

मनोरंजन जगत और संगीत की दुनिया के सबसे लोकप्रिय सितारों में शुमार दिलजीत दोसांझ इन दिनों अपने बयानों को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में छाए हुए हैं। हाल ही में चर्चा का विषय बने CJP से जुड़े प्रदर्शनों और विभिन्न मुद्दों पर अपनी चुप्पी साधने को लेकर आखिरकार दिलजीत ने खुलकर बात की है। सोशल मीडिया से लेकर सार्वजनिक मंचों पर लगातार उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने दर्द बयां किया कि कैसे अतीत में उन्हें बिना किसी ठोस वजह के 'देश विरोधी' तक करार दे दिया गया था। गायक और अभिनेता के इस बेबाक बयान ने उनके फैंस और राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है, आइए जानते हैं कि उन्होंने इस पूरे विवाद पर क्या कुछ कहा है।

क्यों सवालों के घेरे में आए थे दिलजीत दोसांझ और क्या था पूरा मामला

अपने गानों और दमदार अभिनय से दुनिया भर में भारत का नाम रोशन करने वाले दिलजीत दोसांझ जब भी किसी बड़े सामाजिक या राजनीतिक मुद्दे पर सीधे तौर पर अपनी राय नहीं रखते हैं, तो सोशल मीडिया पर उनके आलोचक और फैंस दोनों ही सवाल खड़े करने लगते हैं। हालिया CJP प्रदर्शनों के दौरान भी उनकी खामोशी को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे। लोगों के मन में यह उत्सुकता थी कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुका यह कलाकार ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर सामने क्यों नहीं आ रहा है। इसी कशमकश के बीच दिलजीत ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए उन तमाम आलोचकों को करारा जवाब दिया है जो उनकी चुप्पी पर सवाल उठा रहे थे।

अतीत के जख्मों को याद कर छलका दर्द, कहा- मुझे देश विरोधी कहा गया था

मीडिया इंटरव्यू और अपने हालिया संबोधन में दिलजीत दोसांझ ने बेहद भावुक और स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब भी वे समाज या देश के हित में अपनी बात रखने की कोशिश करते हैं, तो एक वर्ग द्वारा उन्हें निशाना बनाकर 'देश विरोधी' साबित करने की कोशिश की जाती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कुछ लोगों को कला और कलाकारों से ज्यादा विवाद पैदा करने में दिलचस्पी होती है। अतीत में उन्हें किस तरह की मानसिक प्रताड़ना और झूठे आरोपों का सामना करना पड़ा था, उसका जिक्र करते हुए उन्होंने यह स्पष्ट किया कि हर बार हर मुद्दे पर अपनी सफाई देना जरूरी नहीं समझता, क्योंकि उनके दिल में अपने देश और संस्कृति के प्रति जो सम्मान है, उसे किसी प्रमाण की जरूरत नहीं है।

कलाकारों की सामाजिक जिम्मेदारी और जनता की उम्मीदें

दिलजीत दोसांझ का यह बयान इस पुरानी और लंबी बहस को फिर से हवा दे रहा है कि क्या लोकप्रिय हस्तियों के लिए हर राजनीतिक या सामाजिक प्रदर्शन पर अपनी मुहर लगाना अनिवार्य होना चाहिए। एक तरफ जहां फैंस और एक्टिविस्ट्स चाहते हैं कि उनके चहेते सितारे हर बड़े मुद्दे पर खुलकर आवाज उठाएं, वहीं कलाकारों का एक वर्ग यह मानता है कि उन्हें केवल अपनी कला के माध्यम से लोगों का मनोरंजन करने और सकारात्मक संदेश देने तक सीमित रहना चाहिए। इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सोशल मीडिया के इस दौर में किसी भी सेलिब्रिटी के लिए खामोश रहना या बोलना, दोनों ही चीजें बड़ी चर्चा का विषय बन जाती हैं।

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