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IPL के असली वजूद पर ललित मोदी का बड़ा खुलासा ,इसे BCCI की सब्सिडियरी नहीं, एक स्वतंत्र कंपनी बनना था

News India Live, Digital Desk: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के जनक और पूर्व कमिश्नर ललित मोदी ने एक ऐसा बयान दिया है जिससे भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के गलियारों में खलबली मच गई है। मोदी ने खुलासा किया है कि उनके मूल विजन में आईपीएल को बीसीसीआई की एक सहायक इकाई (Subsidiary) के बजाय एक पूरी तरह से स्वतंत्र कंपनी (Independent Company) के रूप में स्थापित करने का प्रस्ताव था। ललित मोदी के अनुसार, अगर ऐसा होता तो आज आईपीएल का वैश्विक प्रभाव और इसकी वित्तीय संरचना कुछ और ही होती।क्या था ललित मोदी का ‘मास्टर प्लान’?ललित मोदी ने एक इंटरव्यू में बताया कि जब 2008 में आईपीएल की नींव रखी गई थी, तब उन्होंने इसे एक अलग कॉर्पोरेट इकाई के रूप में रजिस्टर करने का सुझाव दिया था।स्वतंत्र बोर्ड: इस कंपनी का अपना अलग बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स होता, जिसमें बीसीसीआई के प्रतिनिधियों के साथ-साथ प्रोफेशनल कॉर्पोरेट दिग्गज और स्वतंत्र सदस्य शामिल होते।लिस्टिंग की योजना: मोदी का विजन इसे शेयर बाजार में लिस्ट कराने का भी था, जिससे आम लोग भी इस लीग के हिस्सेदार बन पाते।निर्णय लेने की आजादी: एक स्वतंत्र कंपनी होने के नाते आईपीएल को राजनीतिक हस्तक्षेप से दूर रखा जा सकता था और व्यावसायिक फैसले तेजी से लिए जा सकते थे।बीसीसीआई ने क्यों ठुकराया यह प्रस्ताव?ललित मोदी के अनुसार, बीसीसीआई के तत्कालीन आलाकमान ने इस विचार को सिरे से खारिज कर दिया था। इसके पीछे की मुख्य वजह ‘कंट्रोल’ थी।वित्तीय नियंत्रण: बीसीसीआई नहीं चाहता था कि आईपीएल जैसी ‘सोने की चिड़िया’ उनके सीधे नियंत्रण से बाहर जाए। स्वतंत्र कंपनी बनने का मतलब होता कि रेवेन्यू का ऑडिट और प्रबंधन बीसीसीआई के मुख्य खातों से अलग होता।वर्चस्व: आईपीएल के स्वतंत्र होने से बीसीसीआई की शक्ति कम हो जाती, क्योंकि लीग खुद ही दुनिया की सबसे बड़ी स्पोर्ट्स प्रॉपर्टी बनने की राह पर थी।अगर स्वतंत्र कंपनी होती, तो आज क्या बदल जाता?विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ललित मोदी का यह प्रस्ताव मान लिया गया होता, तो आज स्थिति कुछ ऐसी होती:ग्लोबल एक्सपेंशन: आईपीएल की टीमें और ब्रांड दुनिया भर की अन्य लीगों (जैसे SA20 या ILT20) को खरीदने के बजाय, खुद आईपीएल ही एक ग्लोबल अंब्रेला ब्रांड बन चुका होता।वैल्यूएशन: एक स्वतंत्र कंपनी के रूप में आईपीएल की मार्केट वैल्यू आज के अनुमानित $16 बिलियन (करीब ₹1.3 लाख करोड़) से कहीं अधिक होती।पारदर्शिता: कॉर्पोरेट गवर्नेंस के कारण लीग के कामकाज और विवादों (जैसे फिक्सिंग स्कैंडल) को संभालने का तरीका अधिक प्रोफेशनल होता।’बीसीसीआई की जागीर बनकर रह गया आईपीएल’ललित मोदी ने अपने बयान में तंज कसते हुए कहा कि वर्तमान में आईपीएल केवल बीसीसीआई की एक ‘कैश काऊ’ (दुधारू गाय) बनकर रह गया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में अगर आईपीएल को अपनी पूरी क्षमता का दोहन करना है, तो उसे एक न एक दिन बीसीसीआई के प्रशासनिक ढांचे से बाहर निकलकर एक स्वतंत्र व्यावसायिक इकाई के रूप में काम करना ही होगा।

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